
ग्मंगल ग्रह पर मकड़ी के अंडों जैसी संरचना मिली है.
मंगल ग्रह से चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है. नासा के पर्सिवियरेंस मार्स रोवर ने मंगल ग्रह की एक तस्वीर ली है. तस्वीर में मंगल ग्रह पर मकड़ी के अंडों जैसी संरचना नजर आ रही है. अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA का कहना है, इस तस्वीर ने पर्सिवियरेंस साइंस टीम को चौंका दिया है. मंगल ग्रह की चट्टान पर मिलिमीटर आकार के गोले नजर आ रहे हैं. टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह रहस्यमय चीज क्या है और इसकी उत्पत्ति कैसे हुई.
जिस चट्टान पर यह अजीबोगरीब तस्वीर ली गई वो जेज़ेरो क्रेटर के किनारे विच हेज़ल हिल की ढलानों पर है. यहां हल्की लाल रेत जमी हुई है. मंगल ग्रह पर ऐसी संरचना क्यों बनी है, नासा ने इसका जवाब भी दिया है.
कैसे बने ‘मकड़ी के अंडे’, नासा ने क्या कहा?
नासा का कहना है, जिस जगह पर मिलीमीटर आकार के गहरे भूरे रंग के गोलेनुमा संरचना पाई गई है उसे टीम ने सेंट पॉल्स बे नाम दिया है. आमतौर पर इसमें गोले नजर आ रहे हैं, लेकिन इसमें कुछ का आकार अलग भी है. मंगल ग्रह पर ऐसी संरचना क्यों बनी, अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने इसका जवाब भी दिया है.
नासा का कहना है, यहां कुछ ऐसा हुआ है कि चट्टान अपनी जगह से खिसकी है. हो सकता है कि यह चट्टान तब बनी हो जब मंगल ग्रह पर उल्कापिंड गिरा हो, जिससे चट्टान वाष्पीकृत हो गई हो और फिर संघनित होकर फोटो में दिख रहे छोटे कणों में बदल गई हो. अगर ऐसा था, तो चट्टान अपने वर्तमान जगह से कहीं दूर बनी होगी. इससे पता चल सकता है कि उल्कापिंडों के हमले मंगल ग्रह की चीजों को कैसे इधर से उधर पहुंचा देते हैं. नतीजा, ऐसी संरचनाएं बन जाती हैं.

मंगल ग्रह के जिस हिस्से में यह संरचना पाई गई है उसे सेंट पॉल्स बे नाम दिया है.
अभी और खुलेंगे राज
नासा का कहना है कि यह भी संभव है कि चट्टान विच हेज़ल हिल से लुढ़ककर नीचे आई हो. यह पहाड़ी पर मौजूद उन गहरे रंग की परतों में से एक से उत्पन्न हुई हो सकती है, जिसका वैज्ञानिकों ने पता लगाया है. विच हेज़ल हिल का नज़दीक से अध्ययन करने से वैज्ञानिकों को पता चल सकता है कि वे गहरे रंग की परतें किससे बनी हैं. अगर वो सेंट पॉल्स बे की संरचना के समान हैं, तो यह ज्वालामुखी की एक परत, एक पुराना उल्कापिंड का प्रहार, या पानी की उपस्थिति का संकेत दे सकता है.
नासा के बयान से साफ है कि इसको लेकर अध्ययन किया जा रहा है और इसके बारे में कई नई जानकारियां सामने आ सकती हैं.सेंट पॉल बे की इस संरचना से वैज्ञानिकों को इस बात के संकेत मिले हैं कि कैसे मंगल ग्रह पर समय-समय पर बदलाव होते रहे हैं. चट्टानों के निर्माण और मंगल ग्रह पर जल के साथ यह भी पता लगाने में मदद मिल सकती है कि क्या ग्रह पर अतीत में जीवन मौजूद था.
अगर विच हेज़ल हिल में कभी भूजल था, तो पर्सिवियरेंस द्वारा एकत्रित किए जा रहे कुछ चट्टान के नमूनों में जीवन हो सकता है. नासा अपने मार्स सैंपल रिटर्न मिशन से चट्टान के नमूनों को इकट्ठा करेगा और उन्हें आगे के अध्ययन के लिए पृथ्वी पर वापस लाएगा.
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