Kota News: राजस्थान के कोटा स्थित मेडिकल कॉलेज के नए अस्पताल में एक बार फिर चिकित्सीय लापरवाही के गंभीर आरोपों के बीच प्रसूता की मौत का मामला सामने आया है. सीजेरियन डिलीवरी के बाद चार बच्चों की मां रेशमा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि जनरल वार्ड में ड्रिप और इंजेक्शन चढ़ाने के तुरंत बाद महिला का शरीर नीलापीला पड़ने लगा था. परिजनों द्वारा बारबार गुहार लगाने के बावजूद अस्पताल स्टाफ टालमटोल करता रहा, जिससे समय पर सही इलाज न मिलने के कारण महिला की जान चली गई.

अस्पताल पहुंचने से लेकर ऑपरेशन तक सब कुछ सामान्य बताया जा रहा था. मृतका की पहचान छावनी के चार मिनार एरिया निवासी रेशमा के रूप में हुई है. परिजनों के अनुसार 13 तारीख की रात 8 बजे रेशमा को नए अस्पताल में भर्ती कराया गया था. 14 तारीख की सुबह 9 से 10 बजे के बीच डॉक्टरों ने उसका सीजेरियन ऑपरेशन किया. डिलीवरी के बाद जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह ठीक थे, जिसके बाद दोपहर करीब 12 बजे उसे गायनिक ओटी से जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया था.

‘ड्रिप में इंजेक्शन देते ही बिगड़ी हालत, नीला पड़ने लगा शरीर’

मृतका के परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर गलत दवा या इंजेक्शन देने का संगीन आरोप लगाया है. परिजनों के मुताबिक जनरल वार्ड में शिफ्ट करने के बाद स्टाफ ने रेशमा को ड्रिप चढ़ाई और उसमें एक इंजेक्शन मिलाया. दवा शरीर में जाते ही रेशमा की हालत तेजी से बिगड़ने लगी और उसका पूरा शरीर नीलापीला पड़ने लगा. मृतका की ननद के शोर मचाने पर आननफानन में स्टाफ पहुंचा और पहले सामान्य बात कहकर टालने की कोशिश की, लेकिन हालत गंभीर होने पर उसे आईसीयू ले जाया गया.

आधी रात में डायलिसिस की मांग और प्राइवेट अस्पताल रेफर करने का दबाव

परिजनों का आरोप है कि आईसीयू में भी डॉक्टरों का रवैया टालमटोल वाला रहा. आईसीयू में भर्ती रहने के दौरान आधी रात को अचानक रेशमा का यूरिन आना बंद हो गया. रात करीब 12 बजे स्टाफ ने अचानक कहा कि मरीज की हालत बहुत गंभीर है और तुरंत डायलिसिस तथा कई यूनिट ब्लड का इंतजाम करना पड़ेगा. व्यवस्था न होने की बात कहकर परिजनों से मरीज को बाहर किसी निजी अस्पताल ले जाने को कहा गया. 15 तारीख की सुबह 3 बजे परिजन उसे निजी अस्पताल ले गए, लेकिन शुक्रवार को वहां के डॉक्टरों ने जवाब दे दिया. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। इसके बाद परिजन उसे दोबारा मेडिकल कॉलेज के एसएसबी ब्लॉक लेकर पहुंचे, जहां रात में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई.

परिजनों का हंगामा, अस्पताल प्रशासन ने बीमारी को बताया वजह

महिला की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में हंगामा कर डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग की. मौत के बाद जब परिजनों ने वजह पूछी तो ड्यूटी डॉक्टर साफ जवाब देने से कतराते नजर आए. मृतका के भांजे फिरोज और अन्य परिजनों ने गंभीर सवाल उठाए कि क्या दवा देने से पहले रिएक्शन टेस्ट किया गया था. वहीं, अस्पताल प्रशासन की ओर से तर्क दिया गया कि रेशमा 36 सप्ताह 3 दिन की गर्भावस्था में पेट दर्द की शिकायत लेकर आई थी. उसे पेट में एमनियोटिक द्रव की अधिकता की समस्या थी और उसकी पहले भी तीन बार सीजेरियन डिलीवरी हो चुकी थी.