
नई दिल्ली। Gold Silver Outlook: दिवाली से पहले सोने और चांदी की कीमतों में तेजी आएगी या इनकी चमक फीकी पड़ती रहेगी? आने वाले सप्ताह में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बुलियन मार्केट की दिशा कई अहम कारकों पर निर्भर करेगी। पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, अमेरिकी डॉलर की चाल और भारतीय रुपये में मजबूती कीमती धातुओं की कीमतों को प्रभावित कर सकती है।
Gold Silver Outlook: इस सप्ताह किन कारकों पर रहेगी नजर?कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से सोने पर क्या असर होगा?MCX पर सोने की कीमत में कितनी गिरावट आई?भारतीय रुपये की मजबूती ने कैसे बदला बाजार का रुख?Silver Outlook: चांदी में सोने से ज्यादा गिरावट क्यों आई?क्या अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति से बढ़ेंगी कीमतें?दिवाली से पहले सोना-चांदी खरीदने वालों को क्या करना चाहिए?आगे क्या रहेगा सोने-चांदी का रुख?
हाल के कारोबारी सत्रों में सोने और चांदी के वायदा भाव में गिरावट देखने को मिली है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना पिछले सप्ताह 3,581 रुपये यानी 2.4 प्रतिशत टूटकर 1.47 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं, चांदी का वायदा भाव 14,568 रुपये यानी 6.4 प्रतिशत गिरकर 2.11 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया।
विश्लेषकों के मुताबिक, आगामी सप्ताह में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में दिवाली से पहले सोने-चांदी की खरीदारी करने वाले ग्राहकों और निवेशकों की नजर वैश्विक आर्थिक आंकड़ों तथा भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर रहेगी।
आने वाले सप्ताह में निवेशकों के लिए चीन के आर्थिक आंकड़े महत्वपूर्ण रहेंगे। ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। चीन की औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े आंकड़ों का असर औद्योगिक धातुओं की मांग पर पड़ सकता है। चांदी का इस्तेमाल निवेश के अलावा औद्योगिक क्षेत्रों में भी होता है, इसलिए इसकी कीमतों पर आर्थिक गतिविधियों का असर सोने के मुकाबले अलग हो सकता है।
इसके अलावा, अमेरिका के आवास बाजार से जुड़े आंकड़े, उपभोक्ता धारणा, महंगाई की उम्मीदें और भारत, ब्रिटेन तथा अमेरिका के खरीद प्रबंधक सूचकांक (PMI) भी बाजार की दिशा तय करने में भूमिका निभा सकते हैं।
निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पर भी रहेगी। ब्याज दरों को लेकर किसी भी संकेत का असर डॉलर और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड पर पड़ सकता है, जिससे सोने-चांदी की कीमतों में बदलाव संभव है।
कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से सोने पर क्या असर होगा?
पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ती अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बाजार के लिए अहम मुद्दा बनी हुई है। ब्रेंट क्रूड का भाव 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने से महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ सकती हैं।
ऊर्जा की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने से परिवहन और उत्पादन की लागत बढ़ सकती है। इसका असर वैश्विक महंगाई पर पड़ सकता है। यदि महंगाई का दबाव बढ़ता है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकते हैं। ऐसी स्थिति में सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों पर दबाव आ सकता है।
हालांकि, पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर भी रुख कर सकते हैं। ऐसे में सोने को समर्थन मिल सकता है। यही वजह है कि आने वाले सप्ताह में सोने की कीमतों की दिशा पर एक साथ कई विपरीत कारकों का असर देखने को मिल सकता है।
ब्रोकरेज मंच लेमॉन के शोध प्रमुख गौरव गर्ग के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव के कारण बाजार में अनिश्चितता बनी रह सकती है। उनके मुताबिक, ऊर्जा की ऊंची कीमतें महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा कर सकती हैं, जबकि अमेरिकी सरकारी बॉन्ड यील्ड में नरमी सोने और चांदी को कुछ समर्थन दे सकती है।
MCX पर सोने की कीमत में कितनी गिरावट आई?
पिछले सप्ताह घरेलू वायदा बाजार में सोने की कीमत में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। दिसंबर डिलीवरी वाले सोने का भाव 3,581 रुपये घटकर 1.47 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। प्रतिशत के आधार पर इसमें 2.4 फीसदी की गिरावट आई।
इस गिरावट के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल के साथ भारतीय रुपये की मजबूती भी एक अहम कारण रही। भारत अपनी सोने की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में रुपये के मजबूत होने से आयातित सोने की लागत घट सकती है।
विश्लेषकों के अनुसार, रुपये में मजबूती आने से घरेलू बाजार में सोने की कीमत पर अतिरिक्त दबाव पड़ा। यही वजह रही कि घरेलू बाजार में सोने की गिरावट अंतरराष्ट्रीय बाजार की तुलना में अधिक रही।
हालांकि, आगे सोने की कीमतें किस दिशा में जाएंगी, यह डॉलर, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, वैश्विक मांग और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
भारतीय रुपये की मजबूती ने कैसे बदला बाजार का रुख?
पिछले पांच कारोबारी सत्रों में रुपये में उल्लेखनीय मजबूती देखने को मिली। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, रुपया 96.8 के स्तर से मजबूत होकर 94.8 के स्तर पर पहुंच गया। इस दौरान इसमें 180 पैसे से अधिक की मजबूती दर्ज की गई।
रुपये की चाल पर भारतीय रिजर्व बैंक के हस्तक्षेप और कारोबारियों की डॉलर खरीद से जुड़ी गतिविधियों का असर रहा। रुपये में मजबूती से आयातकों को राहत मिल सकती है, क्योंकि विदेशी मुद्रा में होने वाली खरीद की रुपये में लागत कम हो जाती है।
सोने के मामले में इसका सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ सकता है। पिछले सप्ताह रुपये में मजबूती के साथ घरेलू बाजार में चार कारोबारी सत्रों के दौरान सोने की कीमत 3,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से अधिक गिर गई।
आगे भी यदि रुपया मजबूत बना रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत स्थिर रहने के बावजूद घरेलू बाजार में इसकी कीमतों पर दबाव रह सकता है। इसके उलट, रुपये में कमजोरी आने से आयातित सोना महंगा हो सकता है।
Silver Outlook: चांदी में सोने से ज्यादा गिरावट क्यों आई?
