पिछले साल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स की दरों में कटौती से देश में त्योहारों के मौसम में कार खरीदने वालों की संख्या में जबरदस्त उछाल आया था, जिससे पैसेंजर गाड़ियों की बिक्री लगभग 5 लाख तक पहुंच गई थी. इस साल, कार बनाने वाली कंपनियों को उस हाई लेवल तक पहुंचना थोड़ा मुश्किल हो सकता है. इसका कारण भी है. इस बार उन्हें कीमत में कटौती का वह फायदा नहीं मिलेगा जिसने पिछली बार सेल्स बढ़ाने में मदद की थी. नई गाड़ियां लॉन्च करना, ज्यादा डिस्काउंट देना और डीलर के पास ज्यादा स्टॉक रखना ये सब कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन गाड़ियों की ज्यादा कीमतें खरीदारों को गाड़ी खरीदने के फैसले के बजाय हिसाबकिताब करने पर मजबूर कर सकती हैं. कुछ लोग सस्ते मॉडल चुन सकते हैं, तो कुछ पुरानी कारें ले सकते हैं या फिर गाड़ी खरीदने का प्लान टाल सकते हैं.

सेल्स में आ सकती है कमी

किफ़ायती होने की चुनौती पहले से ही SUV मार्केट में दिख रही है, जहां कस्टमर्स को लुभाने के लिए कंपनियां त्योहारों के दौरान ज्यादा डिस्काउंट दे रही हैं. लेकिन ये ऑफर शायद खरीदारों की चिंताओं को दूर करने के लिए काफी न हों, खासकर जब वे डाउनपेमेंट, EMI और गाड़ी रखने के खर्च के बारे में सोच रहे हों. डीलरों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या शोरूम में पूछताछ करने वाले लोग असल में गाड़ी खरीदेंगे. ऑटोमोबाइल डीलर विकेश गुलाटी ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि नवरात्रि से पहले कीमतों में बढ़ोतरी से उत्साह कम हो सकता है. इससे ग्राहक पीछे हट सकते हैं और खरीदारी में देरी हो सकती है.

उन्होंने आगे कहा कि सबसे बड़ी चुनौती डिमांड और सप्लाई में तालमेल न होना है. रिटेल सेल के लिए आक्रामकता तो है, लेकिन उसे हर हाल में बेचने की बेताबी नहीं है. त्योहारों के मौसम से पहले डीलरों के पास गाड़ियों का स्टॉक ज्यादा है. ज्यादा स्टॉक होने से वे अचानक बढ़ने वाली डिमांड को तो पूरा कर सकते हैं, लेकिन बिना सेल गाड़ियों में उनका वर्किंग कैपिटल फंसा रहता है. अगर रिटेल सेल उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई, तो डिस्काउंट देने का दबाव बढ़ सकता है. फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट साईं गिरिधर के अनुसार, इस साल डीलर बेहतर तैयारी के साथ हैं.

खरीदारों के लिए किफायती होना जरूरी

इस तैयारी को सेल्स में बदलना ग्राहकों की डिमांड पर निर्भर करेगा, खासकर इसलिए क्योंकि ज्यादा कीमतों की वजह से कुछ खरीदार खरीदारी टाल सकते हैं. कंपनियां बुकिंग की जानकारी दे रही हैं और प्रोडक्शन व डीलर नेटवर्क को मजबूत कर रही हैं. लेकिन अभी भी यह साफ नहीं है कि कितने संभावित खरीदार असल में गाड़ी खरीदेंगे और कितने लोग ज्यादा मोलभाव करेंगे, सस्ते मॉडल चुनेंगे या फिर अपग्रेड करने का प्लान टाल देंगे.

एक बड़ी कार बनाने वाली कंपनी के एग्जीक्यूटिव ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि बाजार में सुस्ती और अनिश्चितता के शुरुआती संकेत दिख रहे हैं. उन्होंने कच्चे माल की बढ़ती कॉस्ट के कारण डिमांड और मुनाफ़े को लेकर चिंता जताई. खरीददारों के लिए बजट या कीमत एक अहम बात बनती जा रही है. जो लोग पहली बार गाड़ी खरीद रहे हैं, उन्हें शुरुआती पेमेंट और EMI के साथसाथ घर के दूसरे खर्चों का भी ध्यान रखना होगा.

Jato Dynamics के प्रेसिडेंट रवि भाटिया ने ईटी की रिपोर्ट में कहा कि मौजूदा गाड़ी मालिक अपनी पुरानी गाड़ी की कीमत का इस्तेमाल नई गाड़ी खरीदने के लिए कर सकते हैं, जबकि दूसरे लोग कम कीमत वाले मॉडल या पुरानी गाड़ियों के बाज़ार पर विचार कर सकते हैं. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। भाटिया ने कहा कि पिछले साल GST के बाद त्योहारों के दौरान लगभग 5 लाख गाड़ियों की बिक्री हुई थी. इस साल कंपनियां ज्यादा प्रोडक्ट और बेहतर ऑफर ला रही हैं, लेकिन खरीदार का हिसाबकिताब अलग है.