
Success Story: कुछ सपने देर से पूरे होते हैं, लेकिन उनकी खुशी कम नहीं होती. उत्तर प्रदेश के बागपत निवासी 59 वर्षीय विजय कुमार शर्मा की कहानी इसी जिद और धैर्य की मिसाल है. करीब 27 साल तक सरकारी शिक्षक बनने की कोशिश करने वाले शर्मा को आखिरकार शामली के एक सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में संस्कृत TGT के पद पर नियुक्ति मिल गई. खास बात यह है कि उनकी 28 वर्षीय बेटी ममता ने भी इसी भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल की है, हालांकि फिलहाल उनका नाम वेटिंग लिस्ट में है.
बागपत के बड़वाड़ गांव के रहने वाले विजय कुमार शर्मा ने सरकारी शिक्षक बनने की पहली कोशिश वर्ष 1999 में की थी. इसके बाद उन्होंने लगातार अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं में हिस्सा लिया. उन्होंने छह बार TGT की लिखित परीक्षा और चार बार PGT परीक्षा पास की, लेकिन अंतिम चयन तक पहुंचने में उन्हें सफलता नहीं मिली. शर्मा ने करीब आठ बार इंटरव्यू भी दिए, लेकिन अंतिम चयन सूची में उनका नाम नहीं आ सका. इसके बावजूद उन्होंने सरकारी नौकरी का सपना छोड़ने के बजाय अपनी तैयारी जारी रखी.
प्राइवेट स्कूल में पढ़ाते हुए जारी रखी तैयारी
सरकारी नौकरी की तैयारी के साथ शर्मा ने लगभग 26 वर्षों तक बड़ौत के आसपास एक निजी स्कूल में शिक्षक के रूप में काम किया. नौकरी और परीक्षा की तैयारी को साथ लेकर चलना उनके लिए आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने प्रयास जारी रखा. उनके पिता लक्ष्मण सिंह भी सरकारी शिक्षक थे. पिता के पेशे ने ही विजय कुमार शर्मा को अध्यापन को करियर बनाने की प्रेरणा दी. अपनी तैयारी के दौरान उन्होंने अपनी मेंटर प्रोफेसर कमला अग्रवाल के मार्गदर्शन को भी महत्वपूर्ण बताया.
बेटी ने भी पास की वही भर्ती परीक्षा
इस सफलता को खास बनाने वाली एक और बात है. शर्मा की 28 वर्षीय बेटी ममता ने भी उसी भर्ती परीक्षा में सफलता हासिल की है. हालांकि अभी उनका नाम वेटिंग लिस्ट में है. ममता के मुताबिक, बचपन से उन्होंने अपने पिता को सरकारी शिक्षक बनने के लिए लगातार मेहनत करते देखा. उनके पिता का संघर्ष उनके लिए प्रेरणा बना और उन्होंने भी शिक्षक बनने का लक्ष्य अपनाया.
59 की उम्र में मिला नियुक्ति पत्र
विजय कुमार शर्मा को लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से नियुक्ति पत्र मिला. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। अब वह शामली के ऐलम इंटर कॉलेज में संस्कृत TGT के रूप में अपनी सेवाएं देंगे. यह स्कूल उनके घर से करीब 15 किलोमीटर दूर है और वह कक्षा 10 तक के विद्यार्थियों को संस्कृत पढ़ाएंगे. शर्मा का कहना है कि लंबे संघर्ष के दौरान कई बार उन्हें लगा कि सफलता शायद नहीं मिलेगी, लेकिन उन्होंने प्रयास बंद नहीं किया. हालिया भर्ती प्रक्रिया में इंटरव्यू नहीं होने को उन्होंने उम्मीदवारों के लिए समान अवसर देने वाला कदम माना.
रिटायरमेंट से पहले करीब दो साल का मौका
फरवरी 1967 में जन्मे शर्मा मौजूदा सेवा नियमों के तहत 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होंगे. यानी उन्हें सरकारी शिक्षक के रूप में करीब दो साल से अधिक समय तक विद्यार्थियों को पढ़ाने का अवसर मिलेगा. विजय कुमार शर्मा की कहानी बताती है कि उम्र बढ़ सकती है, लेकिन किसी लक्ष्य के लिए प्रयास करने की इच्छा जरूरी नहीं कि खत्म हो. 27 साल के इंतजार के बाद मिला यह नियुक्ति पत्र उनके लिए सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और धैर्य की पहचान है.



