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मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड के 590 दिन बाद कोर्ट ने 14 अक्टूबर 2026 को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को सजा-ए-मौत की सजा सुनाई है. इस मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था. सौरभ की हत्या, शव के टुकड़े करना और उसे सीमेंट से भरे नीले ड्रम में छिपाने की वारदात जितनी भयावह थी, उतने ही चौंकाने वाले खुलासे जांच के दौरान सामने आए थे. पुलिस को साहिल के कमरे में डरावनी तस्वीरें और अजीबोगरीब निशान मिले थे. जांच में यह पहलू भी सामने आया कि मुस्कान ने कथित तौर पर फर्जी स्नैपचैट आईडी बनाकर साहिल को उसकी मृत मां की आत्मा से बातचीत करने का विश्वास दिलाया था.

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बात करें सौरभ की शादी की 2016 में मुस्कान की दोनों की शादी हुई थी और फिर 2019 में बेटी पीहू हुई थी इसके बाद साल 2025 में ये हत्याकांड सामने आया है जिसमें बेटी पीहू ने खुलासा करते हुए बताया था कि पापा ड्रम में है जिसके बाद कई हैरान कर देने वाले खुलासे सामने आए हैं. मामले में कर्ण पिशाचनी की सिद्धि हासिल करने की कथित कोशिश, तंत्र-मंत्र में दिलचस्पी और हत्या के बाद सौरभ के कटे सिर व हाथों को साहिल के कमरे में ले जाने की बातें भी सामने आई थीं. हालांकि, इन सभी घटनाओं को किसी वास्तविक अलौकिक शक्ति या तांत्रिक सिद्धि का प्रमाण नहीं माना जा सकता. आइए जानते हैं कि पुलिस जांच और मीडिया रिपोर्टों में इस मामले को लेकर क्या-क्या खुलासे हुए थे?

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सौरभ की हत्या के बाद कटे सिर और हाथों को लेकर क्या खुलासा हुआ?

पुलिस जांच के मुताबिक, 3 मार्च 2025 में मुस्कान और साहिल ने मिलकर सौरभ की हत्या की साजिश को अंजाम दिया. हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए और उन्हें छिपाने की कोशिश की गई. पुलिस के सामने आए जानकारी में सौरभ के सिर और हाथों को अलग किए जाने की बात भी शामिल थी. जांच से जुड़े मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, साहिल सौरभ का कटा सिर और हाथ अपने कमरे में ले गया था. रिपोर्टों में यह भी बताया गया कि दोनों ने शव के अलग-अलग हिस्सों को कुछ समय तक अलग-अलग जगहों पर रखा. सौरभ का धड़ मुस्कान के घर में छिपाया गया था, जबकि सिर और हाथों को साहिल के कमरे में ले जाने की बात सामने आई.

इस घटना ने जांचकर्ताओं के सामने कई सवाल खड़े किए. हत्या के बाद शव को छिपाने के लिए ऐसा तरीका क्यों अपनाया गया? शरीर के अंगों को अलग-अलग जगह ले जाने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या इसके पीछे केवल सबूत मिटाने की कोशिश थी या कथित तांत्रिक गतिविधियों का भी कोई संबंध था? इन सवालों को लेकर उस समय पुलिस जांच कर रही थी.

क्या सौरभ की हत्या में तंत्र-मंत्र और काले जादू का एंगल था?

सौरभ हत्याकांड की जांच के दौरान तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास का एंगल चर्चा में आया. पुलिस को साहिल के कमरे की दीवारों पर कई तरह के असामान्य चित्र, निशान और रहस्यमयी वाक्य लिखे मिले थे. कमरे में भगवान शिव से जुड़ी तस्वीरों के साथ डरावने चित्र और लाल-काले रंग के प्रतीक भी दिखाई दिए थे. इन चीजों ने पुलिस को साहिल की रुचियों और उसकी मानसिकता से जुड़े सवालों की जांच करने के लिए प्रेरित किया. मीडिया रिपोर्टों में कमरे की सजावट को कथित तांत्रिक गतिविधियों से जोड़कर भी देखा गया. हालांकि, केवल दीवारों पर बने चित्रों या प्रतीकों से यह साबित नहीं होता कि किसी व्यक्ति ने काला जादू किया था या हत्या किसी तांत्रिक अनुष्ठान का हिस्सा थी. पुलिस की जांच में इन परिस्थितियों की अहमियत थी, लेकिन किसी अलौकिक शक्ति या सिद्धि की पुष्टि अलग विषय है.

कर्ण पिशाचनी की सिद्धि हासिल करना चाहते थे मुस्कान और साहिल?

