लखनऊ। यूपी के माफिया डॉन और नेता अतीक अहमद हत्याकांड को दो साल होने को हैं। 15 अप्रैल 2023 को मीडियाकर्मी बनकर आए दो हमलवारों ने अतीक और उसके भाई अशरफ की पुलिस और टीवी कैमरों के साथ हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड के पीछे किसका हाथ था, इसकी गुत्थी अभी तक नहीं सुलझ पाई है। इस बीच वरिष्ठ पत्रकार मनोज राजन त्रिपाठी ने अतीक के काले साम्राज्य और उसके अंत पर कसारी-मसारी नाम से एक किताब लिखी है।
इस किताब में मनोज त्रिपाठी ने कई बड़े खुलासे किए हैं। जैसे- अतीक ने उमेश पाल की हत्या क्यों करवाई थी? अतीक के बेटे असद की लोकेशन पुलिस को कैसे मिली? अतीक ने अपने बेटे के एनकाउंटर को रोकने के लिए क्या-क्या कोशिशें की थी? इसके अलावा भी बहुत कुछ।
उमेश पाल को अतीक अहमद ने क्यों मरवाया?
पत्रकार मनोज राजन त्रिपाठी अपनी किताब में बताते हैं कि उमेश पाल, अतीक अहमद के जमीनों की खरीद-फरोख्त का काम देखता था। इस बीच यूपी में सत्ता परिवर्तन के बाद यानी योगी आदित्यनाथ की सरकार आने के बाद उमेश ने अतीक के परिवार को कारोबार का पैसा देना बंद कर दिया। उमेश को लगने लगा कि अब अतीक का पहले जैसा दबदबा नहीं रहा और अब उसे अतीक गैंग से कोई खतरा नहीं है।
इस बीच एक दिन अतीक ने जेल से उमेश पाल को फोन किया और पैसे देने के लिए कहा। उमेश ने कहा कि वो जल्द ही अतीक की पत्नी शाइस्ता को पैसे देने के लिए जाएगा। इसके बाद एक शादी समारोह में उमेश पाल की शाइस्ता से मुलाकात होती है। इस बीच बातचीत में ही उमेश की शाइस्ता से कहासुनी हो जाती है। उमेश गुस्से में आकर शाइस्ता को काफी कुछ अनाप-शनाप बोल देता है।
फिर अतीक को जब ये बात पता चलती है तो वो आग-बबूला हो जाता है। गुजरात की साबरमती जेल में बंद अतीक ने तय किया कि अब उमेश पाल को रास्ते से हटाना है। इसके बाद वो उमेश पाल हत्याकांड की पूरी साजिश रचता है।
हत्याकांड के बाद फरार असद की लोकेशन कैसे मिली?
मनोज राजन त्रिपाठी बताते हैं कि उमेश पाल हत्याकांड के बाद अतीक का बेटा असद फरार हो जाता है। वो लगातार अपनी लोकेशन बदलता रहता है। इस दौरान यूपी एसटीएफ उसके पीछे हाथ धोकर पड़ी हुई थी। असद ने अपना फोन बदल लिया था, जिसकी वजह से उसकी लोकेशन ट्रेस कर पाना मुश्किल था।
इस बीच झांसी में मौजूद असद ने बड़ी गलती कर दी। उसने एक दिन अपनी नेटफ्लिक्स आईडी लॉगिन की। असद ने जैसे ही फोन पर नेटफ्लिक्स आईडी लॉगिन की, तुरंत पुलिस को उसकी लोकेशन पता चल गई और वो मुठभेड़ में मारा गया।
बेटे को बचाने के लिए अतीक ने क्या कोशिशें की?
किताब कसारी-मसारी में पत्रकार मनोज राजन त्रिपाठी लिखते हैं कि जेल में अतीक ने अपने बेटे असद को एनकाउंटर से बचाने की पूरी कोशिश की। उसने बीजेपी में मौजूद अपने लिंक्स के जरिए सीएम योगी आदित्यनाथ तक भी बात पहुंचाई कि उसके बेटे का एनकाउंटर न किया जाए। असद को सिर्फ गिरफ्तार किया जाए।
लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ की दफ्तर की ओर से साफ कह दिया गया कि असद से अब यूपी एसटीएफ अपने हिसाब से निपटेगी। सरकार की ओर से मिले इस जवाब के बाद अतीक जेल में भड़क गया। उसने कहा कि वो हमेशा जेल में नहीं रहेगा। वो जिस दिन जेल से निकला वो पुलिस और सरकार सबसे हिसाब चुकता कर लेगा।
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