E20 फ्यूल को लेकर कोहराम मचा है. एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल से विमर्श और विवाद की ऐसी लपटें उठेंगी, इसका अंदाजा शायद सरकार को नहीं था. इस वक्त E20 देश में सबसे ट्रेंडिंग टॉपिक है, जिसमें लोगों का गुस्सा है. सरकार पर गंभीर आरोप है और सारे विवाद के बीच विपक्ष सियासी माइलेज बढ़ाने की कोशिश में लगा है. वहीं, सरकार ने माना है कि E20 फ्यूल से गाड़ी के माइलेज में गिरावट 3 से 5 प्रतिशत तक आ सकती है, लेकिन सड़क पर पुरानी गाड़ी चलाने वाले लोग 20 से 30 प्रतिशत गिरावट का दावा कर रहे हैं.

लोग सरकार से ये भी पूछ रहे हैं कि देश की करोड़ों पुरानी गाड़ियों पर का असर जानने के लिए क्या कोई स्वतंत्र और लंबी अवधि की जांच कराई गई और अगर ऐसा कुछ हुआ तो तो वो डेटा जनता से क्यों नहीं शेयर किया गया? एक प्रश्न ये भी है अगर E20 से गाड़ी का इंजन या फ्यूल सिस्टम खराब हुआ तो खर्च और जिम्मेदारी कौन उठाएगा? सरकार, तेल कंपनियां या फिर वही आम आदमी, जो शिकायत कर रहा है?

इन सवालों में लोगों की चिंताएं हैं. गाड़ी खराब होने का डर है. कई वीडियो हैं, जो सोशल मीडिया पर वायरल हैं हालांकि सरकार ऐसे वीडियो को सिर्फ प्रोपेगेंडा बता रही है, लेकिन इस दावे के बीच सरकार का एक ऐसा बयान आया है, जिससे E20 वाले विमर्श की आग और तेज हो गई है.

E20 से गाड़ी के माइलेज में कमी?

एक इंटरव्यू के दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने माना है कि E20 से गाड़ी के माइलेज में कमी आ सकती है. उन्होंने बताया कि एथेनॉल की कैलोरिफिक वैल्यू यानी ऊर्जा क्षमता पेट्रोल से कम है, इसीलिए E20 वाले पेट्रोल से माइलेज में थोड़ी कमी संभव है. वैसे उन्होंने साथ ही ये भी कहा कि माइलेज का फर्क गाड़ी चलाने के तरीके और जगह पर भी निर्भर करता है, लेकिन एक बात गडकरी ने फिर स्पष्ट कीE20 से गाड़ियों के इंजन में कोई खराबी नहीं आती और दावा किया कि एथेनॉल पर गलत नैरेटिव सेट करने की कोशिश हो रही है.

अब जब सरकार ने माइलेज की कमी वाली बात मानी है तो लोग पूछ रहे हैं एथेनॉल युक्त पेट्रोल की कीमत वो क्यों चुकाएं ? E20 पर उठ रहे हैं ये सवाल

  • लोगों को 100% पेट्रोल और E20 के बीच चुनने का विकल्प क्यों नहीं मिला?
  • क्या E20 फ्यूल का प्रयोग आम लोगों पर थोपा गया?
  • एथेनॉल मिलाने के बाद भी पेट्रोल की कीमत कम क्यों नहीं?
  • क्या E20 फ्यूल आने के बाद मिलावटखोरों की भी चांदी हो गई?
  • E20 से पुरानी गाड़ियों के पार्ट्स खराब होंगे तो खर्च कौन उठाएगा?
  • E20 से माइलेज गिरना, आम आदमी की जेब को नुकसान नहीं है?

सरकार माइलेज गिरावट सिर्फ़ 35% बता रही है, पर सड़क पर पुरानी गाड़ी वाले 20 से 30% माइलेज गिरने की शिकायत कर रहे हैं ये फर्क कहां से आ रहा है और किसका आंकड़ा सही है? वैसे लोगों की इन चिंताओं के बीच एक ऐसी खबर आई है जिसे सरकार के विरोधी उसका यूटर्न बता रहे हैं. सूत्रों के अनुसार सरकार एक ऐसे विकल्प पर विचार कर रही है, जिसकी मांग लोग भी कर रहे हैं

  • पेट्रोल पंप पर आपको अब फ्यूल का विकल्प मिल सकता है.
  • सरकार एक ऐसे फॉर्मूले पर विचार कर रही है, जिसके बाद लोग गाड़ी में अपनी मर्जी का पेट्रोल भरवा सकेंगे.
  • दावा है कि सरकार अब पेट्रोल पंप पर नॉर्मल पेट्रोल का विकल्प देने पर विचार कर रही है.
  • हालांकि किसी भी फैसले से पहले कीमत, मशीनों और जरूरी तैयारियों पर चर्चा होगी.

