Ayodhya News: अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस वर्ष राम मंदिर में आयोजित होने वाले सावन उत्सव और झूलनोत्सव को भव्य, दिव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं. सावन शुक्ल पंचमी, 17 अगस्त को रामलला को गर्भगृह में विशेष रूप से तैयार किए गए स्वर्ण झूले पर विराजमान कराया जाएगा. इस दौरान श्रद्धालु लगभग 20 फीट की दूरी से रामलला के दिव्य झूला दर्शन कर सकेंगे.

धर्म समिति को सौंपी गई आयोजन की जिम्मेदारी
ट्रस्ट ने पूरे आयोजन की रूपरेखा तैयार करने की जिम्मेदारी धर्म समिति को सौंपी है. समिति झूला दर्शन, भजन, कजरी, सावन गीत, धार्मिक अनुष्ठानों और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का विस्तृत कार्यक्रम तैयार कर रही है. जल्द ही धर्म समिति की औपचारिक बैठक बुलाकर अंतिम कार्ययोजना को मंजूरी दिए जाने की संभावना है. वहीं ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी भी तैयारियों की लगातार समीक्षा कर रहे हैं.
श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में स्थायी रात्रिकालीन प्रकाश व्यवस्था का शुभारंभ हो चुका है।
स्वर्णिम प्रभा से आलोकित मंदिर का उत्तुंग शिखर और दूरदूर तक विस्तृत भव्य परिसर मानो दिव्यता का साकार रूप धारण कर श्रद्धालुओं को अलौकिक अनुभूति से अभिभूत कर देता है। रात्रि की नीरवता में pic.twitter.com/xdXvzYEhS1
— Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra July 31, 2026
इसी क्रम में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने वर्चुअल बैठक के माध्यम से ट्रस्टियों और संतों के साथ चर्चा करते हुए इस वर्ष के झूलनोत्सव को ऐतिहासिक स्वरूप देने का आह्वान किया. अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्णमोहन भी आयोजन से जुड़े संतों और पदाधिकारियों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए हैं. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास को भी तैयारियों के संबंध में आवश्यक दिशानिर्देश भेजे गए हैं.
17 अगस्त को रामलला स्वर्ण झूले पर विराजेंगे
रामनगरी में पारंपरिक सावन मेले और झूलनोत्सव की शुरुआत 15 अगस्त से मणि पर्वत पर होगी. राम मंदिर में पंचमी तिथि से झूलनोत्सव मनाने की परंपरा के अनुसार, 17 अगस्त को रामलला स्वर्ण झूले पर विराजेंगे. इस बार केवल मुख्य मंदिर ही नहीं, बल्कि मंदिर परिसर के पूरक मंदिरों में भी विशेष धार्मिक आयोजन किए जाएंगे.
इसके अलावा, श्रीराम मंदिर के उत्सव विग्रह को मणि पर्वत की पारंपरिक यात्रा में शामिल किए जाने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है. यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो इस वर्ष का झूलनोत्सव श्रद्धालुओं के लिए और भी अधिक आकर्षण का केंद्र बन सकता है.



