नीट यूजी पेपर लीक मामले और कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP के बैनर तले जंतरमंतर पर चल रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान अगर किसी राजनेता ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है, तो वो हैं मैनपुरी से सपा सांसद डिंपल यादव. संसद भवन से लेकर जंतरमंतर तक हुए मार्च में डिंपल यादव न सिर्फ सबसे आगे खड़ी नजर आईं, बल्कि दिल्ली पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बावजूद उनके तेवर ढीले नहीं पड़े, लेकिन सवाल यह है कि अचानक डिंपल यादव का यह ‘साइलेंट से फ्रंटफुट लीडर’ वाला अवतार कैसे सामने आया?

जंतरमंतर पर डिंपल ‘जुझारू और संवेदनशील’
जंतरमंतर पर जब पुलिस और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच तीखी झड़प हुई और लाठीचार्ज हुआ, तब डिंपल यादव एक अलग ही रूप में दिखीं. लाठीचार्ज में घायल और बेहोश हुए छात्रों की देखभाल के लिए वह एक मां और अभिभावक की तरह आगे आईं. उन्होंने खुद छात्रों को पानी पिलाया और उनके तुरंत इलाज की व्यवस्था करवाई. इतना ही नहीं, उन्होंने केंद्र की बीजेपी सरकार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए सीधा हमला बोला.
डिंपल यादव ने तीखा सवाल पूछते हुए कहा, ‘क्या यही बीजेपी का राम राज्य है, जहां अपने हक के लिए आवाज उठाने वाले छात्रों पर लाठियां बरसाई जाती हैं और लड़कियों के कपड़े फाड़े जाते हैं?’. उनके इस बयान और उनके जुझारू तेवरों ने उन्हें एक पारंपरिक संकोची नेता की छवि से निकालकर पूरी तरह से एक आजाद और मुखर महिला राजनेता के रूप में स्थापित कर दिया है.
पीछे की पंक्ति से ‘राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र’ तक का सफर
अगर आप डिंपल यादव के शुरुआती राजनीतिक करियर को देखें, तो उन्हें हमेशा एक शांत, सौम्य और बैकबेंच पर रहने वाली नेता माना जाता रहा. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। संसद सत्र के दौरान भी वह अक्सर सपा प्रमुख अखिलेश यादव के पीछे बैठती थीं, लेकिन नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद मैनपुरी उपचुनाव में मिली ऐतिहासिक जीत ने डिंपल यादव की राजनीति का टर्निंग प्वाइंट तय कर दिया.
मैनपुरी की विरासत संभालने के बाद से डिंपल ने धीरेधीरे अपनी अलग पहचान बनानी शुरू की. उन्होंने महंगाई, महिला सुरक्षा, पहलवानों के आंदोलन और अब NEET पेपर लीक जैसे मुद्दों पर न सिर्फ संसद के अंदर बल्कि सड़कों पर उतरकर मोर्चा संभाला है. अब वह अखिलेश यादव के साए से बाहर निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर सपा का एक सशक्त आक्रामक चेहरा बनती दिख रही हैं.
महिला वोटर और नया लीडरशिप नैरेटिव
डिंपल यादव की इस सक्रियता का दूसरा सबसे बड़ा पहलू है, उत्तर प्रदेश और देश की महिला वोटरों से सीधा जुड़ाव. भारतीय राजनीति में महिला मतदाताओं की भूमिका निर्णायक हो चुकी है. डिंपल यादव जिस तरह से संवेदनशीलता और आक्रामकता का संतुलन बनाकर मुद्दे उठा रही हैं, उससे वो महिला सुरक्षा, शिक्षा और युवाओं के रोजगार जैसे विषयों पर सीधे आधी आबादी से कनेक्ट हो रही हैं. सपा की महिला विंग को रीशेप करने और एक पढ़ेलिखे, समझदार और जुझारू चेहरे के रूप में डिंपल का यह रूप समाजवादी पार्टी को महिलाओं के बीच एक नया और मजबूत विकल्प दे रहा है.