पिछले सप्ताह चांदी की कीमतों में सोने की तुलना में अधिक गिरावट दर्ज की गई। MCX पर चांदी का वायदा भाव 14,568 रुपये यानी 6.4 प्रतिशत टूटकर 2.11 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया।
चांदी की कीमतों पर निवेश मांग के अलावा औद्योगिक मांग का भी असर पड़ता है। सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में इसके इस्तेमाल के कारण वैश्विक आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंताएं चांदी के भाव को प्रभावित कर सकती हैं।
जब बाजार में आर्थिक सुस्ती या मांग कमजोर होने की आशंका बढ़ती है, तो चांदी पर दबाव अधिक हो सकता है। वहीं, डॉलर की कमजोरी और निचले स्तरों पर खरीदारी इसे समर्थन दे सकती है।
जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (जिंस एवं मुद्रा शोध) प्रणव मेर के अनुसार, शुक्रवार को सोने और चांदी के वायदा भाव सीमित दायरे में रहे। पहले की बिकवाली के सौदे काटने और निचले स्तर पर खरीदारी से दोनों धातुओं को कुछ समर्थन मिला। अमेरिकी डॉलर में कमजोरी भी इनके लिए सकारात्मक रही।
इसलिए चांदी में आगे तेजी आने की संभावना को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता, लेकिन औद्योगिक मांग और वैश्विक आर्थिक आंकड़े इसकी दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
क्या अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति से बढ़ेंगी कीमतें?
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़ी उम्मीदें सोने और चांदी के बाजार के लिए अहम बनी हुई हैं। ब्याज दरें बढ़ने या लंबे समय तक ऊंची रहने की आशंका से डॉलर और बॉन्ड यील्ड को समर्थन मिल सकता है, जिससे कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ सकता है।
इसके विपरीत, यदि बाजार को ब्याज दरों में कटौती की संभावना दिखाई देती है या अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट आती है, तो सोने और चांदी को फायदा मिल सकता है।
हालांकि, केवल महंगाई के आंकड़ों के आधार पर ब्याज दरों की दिशा तय नहीं होती। फेडरल रिजर्व रोजगार, आर्थिक वृद्धि, महंगाई और वित्तीय परिस्थितियों सहित कई संकेतकों का आकलन करता है।
प्रणव मेर के मुताबिक, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगे की नीति को लेकर अनिश्चितता के बीच निवेशकों को नए आर्थिक आंकड़ों का इंतजार करना पड़ सकता है। ऐसे में आगामी सप्ताह में डॉलर की चाल और ब्याज दरों से जुड़े संकेत बाजार की दिशा प्रभावित कर सकते हैं।
दिवाली से पहले सोना-चांदी खरीदने वालों को क्या करना चाहिए?
दिवाली और धनतेरस से पहले सोने-चांदी की खरीदारी करने वाले ग्राहकों के लिए कीमतों में उतार-चढ़ाव महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, पिछले सप्ताह आई गिरावट को देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि कीमतें आगे भी लगातार नीचे जाएंगी।
यदि आप आभूषण खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो खरीदारी से पहले स्थानीय बाजार में सोने और चांदी के ताजा भाव की जानकारी लें। अलग-अलग शहरों में स्थानीय कर, मेकिंग चार्ज और अन्य लागतों के कारण अंतिम कीमत में अंतर हो सकता है।
निवेश के उद्देश्य से खरीदारी करने वालों को एक साथ पूरी रकम लगाने के बजाय अपनी वित्तीय स्थिति और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार निर्णय लेना चाहिए। सोने और चांदी के वायदा कारोबार में उतार-चढ़ाव अधिक हो सकता है, इसलिए बिना पर्याप्त जानकारी के लीवरेज के साथ ट्रेडिंग करने से बचना चाहिए।
आभूषण खरीदते समय हॉलमार्क, HUID और बिल की जांच करना भी जरूरी है। इससे खरीदारी की शुद्धता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।
आगे क्या रहेगा सोने-चांदी का रुख?
कुल मिलाकर, दिवाली से पहले बुलियन मार्केट में तेजी और गिरावट दोनों की संभावना बनी हुई है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से सोने की सुरक्षित निवेश मांग को समर्थन मिल सकता है, जबकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंताएं बढ़ा सकती हैं।
भारतीय रुपये की मजबूती घरेलू सोने की कीमतों पर दबाव डाल सकती है। वहीं, चांदी के लिए औद्योगिक मांग, चीन के आर्थिक आंकड़े और वैश्विक आर्थिक वृद्धि की संभावनाएं महत्वपूर्ण रहेंगी।
इसलिए आने वाले सप्ताह में सोने-चांदी की कीमतों की दिशा तय करने के लिए निवेशकों को डॉलर, रुपये, कच्चे तेल और अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों पर नजर रखनी होगी। दिवाली से पहले कीमतों में किसी भी बड़े बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी और बाजार विश्लेषण पर आधारित है। इसे निवेश की सलाह न मानें। सोने-चांदी की कीमतें बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती हैं। निवेश या ट्रेडिंग से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।



