Stock Market UTurn: शेयर बाजार में आज सुबह कारोबार की शुरुआत बेहद खराब रही, लेकिन कुछ ही देर में पूरी तस्वीर बदल गई. सुबह बाजार खुलते ही चारों तरफ बिकवाली का माहौल था. आलम ये था कि सेंसेक्स देखते ही देखते 600 अंक से ज्यादा टूट गया. वहीं निफ्टी भी फिसलकर 22,400 के नीचे चला गया था. हालांकि, इस भारी गिरावट के बाद निचले स्तरों पर अचानक खरीदारी लौटी. बाजार ने ऐसा शानदार यूटर्न लिया कि सेंसेक्स अपने दिन के निचले स्तर से 800 अंक उछल गया. निफ्टी ने भी जोरदार वापसी करते हुए 22,650 का आंकड़ा पार कर लिया. बाजार को संभालने में आज फार्मा कंपनियों के शेयरों ने सबसे अहम भूमिका निभाई.

सुबह खुलते ही बाजार में मच गया था हाहाकार
आज सुबह जब बाजार खुला, तो एशियाई बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ा. शुरुआती कारोबार में बिकवाली का दबाव इतना ज्यादा था कि सुबह 9:33 बजे सेंसेक्स 411.67 अंक गिरकर 72,712.16 पर आ गया. इसी समय निफ्टी 146.95 अंक फिसलकर 22,453.05 पर कारोबार कर रहा था.
कुछ ही मिनटों में गिरावट और गहरी हो गई. इंट्राडे में सेंसेक्स 609.26 अंक टूटकर 72,514.57 के निचले स्तर तक पहुंच गया. निफ्टी भी 212.65 अंकों का गोता लगाकर 22,387.35 तक गिर गया. बड़ी कंपनियों के साथसाथ छोटे और मझोले शेयरों की भी जमकर पिटाई हुई. निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में आधेआधे फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई. इस शुरुआती तबाही में बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप 3.70 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा घट गया. सीधे शब्दों में कहें तो बाजार खुलते ही निवेशकों की 3.70 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की दौलत साफ हो गई.
शुरुआती गिरावट के पीछे रहे ये बड़े कारण
सुबह बाजार के इस तरह बिखरने के पीछे कई ग्लोबल और घरेलू कारण रहे. सबसे बड़ा झटका आईटी सेक्टर से लगा, जहां 2.3% की भारी गिरावट आई. देश की दिग्गज आईटी कंपनी इंफोसिस का शेयर 3.4% तक टूट गया. दरअसल, उत्तरी अमेरिकी बाजार में कमजोरी के चलते इंफोसिस ने अपने सालाना रेवेन्यू ग्रोथ के अनुमान को घटा दिया है. कंपनी का ये फैसला उसके उम्मीद से बेहतर रहे रेवेन्यू पर भारी पड़ गया.
दूसरी तरफ, इस हफ्ते अमेरिकी फेडरल रिजर्व का ब्याज दरों को लेकर फैसला आना है. इसे लेकर भी निवेशकों के मन में घबराहट थी. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। बाजार के डर को मापने वाला इंडेक्स ‘इंडिया विक्स’ 4.81% उछलकर 17.67 पर पहुंच गया. इंडिया विक्स के बढ़ने का मतलब है कि कम समय में बाजार में भारी उठापटक होने की आशंका है. इसके अलावा एशियाई बाजारों में भी बिकवाली की आंधी चल रही थी. दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1% टूटा. जापान का निक्केई 225, इंडोनेशिया का जकार्ता कंपोजिट और सिंगापुर का स्ट्रेट टाइम्स करीब आधेआधे फीसदी फिसल गए. चीन का शंघाई कंपोजिट भी लाल निशान में था. सिर्फ हॉन्ग कॉन्ग के हैंग सेंग में आधे फीसदी की बढ़त थी, जबकि थाईलैंड के सेट कंपोजिट में आधे फीसदी से थोड़ी कम तेजी रही.
इन 3 वजहों से बदली बाजार की चाल
सुबह की भारी गिरावट के बाद करीब 9:53 बजे बाजार का मूड अचानक बदल गया. निचले स्तर से बाजार को ऊपर खींचने में तीन बड़ी वजहों ने काम किया.
- पहली वजह ‘वैल्यू बाइंग’ रही. पिछले हफ्ते बाजार में भारी गिरावट आई थी, जिससे कई अच्छी कंपनियों के शेयर काफी सस्ते हो गए थे. आज जब बाजार और गिरा, तो निवेशकों ने इन सस्ते शेयरों में जमकर खरीदारी शुरू कर दी. फार्मा सेक्टर के शेयरों में आई तेजी ने भी बाजार को मजबूत सहारा दिया.
- दूसरी बड़ी राहत कच्चे तेल की कीमतों से मिली. ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 117 डॉलर प्रति बैरल के अपने छह महीने के उच्च स्तर से नीचे आ गया है. शुक्रवार को भारतीय बाजार बंद होने के बाद इसमें नरमी आई है और ये 114 से 114.5 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है. हालांकि, यमन के हूती विद्रोहियों की तरफ से सऊदी अरब पर लगातार हो रहे हमलों के कारण तेल की सप्लाई को लेकर चिंता अभी भी बनी हुई है.
- तीसरी और अहम वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों की खरीदारी रही. एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने शुक्रवार को भारतीय बाजार में 887.65 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे. इस आंकड़े ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाने का काम किया और बाजार ने शानदार वापसी कर ली.



