
जयपुर के कारोबारी चंद्रमण जालान ने मेहमानों के लिए खाने-पीने का सामान खरीदा था. इसमें 5 रुपये का Lay’s चिप्स पैकेट भी था. जब उन्होंने पैकेट खोला, तो उनके मुताबिक उसमें 15 ग्राम की जगह सिर्फ 4 ग्राम चिप्स निकले. चंद्रमण ने इसकी शिकायत सामान बेचने वाली Metro Cash & Carry से की, लेकिन बात नहीं बनी. इसके बाद उन्होंने चिप्स बनाने वाली PepsiCo के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई.
मामले की सुनवाई के बाद जयपुर के जिला उपभोक्ता आयोग ने PepsiCo को जिम्मेदार ठहराया, जबकि विक्रेता कंपनी के खिलाफ शिकायत खारिज कर दी. आयोग ने PepsiCo को पैकेट की कीमत 5 रुपये ब्याज सहित लौटाने के साथ ग्राहक को मानसिक परेशानी के लिए 5,000 रुपये और केस के खर्च के लिए 3,000 रुपये देने का आदेश दिया. यानी 5 रुपये के चिप्स पैकेट के मामले में कंपनी को 8 हजार रुपये मुआवजा और कानूनी खर्च के तौर पर चुकाने होंगे.
क्या है पूरा मामला?
जयपुर में हार्डवेयर का कारोबार करने वाले चंद्रमण जालान के साथ यह घटना हुई. 10 नवंबर 2020 को वह घर आए मेहमानों के लिए खाने-पीने की चीजें लेने Metro Cash & Carry पहुंचे थे. वहां से खरीदे गए सामान में PepsiCo की Lay’s चिप्स का एक छोटा पैकेट भी था. बाद में जब उन्होंने मेहमानों के सामने चिप्स परोसने के लिए उसे खोला, तो पैकेट का वजन देखकर उन्हें शक हुआ. उन्होंने अंदर रखे चिप्स को तौलकर देखा, तो उनके मुताबिक, वजन महज 4 ग्राम निकला. जबकि पैकेट पर 15 ग्राम चिप्स होने की जानकारी दी गई थी. यानी शिकायतकर्ता का आरोप था कि पैकेट में बताई गई मात्रा से 11 ग्राम कम चिप्स मौजूद थे.
क्या आरोप लगाए?
जब चंद्रमण जालान को पैकेट में चिप्स की मात्रा कम मिली, तो उन्होंने पहले सामान बेचने वाली Metro Cash & Carry के सामने अपनी बात रखी. लेकिन उनका कहना था कि इस शिकायत पर उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला. इसके बाद उन्होंने चिप्स बनाने वाली PepsiCo और विक्रेता कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में मामला दर्ज कराया. 6 अप्रैल 2022 को दाखिल इस शिकायत में उन्होंने ग्राहक के अधिकारों का उल्लंघन और अनुचित व्यापार किए जाने का आरोप लगाया.
कंपनी ने क्या किया?
आयोग के सामने अपना पक्ष रखते हुए Metro Cash & Carry ने कहा कि पैकेट में चिप्स कम होने की वजह फैक्ट्री में पैकिंग के दौरान हुई गलती हो सकती है. कंपनी के मुताबिक, इस कमी की जिम्मेदारी सामान बनाने वाली कंपनी की बनती है. दूसरी ओर, PepsiCo को मामले की जानकारी देने के लिए नोटिस भेजा गया था, लेकिन उसकी तरफ से कोई प्रतिनिधि सुनवाई में शामिल नहीं हुआ. इसके बाद आयोग ने कंपनी की गैरमौजूदगी में ही मौजूद सबूतों के आधार पर मामले की सुनवाई पूरी की.
आयोग ने क्या फैसला सुनाया?
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद जयपुर के जिला उपभोक्ता आयोग ने अपना फैसला सुना दिया. आयोग ने सामान बेचने वाली Metro Cash & Carry को इस मामले में राहत देते हुए उसके खिलाफ की गई शिकायत बंद कर दी, लेकिन चिप्स बनाने वाली PepsiCo को जवाबदेह माना. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। कंपनी को ग्राहक के 5 रुपये वापस करने होंगे. इस अमाउंट पर 6 अप्रैल 2022 से पैसा लौटाए जाने तक हर साल 6 फीसदी ब्याज भी देना होगा. इसके साथ ही, ग्राहक को हुई मानसिक परेशानी के लिए 5 हजार रुपये और केस से जुड़े खर्चों की भरपाई के लिए 3 हजार रुपये अलग से देने का ऑर्डर दिया गया है.
कितने महीने में करना होगा भुगतान
आयोग ने PepsiCo को एक महीने के अंदर 8 हजार रुपये चुकाने का समय दिया है. इस रकम में ग्राहक को हुई परेशानी के बदले 5 हजार रुपये और केस लड़ने में खर्च हुए 3 हजार रुपये शामिल हैं. अगर कंपनी तय समय तक पैसे नहीं देती है, तो उसे 8 हजार रुपये पर आदेश जारी होने की तारीख से भुगतान होने तक हर साल 6 फीसदी की दर से एक्स्ट्रा ब्याज भी देना पड़ेगा. इसके अलावा, चिप्स के पैकेट के लिए चुकाए गए 5 रुपये भी ब्याज के साथ वापस करने होंगे.



