Rapido समेत सभी बाइक टैक्सी बंद, हाई कोर्ट के फैसले से मचा बवाल

दिल्ली में रैपिडो समेत सभी बाइक टैक्सी सेवाएं बंद! हाई कोर्ट ने क्यों सुनाया ये सख्त फैसला? क्या अब सस्ती और तेज़ यात्रा का विकल्प खत्म हो गया है? जानिए कोर्ट की पूरी reasoning, सरकार की प्रतिक्रिया और रैपिडो का अगला कदम। पढ़ें पूरा मामला जो हर यात्री और ड्राइवर को जानना जरूरी है

Rapido समेत सभी बाइक टैक्सी बंद, हाई कोर्ट के फैसले से मचा बवाल

दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जिससे रैपिडो (Rapido) जैसी बाइक टैक्सी सेवाओं को बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने राजधानी दिल्ली में रैपिडो समेत सभी तरह की बाइक टैक्सी सेवाओं पर रोक लगा दी है। यह फैसला उन याचिकाओं के जवाब में आया है, जिनमें इन सेवाओं को वैधानिक मान्यता देने और उन्हें ट्रांसपोर्ट व्हीकल्स के रूप में पंजीकृत करने की मांग की गई थी।

यह मुद्दा पिछले कुछ समय से चर्चा में था और इस पर बहस भी चल रही थी कि क्या दोपहिया वाहनों को भी वाणिज्यिक परिवहन (Commercial Transport) के तौर पर इस्तेमाल करने की अनुमति दी जानी चाहिए। रैपिडो की ओर से दायर याचिका में यही मांग की गई थी कि बाइक टैक्सी सेवाओं को कानूनी मान्यता दी जाए।

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हाई कोर्ट का फैसला और इसका आधार

दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक दिल्ली सरकार की ओर से स्पष्ट नीतिगत दिशा-निर्देश या अनुमति नहीं दी जाती, तब तक बाइक टैक्सी सेवाओं को कानूनी मान्यता नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने कहा कि ऐसे वाहनों को पंजीकृत करने की प्रक्रिया भी मौजूदा मोटर वाहन अधिनियम और नियमों के अनुरूप होनी चाहिए।

इससे पहले रैपिडो को 2022 से अंतरिम राहत मिली हुई थी, जिसके तहत वह सीमित तौर पर अपनी सेवाएं जारी रख सकती थी। लेकिन हालिया सुनवाई में कोर्ट ने इस अंतरिम राहत को भी खत्म कर दिया और तत्काल प्रभाव से बाइक टैक्सी सेवाओं को बंद करने का निर्देश दिया।

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याचिकाकर्ताओं की मांग क्या थी?

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई थी कि दोपहिया वाहनों को ट्रांसपोर्ट व्हीकल्स की श्रेणी में लाकर उन्हें व्यावसायिक उपयोग की अनुमति दी जाए। इससे न सिर्फ रोजगार के अवसर बढ़ेंगे बल्कि शहरी परिवहन व्यवस्था में भी सुधार होगा। रैपिडो (Rapido) जैसी कंपनियों ने यह भी दावा किया था कि उनकी सेवाएं लोगों को तेज़, सस्ती और सुगम यात्रा विकल्प प्रदान करती हैं।

सरकार का पक्ष

दिल्ली सरकार की ओर से अदालत में बताया गया कि फिलहाल बाइक टैक्सी सेवाओं को अनुमति देने की कोई नीति नहीं है। मोटर व्हीकल एक्ट के तहत जिन वाहनों को निजी उपयोग के लिए पंजीकृत किया गया है, उन्हें व्यावसायिक उपयोग की अनुमति नहीं दी जा सकती।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की सेवाओं में सुरक्षा का भी एक बड़ा सवाल है। बाइक टैक्सी के लिए अभी तक कोई लाइसेंसिंग व्यवस्था या नियमन नीति नहीं बनाई गई है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

लोगों पर क्या होगा असर?

इस फैसले से लाखों यात्रियों को असुविधा हो सकती है, जो रोजाना रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल अपने ऑफिस या कामकाज के लिए करते हैं। खासतौर पर ट्रैफिक से जूझते महानगरों में बाइक टैक्सी एक त्वरित और सस्ता विकल्प बन चुकी थीं।

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लेकिन कोर्ट के इस फैसले के बाद इन सेवाओं पर तत्काल प्रभाव से रोक लगने से ना सिर्फ यात्रियों को परेशानी होगी, बल्कि हजारों ड्राइवर्स भी बेरोजगार हो सकते हैं जो इन ऐप्स के जरिए अपनी आजीविका चला रहे थे।

रैपिडो का अगला कदम क्या होगा?

रैपिडो ने संकेत दिए हैं कि वह इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकती है। इसके साथ ही कंपनी ने यह भी बताया कि वह फूड डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स जैसे अन्य सेक्टर्स में अपने ऑपरेशन्स को विस्तार देने की योजना बना रही है, जिससे बिजनेस प्रभावित न हो।

हाल ही में आई रिपोर्ट्स के मुताबिक रैपिडो स्विगी (Swiggy) और जोमैटो (Zomato) जैसे प्लेटफॉर्म्स के लिए भी लॉजिस्टिक्स पार्टनर बनकर काम कर रही है। ऐसे में कंपनी अब अपने व्यवसाय मॉडल में बदलाव कर सकती है।

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हाई कोर्ट का निर्णय क्या बताता है?

दिल्ली हाई कोर्ट का यह निर्णय यह दर्शाता है कि देश में ई-ट्रांसपोर्ट और शहरी मोबिलिटी (Urban Mobility) सेवाओं के लिए स्पष्ट और प्रभावशाली नीतिगत ढांचे की आवश्यकता है। मौजूदा कानून नई टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप आधारित बिजनेस मॉडल्स को कवर करने में नाकाम साबित हो रहे हैं। आने वाले समय में यदि केंद्र या राज्य सरकारें इस दिशा में स्पष्ट नीति बनाती हैं, तो दोपहिया वाहन आधारित टैक्सी सेवाएं फिर से लौट सकती हैं।

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