भारत की एक व्हिस्की ने पूरी दुनिया में अपनी अलग पहचान बना ली है. हरियाणा के छोटे से शहर इंद्री में बनने वाली इन्द्री सिंगल माल्ट व्हिस्की को साल 2023 में दुनिया की सबसे बेहतरीन सिंगल माल्ट व्हिस्की का खिताब मिला था. इस व्हिस्की ने स्कॉटलैंड, जापान और अमेरिका की कई मशहूर व्हिस्की ब्रांड्स को पीछे छोड़ दिया था.

इस शानदार उपलब्धि के पीछे पिकाडिली एग्रो इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड का नाम है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह कंपनी शुरुआत से व्हिस्की बनाने वाली कंपनी नहीं थी. इसकी शुरुआत 1994 में हरियाणा के करनाल में एक शुगर मिल के रूप में हुई थी. बाद में कंपनी ने शराब बनाने के कारोबार में कदम रखा. 2017 में ब्रांडेड स्पिरिट्स बिजनेस शुरू किया गया और 2022 में इन्द्री सिंगल माल्ट व्हिस्की को बाजार में उतारा गया.
एक व्हिस्की ने बदल दी कंपनी की किस्मत
इन्द्री व्हिस्की की सफलता का असर कंपनी के शेयरों पर भी साफ दिखाई दिया. पिछले सालों में कंपनी का शेयर जबरदस्त तेजी से बढ़ा. कभी 15 रुपये के आसपास मिलने वाला शेयर अब करीब 730 रुपये तक पहुंच गया. यानी निवेशकों को कई गुना रिटर्न मिला. इस तेजी की सबसे बड़ी वजह कंपनी का व्हिस्की कारोबार रहा.
अब कंपनी ने लिया बड़ा फैसला
पिकाडिली एग्रो ने एक बड़ा फैसला लिया. कंपनी ने तय किया है कि वह अपने शुगर कारोबार को अलग कंपनी में बांट देगी. यानी अब शुगर बिजनेस और व्हिस्की बिजनेस अलगअलग कंपनियों के रूप में काम करेंगे. इस प्रक्रिया को डीमर्जर कहा जाता है. इसका मतलब है कि एक कंपनी अपने अलगअलग कारोबार को स्वतंत्र कंपनियों में बांट देती है ताकि दोनों बिजनेस अपने दम पर आगे बढ़ सकें.
डीमर्जर से क्यों हो सकता है फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि जब एक ही कंपनी में दो बिल्कुल अलग तरह के बिजनेस होते हैं, तो शेयर बाजार अक्सर उनकी सही कीमत नहीं लगा पाता. पिकाडिली के मामले में एक तरफ तेजी से बढ़ता प्रीमियम व्हिस्की बिजनेस है, जबकि दूसरी तरफ शुगर का उतारचढ़ाव वाला कारोबार है. दोनों का बिजनेस मॉडल, मुनाफा और विकास की रफ्तार अलगअलग है. ऐसे में कई निवेशक सिर्फ व्हिस्की बिजनेस में निवेश करना चाहते हैं, जबकि कुछ निवेशक शुगर सेक्टर में रुचि रखते हैं. दोनों कारोबार एक ही कंपनी में होने के कारण कंपनी की वास्तविक वैल्यू पूरी तरह सामने नहीं आ पाती.
अलग होने के बाद क्या होगा?
डीमर्जर के बाद दोनों कंपनियां अलगअलग शेयर बाजार में लिस्टेड होंगी. दोनों का अपना अलग मैनेजमेंट, निवेश योजना और कारोबार होगा. इससे निवेशकों को अपनी पसंद के बिजनेस में निवेश करने का मौका मिलेगा. साथ ही विश्लेषक भी दोनों कंपनियों का अलगअलग मूल्यांकन कर सकेंगे. इससे दोनों कंपनियों की वास्तविक कीमत सामने आने की संभावना बढ़ जाती है.



