
Azamgarh murder case: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अहिरौला थाना क्षेत्र स्थित शंभूपुर गांव में मंगलवार शाम घटी दिल दहला देने वाली घटना के पीछे अब अंधविश्वास और भूत-प्रेत का खौफनाक पहलू सामने आया है. जिस घर में कलह और शराब की लत छुड़ाने के लिए शांति पाठ चल रहा था, वहां अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट गूंज उठी और देखते ही देखते चार जिंदगियां हमेशा के लिए खामोश हो गईं. पुलिस पूछताछ में आरोपी अरविंद सिंह के परिजनों ने दावा किया कि अरविंद पर ‘भूत का प्रभाव’ था और वह बेतहाशा शराब पीता था. उसके असामान्य व्यवहार से परिजन डर चुके थे. अरविंद की पत्नी बबीता का मानना था कि उनके पति किसी अदृश्य साये के वश में हैं. इसी साये और लत से छुटकारा दिलाने के लिए बबीता ने घर पर तांत्रिक-धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किया था.
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थाना अहरौला क्षेत्रान्तर्गत ग्राम शम्भूपुर में एक व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी एवं 02 अन्य व्यक्तियों की गोली मारकर हत्या किए जाने की घटना पर पुलिस द्वारा तत्काल मौके पर पहुंचकर आरोपी अरविंद को बच्चों सहित कमरे से बाहर निकालने का प्रयास किया गया। पर्याप्त चेतावनी के बावजूद आरोपी… — AZAMGARH POLICE (@azamgarhpolice) September 23, 2026
मृत भाई की आत्मा को शांति देने की कोशिश
घटनास्थल से जान बचाकर भागे एक पुजारी ने पुलिस को जो बताया, वह बेहद चौंकाने वाला है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। पुजारी के मुताबिक, यह अनुष्ठान सिर्फ अरविंद के व्यवहार तक सीमित नहीं था, बल्कि परिवार को डर था कि दो साल पहले जान गंवाने वाले अरविंद के बड़े भाई की आत्मा भटक रही है और उसे शांति नहीं मिली है. इसी ‘मुक्ति’ के चक्कर में परिवार ने अनुष्ठान की राह चुनी.
घर में कदम रखते ही भड़क उठा आरोपी
मंगलवार शाम करीब 6 बजे जब अरविंद घर लौटा तो उसने देखा कि घर के अंदर पूजा चल रही है. वहां उसकी 70 वर्षीय मां समला देवी, पत्नी बबीता और तीन मासूम बच्चे मौजूद थे. अरविंद इस पूजा के सख्त खिलाफ था. घर में अनुष्ठान देखते ही उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया. उसने अंधाधुंध गोलियां चला दीं, जिसमें उसकी पत्नी बबीता, दो पुजारी और उसके तीन बच्चों में से एक मासूम की मौके पर ही मौत हो गई.
वारदात के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अरविंद सिंह को गोली मार दी. आजमगढ़ एसएसपी अनिल कुमार के मुताबिक, परिवार का मानना था कि अरविंद भूत-प्रेत के वश में था और समाधान के लिए पूजा रखी गई थी, जिसके अरविंद खिलाफ था. पुलिस अब इस पूरे मामले की गहनता से तफ्तीश कर रही है.
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घर में पूजा करा रहे पुजारियों से पहचान पत्र मांगा
घर में पूजा होते देख अरविंद सिंह जैसे ही अपने घर पहुंचा, उसने वहां चार पुजारियों को देखा. उसने कथित तौर पर पुजारियों से उनकी पहचान पत्र दिखाने को कहा. इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में तीखी बहस छिड़ गई. विवाद इतना बढ़ गया कि गुस्से में आगबबूला अरविंद अंदर गया और अपनी लाइसेंसी राइफल निकाल लाया. उसने सबसे पहले अपनी 40 वर्षीय पत्नी बबीता सिंह को गोली मारी और फिर दो पुजारियों पर भी अंधाधुंध फायरिंग कर दी. वारदात में पत्नी बबीता के अलावा पटखौली गांव के पुजारी महेंद्र पाठक और छिताउना भाटौली गांव के अखिलेश मिश्रा की मौके पर ही मौत हो गई.
बच्चों को बंधक बनाकर कमरे में छिपा, एक बेटे को गोली मारी
तीनों की हत्या करने के बाद नशे में धुत आरोपी ने अपने तीन मासूम बच्चों के साथ खुद को एक कमरे में बंद कर लिया. सूचना पर पहुंची पुलिस और रिश्तेदारों ने करीब 7 घंटे तक अरविंद से बात कर आत्मसमर्पण करने और बच्चों को छोड़ने की गुहार लगाई, लेकिन वह नहीं माना और सुबह बात करने की जिद पर अड़ा रहा. समझाने-बुझाने के दौरान ही कमरे के अंदर से अचानक एक और गोली चलने की आवाज आई. आरोपी ने अपने ही बेटे शौर्य सिंह को गोली मार दी थी. बाकी बच्चों की जान खतरे में देख पुलिस टीम तुरंत दरवाजा तोड़कर अंदर घुसी.