इस मामले में सबसे ज्यादा चर्चा कर्ण पिशाचनी की कथित सिद्धि को लेकर हुई थी. जांच के दौरान सामने आए विवरणों के मुताबिक, मुस्कान और साहिल की तंत्र-मंत्र में दिलचस्पी थी और दोनों इस विषय पर बातचीत करते थे. मुस्कान की मां कविता रस्तोगी ने भी बताया था कि उनकी बेटी ने उनसे कर्ण पिशाचनी के बारे में जानकारी पूछी थी. उनके मुताबिक, परिवार को इस तरह की गतिविधियों से खतरे की आशंका थी और उन्होंने मुस्कान को इससे दूर रहने की सलाह दी थी. मीडिया रिपोर्टों में यह दावा भी किया गया कि दोनों कथित तौर पर ऐसी सिद्धि प्राप्त करना चाहते थे, जिसके जरिए मृत व्यक्तियों से बात किया जा सके. इसी संदर्भ में सौरभ के सिर और हाथों को साहिल के कमरे में ले जाने की घटना को तंत्र-मंत्र के एंगल से जोड़कर देखा गया.

इसके बाद कर्ण पिशाचनी की सिद्धि हासिल करने की कथित मंशा और सौरभ की हत्या के बीच कोई तांत्रिक संबंध अदालत में किस हद तक प्रमाणित हुआ, इसे लेकर उपलब्ध रिपोर्टों से कोई स्वतंत्र निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. इसलिए इस एंगल को जांच के दौरान सामने आए दावे के रूप में ही प्रस्तुत करना उचित है.

मृत मां की आत्मा से बात करने के लिए फर्जी Snapchat ID का इस्तेमाल

इस हत्याकांड का एक और चौंकाने वाला पहलू मुस्कान और साहिल की कथित स्नैपचैट बातचीत थी. इंडिया टुडे की 21 मार्च 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने बताया था कि मुस्कान ने अपने भाई के नाम का इस्तेमाल करके तीन फर्जी स्नैपचैट आईडी बनाई थीं. कथित तौर पर इन खातों के जरिए वह साहिल को मैसेज भेजती थी और उसे विश्वास दिलाती थी कि उसकी मृत मां उससे संपर्क कर रही है. इसके बाद 25 मार्च 2025 की रिपोर्ट में भी फर्जी स्नैपचैट संदेशों का मामला भी सामने आया.

रिपोर्ट के अनुसार, मुस्कान कथित तौर पर मृत मां के रूप में मैसेज भेजती थी और सौरभ की मौत को नियति से जोड़ने वाली बातें कहती थी. जिसके बाद जांच को एक नया मोड़ दिया. सवाल यह था कि क्या साहिल वास्तव में अपनी मृत मां से संवाद होने का विश्वास करने लगा था और क्या मुस्कान ने इसी विश्वास का इस्तेमाल उसे प्रभावित करने के लिए किया था? पुलिस के अनुसार, फर्जी आईडी और संदेशों की जांच इस मामले की साजिश को समझने के लिए महत्वपूर्ण थी. इस पूरे घटनाक्रम को किसी आत्मा के वास्तविक संपर्क का प्रमाण नहीं, बल्कि कथित रूप से बनाए गए डिजिटल संदेशों और विश्वास के इस्तेमाल के रूप में समझना चाहिए.

साहिल के कमरे की दीवारों पर क्या-क्या मिला था?

पुलिस जब साहिल के कमरे तक पहुंची तो वहां की दीवारों पर बने चित्रों और लिखावटों की चर्चा होने लगी. मीडिया रिपोर्टों में कमरे की कुछ खास चीजों का उल्लेख किया गया था. दीवारों पर लाल और काले रंग के रहस्यमयी निशान और प्रतीक. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। ड्रैगन और डरावने चेहरों जैसी आकृतियां. भगवान शिव और आदियोगी से संबंधित तस्वीरें दीवारों पर अजीबोगरीब अंग्रेजी वाक्य और संदेश. हाथों, पेड़ और पिंजरे जैसी आकृतियों के चित्र. कमरे में बीयर के खाली डिब्बे और अन्य बिखरा हुआ सामान.

साहिल ज्यादातर समय अपने कमरे में रहता था और आसपास के लोगों से कम बातचीत करता था. उसके कमरे की बनावट और दीवारों पर बने चित्रों को लेकर पड़ोसियों तथा पुलिस की दिलचस्पी बढ़ी थी. हालांकि, किसी व्यक्ति के कमरे की सजावट या चित्रों को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि वह किसी अपराध में तंत्र-मंत्र का इस्तेमाल कर रहा था. हत्या के मामले में इन चीजों का महत्व तभी निर्धारित किया जा सकता है, जब वे अन्य साक्ष्यों के साथ जुड़ती हों.

क्या हत्या से पहले ही सौरभ को मारने की योजना बन गई थी?

जांच के दौरान यह बात सामने आई थी कि सौरभ की हत्या अचानक लिया गया फैसला नहीं थी. पुलिस अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, मुस्कान और साहिल कई महीनों से हत्या की योजना बना रहे थे. इंडिया टुडे की 21 मार्च 2025 की रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से बताया गया था कि आरोपियों ने पहले भी अपनी योजना को अंजाम देने की कोशिश की थी, लेकिन वे सफल नहीं हुए. बाद में मार्च 2025 में सौरभ की हत्या कर दी गई. जांच में चाकू, नशीली दवा और शव को छिपाने के लिए इस्तेमाल की गई चीजों की खरीद और तैयारी से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल हुई. पुलिस ने दोनों के मोबाइल फोन और डिजिटल बातचीत से साजिश की कड़ियां जोड़ने की कोशिश की. इससे यह सवाल भी उठा कि हत्या का मुख्य मकसद क्या था? क्या दोनों अपने रिश्ते के रास्ते से सौरभ को हटाना चाहते थे या कथित अंधविश्वास ने भी इस साजिश में भूमिका निभाई? अपराध के पीछे की मंशा समझने के लिए पुलिस ने परिस्थितिजन्य और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की.

