Parag Parikh Flexi Cap Fund: शेयर बाजार में निवेश करने वालों के बीच पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड का एक बड़ा नाम है. लेकिन बीते कुछ समय से इस फंड को लेकर एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है. फंड में हर महीने आने वाले पैसों की रफ्तार अचानक से धीमी पड़ गई है. मार्च 2026 में जहां इस फंड में करीब 3,950 करोड़ रुपये का निवेश आया था, वहीं सितंबर आतेआते ये आंकड़ा घटकर सिर्फ 900 करोड़ रुपये रह गया. सीधे तौर पर देखें तो महज छह महीने में निवेश में 77 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। इतनी बड़ी गिरावट के बाद बाजार में कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं.

निवेशकों का पैसा कम होने की असली वजह
निवेश में आई इस कमी को लेकर फंड मैनेजमेंट जरा भी परेशान नहीं है. पीपीएफएएस म्यूचुअल फंड के मैनेजर राज मेहता ने साफ किया है कि निवेश घटने से उनकी रणनीति पर कोई असर नहीं पड़ा है. उनका कहना है कि आज भी फंड में नया पैसा आ रहा है. निवेश घटने की मुख्य वजह बाजार का मौजूदा माहौल है. हाल के दिनों में मिडकैप के साथ ही स्मॉलकैप फंडों ने काफी शानदार रिटर्न दिए हैं. ऐसे में निवेशक हालिया मुनाफा देखकर उधर अपना पैसा शिफ्ट कर रहे हैं. अमूमन लोग सिर्फ बीते कुछ महीनों का रिटर्न देखकर अपना पैसा लगाने का फैसला लेते हैं.
कैश रखने के बजाय बाजार में खरीदारी
एक तरफ फंड में नया पैसा कम आ रहा है, तो दूसरी तरफ फंड मैनेजर ने कैश जमा करने के बजाय खरीदारी तेज कर दी है. मार्च में फंड के पास कुल संपत्ति का 18.94 फीसदी हिस्सा कैश में था. सितंबर में ये घटकर 9.77 फीसदी पर आ गया. राज मेहता का कहना है कि पैसा कैश में रखना बाजार की स्थिति पर निर्भर करता है. बीते दिनों बाजार में कोई बड़ी तेजी नहीं आई. कई अच्छे शेयरों के दाम गिरे हैं. ऐसे में फंड को खरीदारी का शानदार मौका मिल गया. यही वजह है कि कैश कम करके शेयरों में ज्यादा पैसा लगाया गया है. फंड की कुल संपत्ति का 72.06 फीसदी हिस्सा अभी भी भारतीय इक्विटी में है. वहीं विदेशी बाजार में 11.90 फीसदी निवेश किया गया है.
किन शेयरों में लगाया गया पैसा
सितंबर के महीने में फंड ने अपनी रणनीति के तहत कई बड़े बदलाव किए हैं. अगस्त के मुकाबले सितंबर में रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ में सबसे ज्यादा नया पैसा डाला गया. कुल संपत्ति का 1.81 फीसदी हिस्सा अकेले इसी कंपनी में लगाया गया है. इसके साथ ही महिंद्रा, इंडस टावर्स से लेकर भारती एयरटेल जैसी कंपनियों में निवेश बढ़ाया गया है. ऑयल सेक्टर की कुछ चुनिंदा कंपनियों में भी खरीदारी हुई है. वहीं दूसरी तरफ फंड ने ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी से अपना पूरा पैसा बाहर निकाल लिया है.
कैसा रहा है फंड का प्रदर्शन
हालिया समय में इस फंड का रिटर्न थोड़ा कमजोर जरूर दिखा है. एक साल के भीतर इसके रेगुलर प्लान ने 4.14 फीसदी का निगेटिव रिटर्न दिया है. अगर इसकी तुलना बेंचमार्क निफ्टी 500 टीआरआई से करें तो वहां भी 2.03 फीसदी की गिरावट रही है. छोटे समय में भले ही मुनाफा न दिखा हो, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए ये फंड हमेशा फायदेमंद रहा है. तीन, पांच या दस साल की बात करें तो फंड ने हमेशा अपने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन करके निवेशकों की जेब भरी है.



