भारतीय वायु सेना की अधिकारी शक्ति शर्मा ने एयर वाइस मार्शल का पदभार ग्रहण कर लिया है. इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला अधिकारी हैं. वह साल 1994 में भारतीय वायु सेना का हिस्सा बनीं. भारतीय रक्षा बलों में गैरचिकित्सकीय शाखा से एयर वाइस मार्शल या समकक्ष रैंक हासिल करने वाली पहली महिला अधिकारी बनी हैं. आइए, इसी बहाने समझते हैं कि भारतीय वायुसेना में कैसे बनते हैं एयर वाइस मार्शल? क्या होता है इनका काम?

भारतीय वायुसेना देश की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है. यह देश की हवाई सीमाओं की रक्षा करती है. इसके अलावा वायुसेना आपदा के समय राहत और बचाव कार्यों में भी योगदान देती है. वायुसेना में कई पद और रैंक होते हैं. इनमें एयर वाइस मार्शल एक बहुत वरिष्ठ रैंक है. यह टू स्टार रैंक होती है. इस पद पर पहुंचने वाला अधिकारी रणनीतिक फैसलों और बड़े संगठनों का नेतृत्व करता है.

एयर वाइस मार्शल रैंक का क्या है मतलब?

एयर वाइस मार्शल भारतीय वायुसेना की वरिष्ठ अधिकारी रैंक है. यह एयर कमोडोर से ऊपर और एयर मार्शल से नीचे होती है. इसे सामान्य रूप से टू स्टार रैंक कहा जाता है. इस रैंक पर अधिकारी केवल एक यूनिट का संचालन नहीं करता. उसके पास बड़े कमांड, मुख्यालय या किसी महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी हो सकती है. एयर वाइस मार्शल को नीतियां बनाने, संचालन की निगरानी करने और अधिकारियों को दिशा देने का काम करना पड़ता है. इस पद पर निर्णय लेने की क्षमता बहुत महत्वपूर्ण होती है.

एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा.

एयर वाइस मार्शल बनने की क्या है प्रक्रिया?

वायुसेना में एयर वाइस मार्शल बनने के लिए अधिकारी को लंबा और बेहतरीन सैन्य करियर बनाना होता है. इसकी शुरुआत अधिकारी के रूप में कमीशन मिलने से होती है. अधिकारी बनने के लिए उम्मीदवारों को अलग अलग प्रवेश परीक्षाओं और चयन प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है. इनमें राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा, एयरफोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट और अन्य निर्धारित रास्ते शामिल हो सकते हैं.

चयन के बाद उम्मीदवार को प्रशिक्षण दिया जाता है. प्रशिक्षण के दौरान उसकी शारीरिक क्षमता, मानसिक मजबूती, नेतृत्व कौशल और सैन्य ज्ञान का परीक्षण होता है. कमीशन मिलने के बाद अधिकारी अलग अलग पदों पर काम करता है. वह फील्ड स्टेशन, प्रशिक्षण केंद्र, कमान मुख्यालय और वायुसेना मुख्यालय में सेवाएं दे सकता है. यहां प्रमोशन केवल सेवा के वर्षों के आधार पर नहीं होता. इसके लिए अधिकारी का रिकॉर्ड, नेतृत्व क्षमता, पेशेवर दक्षता, अनुशासन और जिम्मेदारियों को निभाने का अनुभव देखा जाता है.

वरिष्ठ रैंक पर पदोन्नति के लिए चयन प्रक्रिया निर्धारित सैन्य नियमों के अनुसार होती है. अधिकारी के पूरे करियर का मूल्यांकन किया जाता है. इसके बाद योग्य अधिकारियों में से पदोन्नति के लिए चयन किया जाता है.

क्या है एयर वाइस मार्शल की प्रमुख जिम्मेदारियां?

एयर वाइस मार्शल का काम उसकी नियुक्ति पर निर्भर करता है. कोई अधिकारी ऑपरेशनल कमांड संभाल सकता है. कोई प्रशिक्षण से जुड़ी जिम्मेदारी निभा सकता है. कोई प्रशासन, शिक्षा, योजना या मानव संसाधन से जुड़े विभाग का नेतृत्व कर सकता है. इस पद की कुछ प्रमुख जिम्मेदारियां इस प्रकार हैं.

  • रणनीतिक योजना बनाना: एयर वाइस मार्शल को वायुसेना की रणनीतिक योजनाओं में योगदान देना होता है. वह सुरक्षा चुनौतियों का अध्ययन करता है. इसके आधार पर भविष्य की तैयारियों के लिए सुझाव देता है.
  • बड़े विभागों का नेतृत्व: इस रैंक के अधिकारी के अधीन कई अधिकारी और कर्मचारी काम कर सकते हैं. उन्हें विभाग का प्रभावी संचालन सुनिश्चित करना होता है.
  • प्रशिक्षण की निगरानी: वायुसेना की ताकत उसके प्रशिक्षित अधिकारियों और जवानों पर निर्भर करती है. एयर वाइस मार्शल प्रशिक्षण की गुणवत्ता की निगरानी कर सकता है. वह नए प्रशिक्षण कार्यक्रमों और शिक्षा से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ा सकता है.
  • प्रशासनिक निर्णय: वरिष्ठ अधिकारी प्रशासनिक फैसलों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इनमें मानव संसाधन, संस्थागत विकास, संसाधनों का उपयोग और विभागों के बीच तालमेल शामिल हो सकता है.
  • सरकार और सेना के बीच समन्वय: एयर वाइस मार्शल को कई बार रक्षा मंत्रालय और अन्य सैन्य संस्थानों के साथ समन्वय करना पड़ता है. उसका काम नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करना भी होता है.