क्या सौरभ का सिर लेकर साहिल 24 घंटे तक अपने कमरे में रहा?

इस मामले की सबसे भयावह बातों में से एक कटे सिर और हाथों को साहिल के कमरे में रखे जाने से जुड़ी थी. उस समय प्रकाशित कुछ मीडिया रिपोर्टों में पुलिस पूछताछ के हवाले से बताया गया था कि साहिल सौरभ के सिर और हाथों को अपने कमरे में ले गया था. कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया कि शव के ये हिस्से वहां कई घंटों तक रखे गए थे और साहिल उसी कमरे में मौजूद रहा. इसी घटनाक्रम को तंत्र-मंत्र की कथित गतिविधियों से जोड़कर देखा गया. हालांकि, सिर और हाथों को कमरे में रखने के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था, इसे किसी अपुष्ट तांत्रिक व्याख्या से तय नहीं किया जा सकता. इस मामले में सबसे जरूरी तथ्य यही है कि सौरभ की हत्या के बाद शव को छिपाने और सबूत मिटाने की कोशिश की गई थी. इन घटनाओं के पीछे की मंशा को लेकर पुलिस की जांच और अदालत में पेश साक्ष्य महत्वपूर्ण हैं.

क्या सौरभ के शव को छिपाने के लिए नीले ड्रम में सीमेंट भरा गया था?

सौरभ की हत्या के बाद शव को छिपाने के लिए नीले ड्रम का इस्तेमाल किया गया. पुलिस ने ड्रम बरामद किया था, जिसमें शव के हिस्सों को सीमेंट और अन्य सामग्री के बीच छिपाया गया था. यही वजह थी कि यह मामला पूरे देश में ‘नीला ड्रम हत्याकांड’ के नाम से चर्चा में आया. शव को इस तरह छिपाने की कोशिश ने जांच को और गंभीर बना दिया था. पुलिस ने शव की बरामदगी के बाद फोरेंसिक जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर हत्या की कड़ियां जोड़नी शुरू कीं. इसके बाद मुस्कान और साहिल को गिरफ्तार किया गया और उनके खिलाफ मुकदमा चला. अदालत ने 30 सितंबर 2026 को दोनों को दोषी ठहराया था. 14 अक्टूबर 2026 को दोनों को मौत की सजा सुनाई गई. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मुकदमे में 126 सुनवाइयां हुईं और अभियोजन पक्ष ने 22 गवाह पेश किए.

क्या हत्या के बाद मुस्कान और साहिल हिमाचल प्रदेश घूमने चले गए थे?

इस मामले में एक और महत्वपूर्ण पहलू हत्या के बाद आरोपियों के हिमाचल प्रदेश जाने का था. पुलिस के मुताबिक, सौरभ की हत्या और शव को छिपाने के बाद मुस्कान और साहिल हिमाचल प्रदेश चले गए थे. उनकी यात्रा को अपराध के बाद की गतिविधियों और मामले को छिपाने की कोशिश के संदर्भ में जांचा गया. पुलिस ने उनकी यात्रा, ठहरने की जगहों और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों से जुड़ी जानकारियों की पड़ताल की थी. बाद में दोनों को हिमाचल प्रदेश से गिरफ्तार किया गया. इस पहलू ने जांचकर्ताओं को यह समझने में मदद की कि हत्या के बाद आरोपियों ने क्या कदम उठाए और क्या उन्होंने सबूत मिटाने या पुलिस से बचने की कोशिश की थी.

क्या हत्या की रात बिल्ली के चीखने की बात सामने आई थी?

सौरभ हत्याकांड की कुछ चर्चित कहानियों में साहिल की पालतू बिल्ली का भी जिक्र किया गया. सोशल मीडिया और कुछ विवरणों में दावा किया गया कि वारदात के आसपास बिल्ली जोर-जोर से आवाजें कर रही थी और पड़ोसियों का ध्यान उसकी आवाज की ओर गया था. हालांकि, बिल्ली के चीखने, किसी खास घटना के समय उसकी प्रतिक्रिया और उससे हत्या की जानकारी मिलने के बीच संबंध को स्थापित करने वाला स्पष्ट, स्वतंत्र रूप से सत्यापित विवरण उपलब्ध रिपोर्टों से तय नहीं होता. इसलिए इस बात को पुख्ता पुलिस खुलासे की तरह लिखने के बजाय, यदि इसका इस्तेमाल किया जाए तो स्पष्ट करना चाहिए कि यह कुछ विवरणों में सामने आया दावा है. बिल्ली की आवाज को किसी तांत्रिक गतिविधि, आत्मा या अलौकिक घटना का प्रमाण मानने का भी कोई आधार नहीं है.