
अगर आप ऑफिस के काम या फिर घूमने के लिए दूसरे देश जाते हैं, तो सबसे बड़ी परेशानी सिम को लेकर होती है. विदेश यात्रा के दौरान अक्सर यात्रियों को फोन के नेटवर्क और स्लो इंटरनेट जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है. लेकिन अब ट्रैवलिंग के शौकीनों और बिजनेस प्रोफेशनल्स के लिए एक बड़ी राहत मिलने वाली है. भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट टेलीकॉम कंपनी Jio और अमेरिका की प्रमुख टेलीकॉम कंपनी T-Mobile ने हाथ मिलाया है. दोनों कंपनियों ने मिलकर दुनिया की पहली 5G स्टैंडअलोन रोमिंग सर्विस शुरू कर दी है, जिससे अब विदेश जाने पर भी सुपर-फास्ट 5G नेटवर्क का एक्सपीरियंस बिना किसी रुकावट के मिल सकेगा.
जियो और अमेरिका की दोनों कंपनियों ने 5G Standalone यानी 5G स्टैंडअलोन सर्विस देने के लिए पार्टनरशिप की है. कंपनियों का दावा है कि यह दुनिया की पहली 5G SA रोमिंग सर्विस है. इसका सीधा सा मतलब यह है कि अब जब जियो या टी-मोबाइल के ग्राहक अपने देश से बाहर किसी दूसरे देश में जाएंगे, तो उन्हें वहां भी केवल असली 5G नेटवर्क का सिग्नल मिलेगा.
दुनिया में पहली बार 5G SA रोमिंग कनेक्शन
T-Mobile और Jio ने सोमवार को बताया कि दोनों नेटवर्क के बीच दुनिया का पहला 5G स्टैंडअलोन रोमिंग कनेक्शन सफलतापूर्वक स्थापित किया गया है. इस कनेक्शन को सिनिवर्से की इंटरऑपरेबिलिटी तकनीक की सहायता से तैयार किया गया है. सरल शब्दों में कहें तो अगर T-Mobile का कोई यूजर विदेश यात्रा करता है और Jio के नेटवर्क पर रोमिंग करता है, तो उसे 5G SA नेटवर्क का एक्सपीरियंस मिल सकेगा. इसी तरह जियो के कस्टमर भी T-Mobile के नेटवर्क पर रोमिंग के दौरान इस तरह की सुविधा का इस्तेमाल कर सकेंगे.
विदेश में भी बना रहेगा 5G का एक्सपीरियंस
इस पार्टनरशिप का सबसे बड़ा फायदा उन लोगों को मिलेगा जो अक्सर दूसरे देशों की यात्रा पर रहते हैं. आमतौर पर विदेश जाने पर मोबाइल नेटवर्क बदल जाता है और रोमिंग के दौरान नेटवर्क की तकनीक या स्पीड बहुत कम हो जाती है. 5G SA रोमिंग के जरिए कंपनियां इस एक्सपीरियंस को ज्यादा आसान और बेहतर बनाने की कोशिश कर रही हैं.
टी-मोबाइल के चीफ नेटवर्क ऑफिसर अंकुर कपूर ने कहा कि हमने साल 2020 में इस सफर की शुरुआत की थी और आज जियो के साथ मिलकर ग्लोबल स्टेज पर एक नया इतिहास रच दिया है. अब आप चाहे विदेश में रील्स शेयर करें, वीडियो देखें या फिर अपने ऑफिस के जरूरी काम निपटाएं, इंटरनेट बिना रुके काम करेगा.
क्या है 5G स्टैंडअलोन?
5G स्टैंडअलोन को आम तौर पर 5G SA कहा जाता है. यह ऐसा 5G नेटवर्क है जो अपने अलग कोर नेटवर्क पर काम करता है. इसके लिए 4G नेटवर्क के कोर इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होती. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। 5G SA का इस्तेमाल तेज डेटा स्पीड के साथ कम लेटेंसी और नई तरह की नेटवर्क सर्विस के लिए किया जा सकता है. इसका फायदा सिर्फ मोबाइल यूजर्स तक सीमित नहीं है, बल्कि एंटरप्राइज और दूसरी एडवांस सेवाओं में भी इसका इस्तेमाल हो सकता है.
AI से जुड़ी सर्विस की भी तैयारी
जियो के इंटरनेशनल सर्विस हेड मार्क यारकोस्की के मुताबिक यह सिर्फ इंटरनेट चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे आने वाले समय में AI आधारित सर्विसेज और बेहतर बिजनेस एक्सपीरियंस मिलने का रास्ता भी साफ होगा. कुल मिलाकर कहें तो अब विदेश यात्रा पर जाने वाले भारतीय यूजर्स के लिए कनेक्टिविटी पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज होने वाली है.



