सरकार ने एल्युमिनियम बेवरेज कैन के लिए अनिवार्य क्वालिटी सर्टिफिकेशन की डेडलाइन को छह महीने बढ़ाकर अप्रैल 2027 कर दिया है. इससे मेकर्स को सप्लाई की कमी के बीच अपना प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए और समय मिल जाएगा. सप्लाई की इस कमी का असर डाइट कोक और कुछ बीयर ब्रांड्स पर भी पड़ रहा है. पहले इसकी समयसीमा 31 अक्टूबर थी. कैन बनाने वाली एक प्रमुख कंपनी ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि पिछले हफ्ते अलगअलग तरह के मेकर्स के लिए नई डेडलाइंस जारी की गई हैं. बड़ी कंपनियों को 1 अप्रैल 2027 से, छोटी कंपनियों को 1 जुलाई 2027 से और माइक्रो कंपनियों को 1 अक्टूबर 2027 से इन नियमों का पालन करना होगा.

दो सालों में केन की हिस्सेदारी दोगुनी
भारत में, एल्युमिनियम कैन में बिकने वाली बीयर और सॉफ्ट ड्रिंक्स की सेल्स, इन पेय पदार्थों की कुल सालाना सेल्स के एकचौथाई से भी ज्यादा है. कंज्यूमर्स की पसंद बदलने के कारण पिछले दो सालों में इनकी हिस्सेदारी दोगुनी हो गई है. हालांकि, बेवरेज कैन के घरेलू सप्लायर्स बढ़ती मांग के हिसाब से सप्लाई नहीं कर पा रहे हैं. वहीं, मिडिल ईस्ट में चल रहे वॉर ने विस्तार की योजनाओं को बाधित कर दिया है और ग्लोबल सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है. ‘ब्रूअर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ के डायरेक्टर जनरल विनोद गिरी ने बताया कि मेकर्स को उम्मीद थी कि वे देश में 600 मिलियन अतिरिक्त कैन बना पाएंगे, लेकिन वे इसका आधा ही बना सके.
समयसीमा बढ़ने से इंडस्ट्री को गर्मियों के मौसम से पहले पैकेजिंग सप्लाई का इंतजाम करने के लिए और समय मिल जाएगा, क्योंकि गर्मियों में बीयर और सॉफ्ट ड्रिंक्स की मांग काफी बढ़ जाती है. गिरी ने कहा कि वॉर की वजह से दुनिया भर में खाली कैन की उपलब्धता को लेकर काफी अनिश्चितता पैदा हो गई है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि ‘ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स’ से सर्टिफाइड विदेशी निर्माता भी भारत में तेजी से बढ़ती मांग को पूरा नहीं कर पा रहे हैं.
अनिवार्य BIS सर्टिफिकेशन
प्रोडक्ट की सेफ्टी, ताजगी और रीसाइकिल होने की क्षमता को बेहतर बनाने के लिए, पिछले साल अप्रैल में एक क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर के जरिए एल्युमिनियम कैन को अनिवार्य BIS सर्टिफिकेशन के दायरे में लाया गया था. इन नियमों के तहत, घरेलू और विदेशी निर्माताओं को कुछ तकनीकी मानकों को पूरा करना होता है. इनमें सामग्री, आकार, सीलिंग, दबाव सहने की क्षमता, लीकेज और सुरक्षात्मक कोटिंग जैसे मानक शामिल हैं. सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया काफी लंबी हो सकती है. कुछ मामलों में तो विदेशी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का निरीक्षण भी करना पड़ता है, जिससे नए सप्लायर्स को मंजूरी मिलने में और ज्यादा समय लग जाता है.
मिली है बड़ी राहत
गिरी ने कहा कि यह समय बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे बीयर कंपनियों को 2027 के गर्मियों के मौसम के लिए योजना बनाने और इन्वेंट्री तैयार करने में मदद मिलेगी. पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियों ने संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका और दक्षिणपूर्व एशिया से आयात करना शुरू कर दिया है, जहां कैन उपलब्ध हैं. लेकिन, आयातित कैन घरेलू कैन की तुलना में 2530% महंगे पड़ते हैं. प्रोडक्टशन लाइनें बढ़ाने में लगने वाले समय के कारण यह कमी और भी गंभीर हो गई है. प्रमुख सप्लायर्स की मौजूदा घरेलू क्षमता पूरी तरह इस्तेमाल हो चुकी है, और नई उत्पादन लाइनों को चालू होने में एक साल तक का समय लग सकता है. चूंकि कैन की मांग बढ़ रही है और घरेलू आपूर्तिकर्ता अपनी क्षमता बढ़ाने में संघर्ष कर रहे हैं, इसलिए यह उद्योग नियामकीय राहत की मांग कर रहा है.



