भारत के कार बाजार में अगले 1824 महीनों में छोटी हाइब्रिड कारों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है. मारुति सुजुकी, हुंडई, टोयोटा और रेनॉ समेत कई कंपनियां किफायती हाइब्रिड मॉडल लॉन्च करने की तैयारी में हैं. इन कारों को खासतौर पर 4 मीटर से छोटी कारों के सेगमेंट में उतारा जा सकता है.

मारुति की छोटी कारों में मिलेगा हाइब्रिड सिस्टम
मारुति एक किफायती हाइब्रिड सिस्टम तैयार कर रही है, जिसे कंपनी अपनी छोटी कारों में इस्तेमाल कर सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Fronx, Baleno, Swift और Brezza जैसे मॉडल इस तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं. इनमें से पहला हाइब्रिड मॉडल अगले साल यानी 2027 में बाजार में आ सकता है.
हुंडई और टोयोटा भी उतरेंगी हाइब्रिड कारें
हुंडई भी भारत के लिए एक छोटी हाइब्रिड कार तैयार कर रही है. इसे 2027 के बीच में लॉन्च किए जाने की उम्मीद है. वहीं टोयोटा की भारतीय यूनिट Urban Cruiser Taisor का हाइब्रिड वर्जन लाने की तैयारी कर रही है. यह मॉडल Maruti Fronx के हाइब्रिड वर्जन के बाद बाजार में आ सकता है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। रेनॉ भी इस दौड़ में शामिल है. कंपनी 4 मीटर से छोटी एक नई अर्बन SUV पर काम कर रही है, जिसे ‘Bridger’ कॉन्सेप्ट से जोड़ा जा रहा है. इसमें हाइब्रिड पावरट्रेन मिलने की उम्मीद है और इसे अगले साल के अंत तक लॉन्च किया जा सकता है.
अभी महंगी हैं हाइब्रिड कारें
भारत में मारुति सुजुकि, होंडा, किआ और टोयोटा जैसी कंपनियां पहले से हाइब्रिड कारें बेच रही हैं, लेकिन इन मॉडलों की कीमत आमतौर पर 16 लाख रुपये से ऊपर है. इसके अलावा मौजूदा ज्यादातर हाइब्रिड मॉडल 4 मीटर से बड़े हैं, जिसके कारण उन पर ज्यादा टैक्स लगता है. छोटी हाइब्रिड कारों के आने से यह तस्वीर बदल सकती है. सितंबर 2025 में GST व्यवस्था में बदलाव के बाद छोटी हाइब्रिड कारों पर टैक्स घटकर 18 फीसदी हो गया है. इससे कंपनियों के लिए कम कीमत वाली हाइब्रिड कारें बनाना और ग्राहकों के लिए उन्हें खरीदना पहले के मुकाबले ज्यादा आसान हो गया है.
हाइब्रिड कारों का सबसे बड़ा फायदा
हाइब्रिड कारों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इनमें इलेक्ट्रिक मोटर और पेट्रोल इंजन दोनों का इस्तेमाल होता है. इससे ग्राहक को इलेक्ट्रिक कार की तरह चार्जिंग खत्म होने की चिंता नहीं रहती. साथ ही पेट्रोल कार के मुकाबले बेहतर माइलेज मिल सकता है. हाइब्रिड कारों को बढ़ावा मिलने की एक बड़ी वजह CAFE3 नियम भी हैं. ईंधन दक्षता से जुड़े इन नए नियमों का तीसरा चरण 1 अप्रैल 2027 से लागू होगा. इसके तहत ज्यादा ईंधनकुशल तकनीक अपनाने वाली कारों को कंपनियों के औसत फ्यूल एफिशिएंसी लक्ष्य पूरा करने में मदद मिलेगी.



