Tenant Rights : एक साल में ज्यादा से ज्यादा कितना किराया बढ़ा सकता है मकान मालिक, किराएदारों को पता होने चाहिए नियम

News Just Abhi- (Property Knowledge)। आज के समय में अधिकतर लोग रोजगार की वजह से दूसरे शहरों में जाते हैं। वहां पर जाकर अक्सर वे किराये का मकान लेते हैं। ऐसे में अक्सर किरायेदारों को इस बात की जानकारी नहीं होती है कि होती कि उनके क्या अधिकार है। अधिकारों (property rights of tenant) के बारे में जानकारी न होने की वजह से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ जाता है। इस वजह से आपको इस बारे में जानकारी होनी काफी ज्यादा जरूरी है ताकि आपको किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। खबर में जानिये इस बारे में पूरी डिटेल। 

केंद्रीय कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में संशोधन, DA होगा 58 प्रतिशत, सैलरी में 18 फिसदी का इजाफा

इस वजह से लोगों को किराये पर लेना पड़ जाता है मकान-

देश में लगातार बढ़ रहे शहरीकरण की वजह से लोगों के लिए शहरों और महानगरों में मकान (Rights of landlord) किराये पर देना एक उद्योग का रूप लेता जा रहा है। रोजगार की वजह से शहरों में आकर रहने वाले लोगों के पास इतनी पूंजी नहीं होती कि वे फ्लैट (Flat buying rules) खरीद सकें या अपना घर बनवा सकें। ऐसे में उनके पास घर को सिर्फ किराये पर लेने का ही विक्लप रह जाता है। ऐसे में किरायेदारों की संख्या लगातार बढ़ने और उपलब्‍ध मकानों की संख्या कम होने की वजह से अकसर किरायेदारों (kiraydar ke adhikar) को ऊंची दरों पर मकान लेना पड़ जाता है।

किरायेदारों को भी दिये गए है अधिकार-

सिर्फ इतना ही नहीं, समय-समय पर मकान मालिक (makan malik ke adhikar) की अनुसार ही किराये में बढ़ौतरी भी करके उनकी परेशानी को बढ़ा दिया जाता है। बढ़ती परेशरानी को देखते हुए ही विभिन्न राज्यों की सरकारों ने अपने यहां नया किरायेदारी कानून (Tenancy Laws) लागू कर रखे हैं। मिसाल के तौर पर महाराष्‍ट्र, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में अपने-अपने किराया कानून लागू हैं। इन किराया कानूनों में जहां किरायेदारों को मकान मालिकों की मनमानी से बचाने के उपाय किए गए हैं, वहीं मकान मालिकों (landlord rights in law) को भी कई अधिकारों को दिया गया है।

Income Tax की सबसे बड़ी रेड, ट्रक में ले जाने पड़े नोट, रुपये गिनने के लिए बैंक से बुलाए कर्मचारी

महाराष्ट्र में बनाएं गए हैं ये नियम-

महाराष्ट्र में 31 मार्च, 2000 से ही महाराष्ट्र किराया नियंत्रण अधिनियम (Maharashtra Rent Control Act) को लागू किया जा चुका है। इस कानून के तहत मकान मालिक किराए पर दिए गए परिसर के किराए में प्रतिवर्ष 4 प्रतिशत तक की वृद्धि करने का हकदार होता है। इसके अलावा संपत्ति (Property knowledge) की स्थिति में सुधार के लिए अगर मरम्मत, बदलाव या सुधार का कार्य को करवाया जाता है तो भी किराए में वृद्धि की जा सकती है। हालांकि, ऐसी स्थिति में किराये में की जाने वाली बढ़ौतरी कराए (rent hike rules in india) गए निर्माण कार्य की लागत का सिर्फ 15 प्रतिशत तक ही होना चाहिए। टैक्स में बढ़ौतरी होने की वजह से मकान मालिक को उसकी अदायगी के लिए भी वार्षिक किराया बढ़ाने का भी अधिकार है. ऐसी स्थिति में किराए में वृद्धि (Rent hike) बढ़े हुए कर की राशि से अधिक नहीं होनी चाहिए। 

दिल्‍ली में इन नियमों को किया गया है लागू-

दिल्ली में इस बारे में 2009 का रेंट कंट्रोल एक्ट (Rent Control Act) को लागू किया गया है। इसमें बताया गया है कि संपत्ति में अगर वहीं किरायेदार लगातार वृद्धि कर रहा है तो मकान मालिक या पट्टेदार को सालाना सात फीसदी से अधिक किराया बढ़ाने की इजाजत नहीं दी जाती है। यूनिट खाली होने पर मकान मालिक (Makan malik ke adhikar) को नए किरायेदारों से किराया बढ़ा कर लेने का अधिकार इस कानून में दिया गया है। इसके अलावा, छात्रावास, बेडिंग स्‍पेस या बोर्डिंग हाउस के रूप में किराये पर चलाई जा रही संपत्तियों (property knowledge) के मामले में वर्ष में केवल एक ही बार किराया बढ़ाने का अधिकार होता है।

यूपी में ये है कानूनी अधिकार-

यूपी नगरीय किराएदारी विनियमन अध्यादेश-2021 के जरिये लागू कानून में मकान मालिकों (makanmalik ke adhikar) को आवासीय भवनों के किराये में हर साल पांच प्रतिशत और गैर आवासीय भवनों के किराये में सात प्रतिशत तक के किराये को बढ़ाने का अधिकार है। इसमें किराया वृद्धि की गणना (Calculating the Rent Increase) चक्रवृद्धि के आधार पर ही की जाती है। अगर किराएदार दो माह किराया नहीं दे पा रहा है तो मकान मालिक उसे हटा सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *