IDBI Bank Q2 Results: सोमवार, 19 अक्टूबर को जब शेयर बाजार खुलेगा, तो दलाल स्ट्रीट के निवेशकों का ध्यान खास तौर पर IDBI बैंक के शेयरों पर रहेगा. इसके पीछे दो बड़ी वजहें हैं. पहली वजह वित्त वर्ष 2027 की सितंबर तिमाही के नतीजे हैं, तो दूसरी वजह हाल ही में मंजूर हुई अरबों डॉलर की अधिग्रहण डील है. शुक्रवार को बैंक का शेयर 0.80 फीसदी यानी 67 पैसे की बढ़त के साथ 84.12 रुपये पर बंद हुआ था. हालांकि, इस साल अब तक ये शेयर 18.98 फीसदी टूट चुका है. ऐसे में तिमाही नतीजों के बाद बाजार इस स्टॉक पर कैसी प्रतिक्रिया देता है, ये देखना काफी अहम होगा.

ब्याज से कमाई बढ़ने के बाद भी क्यों घटा मुनाफा?

अगर सिर्फ ऊपरी आंकड़ों को देखें, तो LIC के नियंत्रण वाले इस बैंक के मुनाफे में बड़ी गिरावट दिखती है. सितंबर 2026 को खत्म हुई दूसरी तिमाही में IDBI बैंक का स्टैंडअलोन नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 39 फीसदी घटकर 2,205 करोड़ रुपये रह गया. पिछले साल की इसी तिमाही में बैंक ने 3,627 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था.

लेकिन इस गिरावट के पीछे बैंक के कामकाज की कमजोरी नहीं, बल्कि पिछले साल हुई एकमुश्त कमाई का असर है. दरअसल, पिछले साल दूसरी तिमाही में बैंक ने नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड के आईपीओ में अपनी 11.11 फीसदी हिस्सेदारी बेची थी. 799.87 रुपये प्रति शेयर के भाव पर 2.22 करोड़ से ज्यादा शेयर बेचने से बैंक को 1,698.96 करोड़ रुपये का एकमुश्त फायदा हुआ था. इस बार ऐसी कोई अतिरिक्त कमाई नहीं हुई, साथ ही बैंक की गैरब्याज आय 46 फीसदी घटकर 2,489 करोड़ से 1,353 करोड़ रुपये पर आ गई. इसी वजह से बैंक का ऑपरेटिंग प्रॉफिट भी 3,523 करोड़ रुपये से घटकर 2,893 करोड़ रुपये रह गया.

मुख्य कारोबार में तेजी के साथ सुधरी एसेट क्वालिटी

मुनाफे के आंकड़े से अलग अगर बैंक के मुख्य कारोबार पर नजर डालें, तो वहां मजबूत ग्रोथ दर्ज की गई है. सितंबर तिमाही में बैंक की कुल आय 9,594 करोड़ रुपये से बढ़कर 9,865 करोड़ रुपये पर पहुंच गई. ब्याज से होने वाली कमाई 7,104 करोड़ से बढ़कर 8,512 करोड़ रुपये हो गई है. सबसे खास बात ये है कि बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम में 29 फीसदी का उछाल आया है. ये 3,285 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,228 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है.

इसके अलावा बैंक ने अपने फंसे हुए कर्जों को कम करने में भी कामयाबी हासिल की है. सितंबर 2026 के अंत में बैंक का ग्रॉस NPA घटकर 2.12 फीसदी पर आ गया, जो एक साल पहले 2.65 फीसदी था. वहीं नेट NPA भी 0.21 फीसदी से घटकर सिर्फ 0.17 फीसदी रह गया है. पिछले कुछ सालों में पूंजी डालने के साथसाथ वसूली तेज करने से बैंक की बैलेंस शीट काफी साफ हुई है.

52,878 करोड़ रुपये की फेयरफैक्स डील के मायने

तिमाही नतीजों से ठीक पहले 14 अक्टूबर को सरकार ने IDBI बैंक की 60.72 फीसदी हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दी है. कनाडा के अरबपति प्रेम वात्सा की कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स ये हिस्सेदारी खरीदने जा रही है. करीब 52,878 करोड़ रुपये के इस सौदे में केंद्र सरकार अपनी 30.48 फीसदी हिस्सेदारी करीब 26,620 करोड़ रुपये में बेचेगी. वहीं LIC अपनी 30.24 फीसदी हिस्सेदारी लगभग 26,440 करोड़ रुपये में बेचेगी.

फेयरफैक्स इस डील के लिए 81 रुपये प्रति शेयर का भाव चुकाएगी, जो दो स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा तय किए गए 75.99 रुपये के फेयर वैल्यू से ज्यादा है. साल 2022 में शुरू हुई विनिवेश की ये प्रक्रिया इस साल की शुरुआत में तब अटक गई थी, जब शुरुआती बोलियां सरकार के रिजर्व प्राइस से कम आई थीं. अब ये सौदा चालू वित्त वर्ष के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है, जो भारतीय बैंकिंग सेक्टर में निजीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम होगा.

इस सौदे को लेकर शनिवार को वित्त मंत्रालय ने भी स्थिति साफ कर दी है. मंत्रालय ने बताया कि IDBI एक्ट, 2003 के तहत सरकार पर बैंक में अपनी हिस्सेदारी घटाने या बेचने को लेकर कोई कानूनी रोक नहीं है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। मंत्रालय ने दिल्ली हाई कोर्ट के 2018 के फैसले का हवाला दिया, जिसमें केंद्र सरकार के हिस्सेदारी घटाने के अधिकार को सही ठहराया गया था.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.