वैसे E20 फ्यूल लागू करने से पहले भी सामान्य पेट्रोल का विकल्प बनाए रखने पर चर्चा हुई थी, लेकिन तब तेल कंपनियां इसके लिए तैयार नहीं थीं, लेकिन लोगों के विरोध को देखते हुए.अब इस पर विचार हो सकता है. वैसे E20 वाले सवालों पर सरकार की ओर से कुछ जवाब आए हैं.

प्रश्न हैक्या E20 फ्यूल से गाड़ी के माइलेज में कमी आती है?

तो सरकार ने माना है कि माइलेज 3% से 5% तक घट सकता है, लेकिन उसका तर्क हैइसके बदले मिलने वाले फायदे नुकसान से ज्यादा है. E20 फ्यूल से इंजन का प्रदर्शन बेहतर होता है. पिकअप तेज होता है. साथ ही प्रदूषण कम होता है.

एक प्रश्न ये है क्या एथेनॉल फ्यूल जल्दबाजी और बिना तैयारी के लाया गया?

सरकार का जवाब है..नहीं.. ये सोची समझी और लंबी प्रक्रिया के बाद लागू हुआ. इस पर वर्षों तक वैज्ञानिक जांच और कई स्टेज के परीक्षण हुए कार और बाइक बनाने वाली कंपनियों से लंबा विमर्श किया गया और फिर पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का काम चरणबद्ध तरीके से किया गया.

प्रश्न है क्या E20 फ्यूल से गाड़ियों में खराबी आ रही है?

इस पर सरकार का उत्तर है.. नहीं.. E20 फ्यूल को लेकर सिर्फ अफवाह फैलाई जा रही है. सरकार का तर्क है कि मारुति सुजुकी और हीरो मोटोकॉर्प जैसी बड़ी कंपनियों ने करोड़ों गाड़ियों की सर्विस की है, लेकिन किसी ने भी E20 से गाड़ियों में जंग लगने या खराबी की शिकायत नहीं की.

फ्यूल विकल्प की मांग

कुछ लोग सरकार से मांग कर रहे हैं कि पेट्रोल पर E20 के साथ E10 और सामान्य फ्यूल भी मिले, लेकिन सरकार का तर्क है कि भारत में अभी 1 लाख से ज़्यादा पेट्रोल पंप मौजूद हैं. इसीलिए सामान्य पेट्रोल..E10 और E20 से अलग विकल्प देना मुश्किल है, क्योंकि 3 तरह के अलग फ्यूल के लिए अलग टैंक और पाइपलाइन बिछाना महंगा और चुनौतीपूर्ण है.

वैसे सरकार का तर्क ये भी है कि एथेनॉल वाले फ्यूल का मकसद पेट्रोल की कीमत कम करना नहीं, बल्कि विदेशी कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता कम करना है क्योंकि इससे देश की विदेशी मुद्रा बच रही है. इस पर फिक्र की फैक्ट शीट क्या कहती है?

  • सरकार के अनुसार वर्ष 2014 से अब तक 1 लाख 97 हज़ार करोड़ से ज्यादा की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है.
  • कार्बन उत्सर्जन में करीब 952 लाख टन की कमी आई है.
  • 2014 से अब तक किसानों को 1 लाख 66 हज़ार करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है.
  • जबकि 316 लाख टन कच्चा तेल कम आयात करना पड़ा है.

आखिर सरकार के सामने ऐसी स्थिति क्यों आई? E20 के साथ अब सामान्य पेट्रोल का विकल्प देने की चर्चा क्यों शुरू हुई है? वजह है एथेनॉल युक्त पेट्रोल E20 का विरोध.

  • E20 के ख़िलाफ कई वीडियो वायरल हो चुके हैं.
  • दावा है — E20 फ्यूल से गाड़ी के माइलेज में कमी दर्ज की गई है.
  • साथ ही इस फ्यूल की वजह से गाड़ी ख़राब होने के भी दावे हैं.
  • पुरानी गाड़ियों में E20 के इस्तेमाल पर लोगों में अब भी कंफ्यूजन है.
  • और लोगों की मांग है कि उन्हें पेट्रोल चुनने का ऑप्शन मिलना चाहिए.

वैसे अगर दोनों तरह के पेट्रोल उपलब्ध कराने का फैसला होता है, तो बड़ी चुनौती उनकी कीमत तय करने की होगी. साथ ही पेट्रोल पंप पर अलग फ्यूल के लिए अतिरिक्त डिस्पेंसर की जरूरत पड़ेगी, लेकिन लोगों का तर्क है कि सरकार कुछ भी करे. पेट्रोल पंप पर सामान्य पेट्रोल का विकल्प होना चाहिए.

क्यों हो रही है इस पर चर्चा?

पिछले कुछ समय से E20 पेट्रोल को लेकर कई तरह की बातें सामने आई हैं. कुछ वाहन चालकों का कहना है कि इससे माइलेज में हल्की कमी महसूस होती है. वहीं, कुछ लोगों ने अपनी पुरानी गाड़ियों में इसके इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए हैं. इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार अब सभी पक्षों से राय लेने की तैयारी कर रही है.

ब्यूरो रिपोर्ट, टीवी9 भारतवर्ष