मां गंगा की गोद में उड़ेला गया 165 लीटर देसी घी, वैज्ञानिकों ने ऐसा क्या कहा? लोग बोले- ‘अब तो संभल जाओ’!


सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने पूरे देश में बहस छेड़ दी है, जिसमें श्रद्धालु नाव में भरकर लाए गए 165 लीटर से अधिक देसी घी को मां गंगा की लहरों में उड़ेलते नजर आ रहे हैं. पहली नजर में यह एक भव्य धार्मिक अनुष्ठान लग सकता है, लेकिन पर्यावरणविदों और आम लोगों की नजर में यह गंगा के इकोसिस्टम पर एक बड़ा हमला है. इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे घी की मोटी परत नदी की सतह पर फैल रही है. इंटरनेट यूजर्स का गुस्सा इस बात पर है कि घी पानी से हल्का होता है और सतह पर जमने के बाद यह पानी में ऑक्सीजन जाने से रोकता है, जिससे मछलियां और अन्य जलीय जीव मर सकते हैं.

जहां कुछ लोग इसे सदियों पुरानी परंपरा बता रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में लोग इसे अंधभक्ति और प्रदूषण का कारण मान रहे हैं. आखिर क्यों पवित्रता के प्रतीक गंगा को श्रद्धा के नाम पर ही संकट में डाला जा रहा है?

क्या है वायरल वीडियो का पूरा मामला?
सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ लोग गंगा नदी में बड़ी मात्रा में देसी घी चढ़ाते नजर आ रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि यह मात्रा 165 लीटर से ज्यादा है. वीडियो में एक महिला और एक पुरुष नदी किनारे खड़े होकर बर्तन से धीरे-धीरे घी बहाते दिखते हैं. उनके चेहरे पर पूरी श्रद्धा नजर आती है. जैसे-जैसे वीडियो आगे बढ़ता है और लोग इसमें जुड़ते दिखते हैं. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। कुछ पुरुष बड़े-बड़े कैन लेकर आते हैं, जिन्हें सावधानी से नाव में रखा जाता है. इससे साफ हो जाता है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति का काम नहीं, बल्कि एक संगठित समूह द्वारा किया गया धार्मिक अनुष्ठान है.

नदी के बीच क्या हुआ?
वीडियो के अगले हिस्से में नाव नदी के बीच पहुंचती है. वहां खड़े लोग एक-एक कर कैन खोलते हैं और घी को सीधे पानी में उड़ेलना शुरू कर देते हैं. घी की मोटी परत पानी की सतह पर फैलती जाती है. यह सिलसिला लगातार चलता रहता है, जब तक कि सारे कैन खाली नहीं हो जाते. जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, लोगों के कमेंट्स की बाढ़ आ गई. कई यूजर्स ने इसे पर्यावरण के लिए खतरनाक बताया. उनका कहना है कि घी पानी से हल्का होता है और सतह पर परत बनाता है, जिससे पानी में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो सकती है. इससे मछलियों और अन्य जलीय जीवों की जान को खतरा हो सकता है.

कुछ यूजर्स ने कहा कि धर्म का सम्मान जरूरी है, लेकिन ऐसे काम जो प्रकृति को नुकसान पहुंचाएं, उन पर सोचने की जरूरत है. वहीं कुछ ने इसे अंधभक्ति करार दिया और सवाल उठाया कि क्या धार्मिक अनुष्ठान के नाम पर पर्यावरण से खिलवाड़ सही है? यह पहली बार नहीं है जब गंगा में इस तरह की चीजें डालने को लेकर विवाद हुआ हो. पहले भी दूध, फूल और अन्य सामग्री डालने पर सवाल उठते रहे हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह के काम नदी की सेहत पर बुरा असर डाल सकते हैं.

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