चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में जो हलफनामा दाखिल किया है, उसमें बंगाल एसआईआर को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. इसके मुताबिक बंगाल में वोटरों के नाम काटने के खिलाफ जो अपील दाखिल की गई, वो राज्य चुनाव आयोग के इशारे पर उनके अधिकारियों ने दाखिल की. दिलचस्प बात है कि इसकी जानकारी तक भारत निर्वाचन आयोग को नहीं थी.

अब तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने इसको लेकर सवाल उठाया है. महुआ का कहना है कि असली खेल बंगाल में हुआ, जिसका अब धीरेधीरे खुलासा हो रहा है.

EC को इन 3 बातों की नहीं थी जानकारी

1. अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त एसएस संधु ने एक आपत्ति पत्र जारी करते हुए लिखा था कि बंगाल में एसआईआर को लेकर जो नाम काटे गए हैं, उसके खिलाफ के अधिकारियों ने अपील दाखिल की है.

इसके बारे में दोनों चुनाव आयुक्तों और राज्य निर्वाचन आयोग के अधिकारी को कोई जानकारी नहीं थी. एसएस संधु ने इसको लेकर एक मीटिंग में सवाल भी पूछा था, लेकिन किसी ने भी इसके बारे में कुछ न बताया.

2. चुनाव आयोग ने जो हलफनामा दाखिल किया है. उसमें कहा है कि उसे भी 4 दिन पहले यह जानकारी मिली थी कि 16.1 लाख वोटरों के खिलाफ राज्य चुनाव आयोग के अधिकारियों ने अपील दायर की है.

आयोग का कहना है कि यह गलत नहीं है. सब कुछ सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइंस के अनुसार किया गया है. हालांकि, सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इसकी जानकारी चुनाव आयोग के शीर्ष स्तर पर क्यों नहीं दी गई?

3. बंगाल में एसआईआर के समय काटे गए नामों के लेकर सस्पेंस था. चुनाव आयोग ने उस वक्त इसे क्लियर नहीं किया. सुप्रीम कोर्ट में जब सुनवाई हुई, तब आयोग ने बताया कि कुल 38 लाख वोटर्स एसआईआर की जद में फंस गए.

इनमें 22 लाख ऐसे थे, जिनके नाम कटे थे और वे वापस आना चाह रहे थे. 16 लाख ऐसे थे, जिनके नाम कटने के लिए अपील दायर की गई थी.

इन कारणों से भी चुनाव आयोग पर सवाल

तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा के मुताबिक बंगाल के चुनाव में तत्कालीन चीफ एग्जक्यूटिव ऑफिसर ने सबको अंधेरे में रखकर गेम किया. चुनाव में बीजेपी को जीत मिली तो उसके बाद अग्रवाल को राज्य का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया. महुआ ने अग्रवाल की भूमिका की जांच की मांग की है.

तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि बंगाल चुनाव 2026 में उसे सत्ताधारी पार्टी बीजेपी से 30 लाख कम वोट मिले हैं. चुनाव में बीजेपी को 2 करोड़ 90 लाख वोट मिले, जबकि तृणमूल कांग्रेस को 2 करोड़ 60 लाख वोट मिले.

तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि एसआईआर में 38 लाख नामों पर पेच फंसा, जिसके कारण बंगाल चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा. तृणमूल ने 30 ऐसी सीटों की लिस्ट सुप्रीम कोर्ट को दी है, जहां एसआईआर का सीधा असर देखा गया.

पूरे मामले में अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का मामला पेंडिंग है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने मामले की जांच की बात कही है. बंगाल में एसआईआर को लेकर एक अन्य मामला पहले से पेंडिंग है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। इस मामले में सुनवाई के दौरान जस्टिस उज्जवल भुईंया ने कहा था कि अगर ऐसा कुछ मिलता है कि एसआईआर के कारण किसी उम्मीदवार की हार हुई है तो हम सख्त फैसला लेंगे.

दूसरी तरफ बंगाल में जिन लोगों के नाम कटे हैं, उनका मामला ट्रिब्यूनल में पेंडिंग है. चुनाव आयोग के मुताबिक ट्रिब्यूनल ने अभी तक 1 लाख मामले में अपना फैसला सुनाया है. इनमें से 93 प्रतिशत मामले में ट्रिब्यूनल में वोटरों के पक्ष में फैसला दिया है.

वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन का कहना है कि इसी आधार पर बंगाल में SIR के दौरान काटे गए सभी वोटरों के नाम दोबारा वोटर लिस्ट में जोड़ दिए जाने चाहिए.