गजब! हनीमून मनाने गए, दहेज के लिए लड़ बैठे पति-पत्नी; अब घर के बाहर धरने पर बैठी दुल्हन

गजब! हनीमून मनाने गए, दहेज के लिए लड़ बैठे पति-पत्नी; अब घर के बाहर धरने पर बैठी दुल्हन

ससुराल में धरने पर बैठी दुल्हन

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक हैरान करने वाली घटना हुई है. यहां नई मंडी कोतवाली क्षेत्र के A2Z पोर्स कॉलोनी में रहने वाले एक युवक की फरवरी में शादी हुई थी और उसके बाद दूल्हा और दुल्हन हनीमून मनाने बाली और श्रीलंका की टूर पर निकल गए. वहां जाते ही इनके बीच दहेज के लिए झगड़ा हो गया. इसके बाद हनीमून बीच में ही छोड़ कर वापस लौट आए और दूल्हे ने परंपरा का हवाला देकर दुल्हन को मायके पहुंचा दिया. अब ससुराली जन उसे घर में घुसने नहीं दे रहे हैं.

उधर दुल्हन शालिनी ने भी अपने ससुराल के बाहर टेंट लगाकर धरना शुरू कर दिया है. दुल्हन का आरोप है कि ससुराल पक्ष के लोगों ने दहेज में 50 लाख रुपये की डिमांड की है. यह कोई छोटी रकम तो है नहीं कि इन्हें तत्काल दे दिया जाए, लेकिन इन लोगों ने उसे घर में घुसने पर ही रोक लगा दी है. शालिनी के मुताबिक उसकी शादी 12 फरवरी को हुई थी. 13 फरवरी को वह ससुराल आई और अगले ही दिन वह अपने पति के साथ हनीमून मनाने निकल गई. उन्हें घूमने के लिए पहले बाली और फिर श्रीलंका जाना था.

हनीमून छोड़ कर लौट आए थे दूल्हा-दुल्हन

शालिनी के मुताबिक वह अभी बाली में ही थी कि पति ने घर बनाने और शादी में खर्च का हवाला देते हुए दहेज में 50 लाख रुपयों का डिमांड करने लगा. इस बात पर उनके बीच कहासुनी हो गई. इसके बाद वह लोग हनीमून छोड़ कर घर लौट आए. यहां आने पर ससुरालियों ने परंपरा का हवाला देते हुए होली से पहले उसे मायके भेज दिया. होली बाद ससुराली जन उसे विदा कराने के लिए गए थी थे, लेकिन वहां भी दहेज की बात पर परोसा हुआ खाना छोड़ कर चले आए.

दुल्हन ने दी आत्मदाह की धमकी

इसके बाद उसने ससुरालीजनों से कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन इन्होंने बात नहीं की. आखिर में परेशान होकर वह खुद ससुराल आ गई, लेकिन यहां इन लोगों ने कई घंटे तक दरवाजा नहीं खोला. आखिर में वह अपने परिजनों के साथ धरने पर बैठ गई है. दुल्हन ने चेतावनी दी है कि कल तक ससुराल में उसकी एंट्री नहीं हुई तो वह यहीं पर सपरिवार आत्मदाह करेगी. उधर, शालिनी के चाचा आशीष कुमार ने बताया कि जब तक उनकी बेटी की घर में एंट्री नहीं होती, उन लोगों का धरना जारी रहेगा. भले ही उन्हें यहीं पर बैठकर छह महीने इंतजार करना पड़े.

रिपोर्ट: रविन्द्र सिंह, मुज़फ्फरनगर (UP)

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