हिमाचल की झरलोग पंचायत ने बी.पी.एल. परिवारों पर कसा शिकंजा—अब अगर बच्चे को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाया तो बी.पी.एल. सूची से बाहर कर दिया जाएगा। पंचायत ने स्वच्छता, विकास और शिक्षा सुधार को लेकर लिए कई सख्त फैसले। जानिए पूरी रिपोर्ट और क्या असर पड़ेगा ग्रामीण परिवारों पर

भोरंज उपमंडल के तहत आने वाली झरलोग पंचायत की ग्राम सभा बैठक में बड़ा निर्णय लिया गया है। अब बी.पी.एल.-BPL परिवारों को अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना अनिवार्य होगा। यदि कोई बी.पी.एल. परिवार अपने बच्चे को प्राइवेट स्कूल में भेजता है, तो उसका नाम बी.पी.एल. सूची से हटा दिया जाएगा। पंचायत ने यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया है और इसे पंचायत स्तर पर कड़ाई से लागू किया जाएगा।
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झरलोग पंचायत की ग्राम सभा द्वारा लिए गए फैसले ग्रामीण विकास, सामाजिक समानता और शिक्षा सुधार की दिशा में एक सामूहिक प्रयास का उदाहरण हैं। बी.पी.एल. सूची की पारदर्शिता सुनिश्चित करना, सरकारी स्कूलों को प्राथमिकता देना और स्वच्छता जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सख्त रुख अपनाना पंचायत प्रशासन की सजगता को दर्शाता है। अब देखना होगा कि यह निर्णय ज़मीनी स्तर पर किस हद तक प्रभावी साबित होता है।
पंचायत प्रतिनिधि बनाएंगे बी.पी.एल. परिवारों की नई सूची
ग्राम सभा में यह तय किया गया कि पंचायत के सभी प्रतिनिधि अपने-अपने वार्डों में जाकर ऐसे बी.पी.एल. परिवारों की सूची तैयार करेंगे जो अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। यह सूची तैयार कर पंचायत प्रधान को सौंपी जाएगी। इसके बाद संबंधित परिवारों के नाम बी.पी.एल. सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
पंचायत का मानना है कि अगर कोई परिवार अपने बच्चों की महंगी फीस वहन कर सकता है, तो वह बी.पी.एल. श्रेणी में पात्र नहीं हो सकता। ऐसे में सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का वास्तविक लाभ केवल उन्हीं लोगों को मिल सकेगा जो वास्तव में इसके हकदार हैं।
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ग्राम सभा में उठे विकास कार्यों के मुद्दे
पंचायत प्रधान नरेश ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित ग्राम सभा में 14वें वित्त आयोग (Finance Commission) के तहत मिले बजट से किए गए विकास कार्यों की समीक्षा की गई। ग्रामीणों ने इन कार्यों पर अपनी सहमति व्यक्त की। साथ ही, ग्रामीणों ने नलों में पानी न आने की समस्या को प्रमुखता से उठाया। इस मुद्दे को लेकर यह निर्णय लिया गया कि सिंचाई और जल स्वास्थ्य विभाग को इस बारे में जल्द ही अवगत करवाया जाएगा ताकि समस्या का शीघ्र समाधान किया जा सके।
स्वच्छता को लेकर सख्त रुख
बैठक में संपूर्ण स्वच्छता अभियान (Total Sanitation Campaign) को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए सख्त हिदायतें दी गईं। ग्रामवासियों को चेताया गया कि अगर कोई ग्रामीण या दुकानदार सड़क, रास्तों या सार्वजनिक स्थानों पर गंदा पानी फेंकता है तो पंचायत द्वारा उस पर जुर्माना लगाया जाएगा। स्वच्छता को लेकर पंचायत की यह सख्ती ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पंचायत प्रधान ने ग्रामीणों से मांगे सुझाव
पंचायत प्रधान नरेश ठाकुर ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि ग्राम सभा ही पंचायत की रीढ़ होती है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में ग्राम सभा में भाग लें और विकास कार्यों को लेकर अपने सुझाव दें। इससे पंचायत की योजनाओं को ज़मीनी स्तर पर मजबूती मिलती है और ग्रामीण विकास की प्रक्रिया तेज होती है।
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सामाजिक समानता की दिशा में बड़ा कदम
बी.पी.एल. परिवारों की पात्रता को लेकर लिया गया यह निर्णय सामाजिक और आर्थिक समानता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। अक्सर यह देखा जाता है कि कुछ आर्थिक रूप से सक्षम परिवार योजनाओं का लाभ उठाने के लिए बी.पी.एल. सूची में बने रहते हैं, जिससे वास्तविक गरीब और जरूरतमंद वंचित रह जाते हैं। झरलोग पंचायत की यह पहल अन्य पंचायतों के लिए भी एक मिसाल बन सकती है।
शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की कोशिश
सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए यह कदम पंचायत द्वारा उठाया गया एक प्रयास भी है। अगर सभी बी.पी.एल. परिवार अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजेंगे तो इससे सरकारी स्कूलों में छात्रों की संख्या बढ़ेगी और शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।