शक्ति शर्मा की उपलब्धि क्यों है ऐतिहासिक?

एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा को 18 जून 1994 को भारतीय वायुसेना की शिक्षा शाखा में कमीशन मिला था. तीन दशक से अधिक लंबे करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं. उन्होंने प्रशिक्षण केंद्रों, फील्ड स्टेशनों, कमान मुख्यालय और वायुसेना मुख्यालय में काम किया. शिक्षा शाखा में उनका अनुभव प्रशिक्षण, शैक्षणिक विकास और संस्थागत कार्यों से जुड़ा रहा. उनके करियर की एक खास उपलब्धि आईआईटी कानपुर और पुणे विश्वविद्यालय में वायुसेना की चेयर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना से जुड़ी है.

इन पहलों का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाना था. शक्ति शर्मा ने सैनिक स्कूल कपूरथला की प्रिंसिपल के रूप में भी काम किया. वह तीनों सेनाओं में सैनिक स्कूल का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी बनी थीं.

शक्ति शर्मा की उपलब्धि महिलाओं के लिए है बड़ा संदेश

शक्ति शर्मा की पदोन्नति केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। यह भारतीय रक्षा सेवाओं में महिलाओं की बदलती भूमिका को भी दिखाती है. लंबे समय तक सेना में महिलाओं की भूमिकाएं कुछ सीमित क्षेत्रों तक मानी जाती थीं. अब महिला अधिकारी शिक्षा, प्रशिक्षण, प्रशासन, तकनीक और नेतृत्व के क्षेत्र में बड़ी जिम्मेदारियां संभाल रही हैं. गैरचिकित्सकीय शाखा से टू स्टार रैंक तक पहुंचना इस बदलाव का महत्वपूर्ण उदाहरण है. इससे उन युवतियों को प्रेरणा मिल सकती है, जो रक्षा सेवाओं में करियर बनाना चाहती हैं.

वायुसेना में महिलाओं के लिए बढ़ते अवसर

भारतीय वायुसेना में महिलाओं को अधिकारी के रूप में कई क्षेत्रों में सेवा का अवसर मिलता है. वे शिक्षा, प्रशासन, तकनीकी, लॉजिस्टिक्स और अन्य शाखाओं में काम कर सकती हैं. महिला अधिकारियों को भी प्रशिक्षण, अनुशासन और प्रदर्शन के समान मानकों से गुजरना पड़ता है. पदोन्नति में उनकी योग्यता और सेवा रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होता है. शक्ति शर्मा की उपलब्धि यह संदेश देती है कि मेहनत और क्षमता के आधार पर महिलाएं वायुसेना में ऊंचे पद हासिल कर सकती हैं.

एयर वाइस मार्शल वायुसेना की एक वरिष्ठ और जिम्मेदार रैंक है. इस पद तक पहुंचने के लिए लंबे सैन्य अनुभव, बेहतर सेवा रिकॉर्ड और नेतृत्व क्षमता की जरूरत होती है. एयर वाइस मार्शल को रणनीतिक योजना, प्रशिक्षण, प्रशासन और बड़े संगठनों के संचालन की जिम्मेदारी निभानी पड़ सकती है.शक्ति शर्मा की यात्रा यह बताती है कि अवसर मिलने पर महिलाएं हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं. यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को गौरव के साथ आकाश छूने की प्रेरणा देती है.

भारतीय सेना के तीनों हिस्सों में टॉप पर पहुंची महिलाएं

  • मेजर जनरल गर्ट्रूड एलिस रैम 27 अगस्त 1976 को मेजर जनरल बनीं. वे भारतीय सशस्त्र बलों में टूस्टार रैंक पाने वाली पहली महिला थीं.
  • लेफ्टिनेंट जनरल पुनीता अरोड़ा भारतीय सशस्त्र बलों में थ्रीस्टार रैंक तक पहुंचने वाली पहली महिला थीं. वे नौसेना में वाइस एडमिरल रैंक धारण करने वाली पहली महिला भी रहीं.
  • एयर मार्शल पद्मा बंद्योपाध्याय भारतीय वायुसेना की पहली महिला एयर मार्शल थीं.
  • सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल सर्विसेज की डायरेक्टर जनरल बनीं. इस पद तक पहुंचने वाली पहली महिला रहीं.
  • एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा गैरचिकित्सीय शाखा से टूस्टार रैंक प्राप्त करने वाली पहली महिला अधिकारी हैं.