कोबरा के जहर से 100 गुना ज्यादा शक्तिशाली है इस जीव का विष, आपके पैरों की उंगलियों से भी है छोटा

कोबरा के जहर से 100 गुना ज्यादा शक्तिशाली है इस जीव का विष, आपके पैरों की उंगलियों से भी है छोटा

किंग कोबरा और इनसेट में घातक इरुकांजी जेलीफिशImage Credit source: Pexels/MetaAI

जब भी किसी जहरीले जीव की चर्चा होती है, तो जेहन में सबसे पहले सांपों की छवि उभरती है. उसमें भी किंग कोबरा का नाम दिमाग में सबसे पहले आता है. यह दुनिया का सबसे लंबा विषैला सांप है, जो एक बार में इतना जहर छोड़ता है कि 20 लोग मौत की नींद सो जाएं. एक किंग कोबरा (King Cobra) 18.5 फीट तक लंबा हो सकता है. हालांकि, आकार ही सब कुछ नहीं होता. ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं कि क्योंकि दुनिया में एक ऐसा जीव भी है, जो साइज में आपके पैरों की उंगलियों जितना या यूं कहें कि उससे भी छोटा होता है, लेकिन उसका विष किंग कोबरा के जहर से 100 गुना अधिक शक्तिशाली होता है.

यहां बात हो रही है इरुकांजी जेलीफिश (Irukandji Jellyfish) की, जो ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी क्षेत्र में पाई जाती है. यह जेलीफिश अपने जहरीले डंक के लिए जानी जाती है, जो इंसानों के लिए जानलेवा हो सकता है. इसे ‘दुनिया की सबसे घातक जेलीफिश’ (Deadliest Jellyfish) का दर्जा हासिल है.

इरुकांजी जेलीफिश ने अगर डंक मार दिया, तो इससे होने वाला दर्द बहुत तेज और असहनीय होता है, जो कई दिनों तक रह सकता है. इसे ‘इरुकांजी सिंड्रोम’ कहते हैं. इससे पीड़ित की मानसिक स्थिति पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है, जैसे कि चिंता, डिप्रेशन और यहां तक कि उसे आत्महत्या के विचार भी आ सकते हैं. ये भी देखें:Viral: समंदर किनारे आया ‘अजीब जीव’, देख दहशत में आ गए लोग

शीशे-सा शरीर और इतनी होती है लंबाई

यह समुद्री जीव आकार में बहुत छोटा होता है, जो लगभग 1 सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है. वहीं, इरुकांजी का शरीर पारदर्शी होता है, जो इसे लगभग अदृश्य बना देता है. लेकिन इस जेलीफिश का जहर इतना शक्तिशाली होता है कि यह एक व्यक्ति को मारने के लिए काफी है.ये भी देखें: Viral: शख्स ने बकरी से कर ली शादी, प्यार में मिला धोखा नहीं कर पाया बर्दाश्त!

इसके जहर का कोई तोड़ नहीं

डरा देने वाली बात यह है कि इस इरुकांजी जेलीफिश के विष का कोई तोड़ नहीं है. यानि, इसके लिए अब तक कोई एंटीडोट नहीं बना है, जो इसे और भी घातक बना देता है. यह जेलीफिश समुद्री जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, और यह समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में मदद करती है.

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