
Hardoi : 1961 का वह साल, जब हरदोई के टोलवा आट गांव में गोलियों की तड़तड़ाहट गूंजी थी। उस भयावह रात ने न केवल पूरे क्षेत्र को दहला दिया बल्कि एक मासूम लड़की की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल कर रख दिया। 15 साल की लड़की मिठनी, जिसकी शादी अगले महीने होनी थी, को डकैतों ने बंदूक की नोक पर उठाकर ले गए थे। छह दशक गुजर गए, पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन उस बच्ची का दर्द आज भी दिल को छू जाता है, जब 80 साल की उम्र में वह अपने गांव वापस लौटी और पूरे इलाका फूट-फूट कर रो पड़ा।
खौफनाक रात: जब डकैत आए थे इज्जत लूटने
हरदोई मुख्यालय से 15 किलोमीटर दूर टोलवा आट गांव के बाहर एक छोटे से पुरवे में अचानक 100 से अधिक डकैतों का हमला हो गया। ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। उस रात डकैत सिर्फ़ धन-दौलत नहीं, बल्कि बलदेव के घर में मौजूद 15 साल की बेटी मिठनी को अगवा करने आए थे। विरोध करने पर पिता बलदेव और अपने छोटे भाई शिवलाल को मरणासन्न कर दिया गया। फिर मिठनी को बंदूक की नोक पर उठाकर ले गए।
जंगलों में कई दिनों तक भटकाया
डकैतों ने मिठनी को जंगलों में कई दिनों तक भटकाया। उसके बाद उसे किसी को सौंपने के लिए अलीगढ़ ले जाया गया। अलीगढ़ के दादों क्षेत्र के रहने वाले पहलवान सोहनलाल यादव को जब इस अमानवीय घटना का पता चला, तो उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर उसकी आजादी का जंग छेड़ दी। अंततः मिठनी को छुड़ा लिया गया। उस सदमे से वह पूरी तरह टूट चुकी थी। सोहनलाल ने उससे शादी की और उसे नया जीवन दिया। उनके आठ बच्चे हुए, लेकिन मिठनी का मन अपने मायके की यादों से कभी दूर नहीं हो पाया।
यादों के धुंधले पन्नों से हकीकत तक
मिठनी अपने पिता और भाई शिवलाल व सूबेदार के नाम याद रखती थी। उसे हरदोई के सकाहा शिव मंदिर और वह पुरवा भी याद था, जहां से उसे अगवा किया गया था। उसकी छोटी बेटी सीमा यादव, जो नोएडा में रहती है, अपनी मां की पीड़ा को समझती थी। उसने ठाना कि वह अपनी 80 वर्षीय मां को उनके अपने घरों से जरूर मिलवाएगी।
शुक्रवार को सीमा अपनी मां को लेकर बस से हरदोई पहुंचीं। जैसे ही उन्होंने सकाहा मंदिर को देखा, मिठनी की पुरानी यादें ताजा हो गईं। गांव पहुंचकर जब उन्होंने अपने चचेरे भाई शिवलाल के घर का दरवाजा खटखटाया, तो पता चला कि पिता और भाई अब इस दुनिया में नहीं हैं। जब मिठनी ने अपनी पहचान बताई, तो घर में कोहराम मच गया।



