शेयर बाजार में निवेश करने वालों के लिए पिछले कुछ दिन थोड़े उलझन भरे रहे हैं. इसकी वजह है बाजार बंद होने के समय लागू किया गया एक नया नियम, जिसे क्लोजिंग ऑक्शन सेशन कहा जा रहा है. इस नए बदलाव के बाद से ही बाजार के कई हिस्सेदारों ने अपनी चिंताएं जाहिर की थीं. अब खुद बाजार नियामक सेबी के अधिकारियों ने सामने आकर इन चिंताओं पर स्थिति साफ कर दी है. सेबी चीफ पांडे का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है, नियामक हर फीडबैक पर बारीकी से नजर रख रहा है और जरूरत पड़ने पर इसमें सुधार भी किए जाएंगे.

बाजार में नया नियम क्यों लाया गया?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि यह पूरा मामला क्या है और इसका आम निवेशकों पर क्या असर पड़ रहा है. पिछले हफ्ते ही शेयर बाजार में 20 मिनट का एक नया क्लोजिंग सेशन शुरू किया गया है. पहले दिनभर के कारोबार के आखिरी 30 मिनट में हुए ट्रेड की औसत कीमत के आधार पर किसी भी शेयर का क्लोजिंग प्राइस तय होता था. लेकिन अब इस नए नियम के तहत, एक्सचेंज 20 मिनट के एक अलग सेशन में खरीद और बिक्री के ऑर्डर जमा करते हैं. इसका मकसद एक ऐसा भाव तय करना है जिस पर सबसे ज्यादा वॉल्यूम में सौदे हो सकें. सेबी का मानना है कि यह तरीका बड़े ऑर्डर्स को पूरा करने के लिए ज्यादा पारदर्शी है और इससे सही कीमत तय करने में मदद मिलती है.
ट्रेडर्स की चिंता पर सेबी का सीधा जवाब
नया सिस्टम लागू होने के बाद से ही कुछ बाजार भागीदारों ने शिकायत की है कि इससे बाजार में हिस्सेदारी कम हो रही है और कुछ लोगों को नुकसान भी उठाना पड़ रहा है. इन शिकायतों पर सेबी चीफ पांडे ने साफ किया है कि सेबी इन सभी पहलुओं की जांच कर रहा है. उन्होंने जोर देकर कहा कि बाजार में बिना वजह के कोई मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए. ट्रेडर्स के लिए इंडिकेटिव प्राइस बहुत अहम है. उन्होंने यह भी माना कि पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज के मोर्चे पर कुछ दिक्कतें हैं, जिनकी पहचान करके उन्हें दूर करने की कोशिश की जा रही है. पांडे के मुताबिक, यह नया सिस्टम बाजार में हमेशा के लिए बना रहेगा, लेकिन इसे और बेहतर बनाने के लिए जो भी कमियां हैं, उन्हें सुलझाया जाएगा.
बड़े ब्रोकर्स ने शुरू कर दिया है ये काम
सेबी इस मामले में सिर्फ औपचारिक शिकायतों का ही इंतजार नहीं कर रहा है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। पांडे ने बताया कि वे अलगअलग स्टेकहोल्डर्स से बात कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं का भी संज्ञान ले रहे हैं. उन्होंने भरोसा दिलाया कि 3 अगस्त को जो शुरुआती विसंगतियां या उतारचढ़ाव देखे गए थे, वे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में अब काफी हद तक कम हो गए हैं. सेबी का मानना है कि इस नई व्यवस्था में असल चुनौती पारदर्शिता की नहीं है, बल्कि लोगों को इसे समझने में थोड़ा वक्त लग रहा है. बाजार के पुराने ट्रेडिंग सिस्टम और एल्गोरिदम को इस नए तरीके के हिसाब से ढलने में समय लगेगा. अच्छी बात यह है कि कई बड़े ब्रोकर्स ने अपनी वेबसाइट और ऐप्स पर संभावित कीमत दिखाना शुरू कर दिया है, जिससे आने वाले समय में ट्रेडर्स को फैसले लेने में काफी आसानी होगी.



