कश्मीर के मुख्य इस्लामिक धर्मगुरु मीरवाइज मौलवी उमर फारूक ने भारतपाक विवाद के समाधान के लिए सैन्य शक्ति के बजाय व्यापक बातचीत, कूटनीति और राजनीतिक इच्छाशक्ति पर जोर दिया है।

कश्मीर के मुख्य इस्लामिक धर्मगुरु मीरवाइज मौलवी उमर फारूक ने भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चले आ रहे विवाद को खत्म करने के लिए व्यापक बातचीत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया के भविष्य के लिए संवाद, कूटनीति और राजनीतिक इच्छाशक्ति जरूरी है, न कि सैन्य शक्ति।

उन्होंने प्राानमंत्री नरेन्द्र मोदी का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले नेताओं में से एक प्रधानमंत्री दोनों मुल्कों के बीच संवाद की भावना को फिर से जीवित कर सकते हैं।

श्रीनगर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद में शुक्रवार की जुमे की नमाज के बाद दिए गए अपने संबोधन में मीरवाइज ने हालिया वैश्विक घटनाक्रमों, विशेषकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का उल्लेख करते हुए कहा कि युद्ध चाहे परिस्थितियों को अस्थायी रूप से बदल दें, लेकिन स्थायी समाधान कभी भी उनसे प्राप्त नहीं होता है।

विवादों का समाधान केवल शक्ति से संभव नहीं

सैन्य शक्ति की भी सीमाएं होती हैं और लंबे संघर्षों के बाद अंततः विरोधी पक्षों को बातचीत की मेज पर लौटना पड़ता है। यह किसी पक्ष की कमजोरी नहीं, बल्कि इस सच्चाई की स्वीकारोक्ति है कि विवादों का समाधान केवल शक्ति से संभव नहीं है। उन्होंने अपने पिता मीरवाइज मौलवी फारूक की 1990 में हुई हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें विरासत में न केवल नेतृत्व, बल्कि शांति और संवाद की परंपरा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी मिली है।

उनके पिता हमेशा भारतपाक संवाद और शांतिपूर्ण समाधान के प्रबल समर्थक रहे। उन्होंने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और नेता एलके आडवाणी के साथ हुई चर्चाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि बातचीत ने हमेशा अविश्वास को कम करने और एकदूसरे के दृष्टिकोण को समझने में मदद की है। उन्होंने अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव पर कहा कि यह घटनाएं स्पष्ट करती हैं कि सैन्य टकराव स्थायी समाधान नहीं दे सकते।