LTCG Tax News: भारतीय शेयर बाजार से विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक पिछले कई महीनों से लगातार अपना पैसा निकाल रहे थे. इस भारी बिकवाली को रोकने के लिए बाजार के जानकार लंबे समय से लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स को कम करने या पूरी तरह खत्म करने की मांग कर रहे हैं. अब लगता है कि सरकार के रुख में आई नरमी ने विदेशी निवेशकों का भरोसा वापस जीतना शुरू कर दिया है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में बयान दिया था कि वो इक्विटी टैक्स को लेकर निवेशकों की चिंताओं पर विचार करेंगी.

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मार्केट रेगुलेटर सेबी ने भी सरकार से विदेशी निवेशकों पर लगने वाले LTCG टैक्स को खत्म करने की सिफारिश की है. इसके अलावा सेबी ने घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों को भी राहत देने का प्रस्ताव रखा है. प्रस्ताव के तहत अगर निवेशक अपने पुराने म्यूचुअल फंड बेचकर किसी नई स्कीम में दोबारा पैसा लगाते हैं, तो उन्हें इस टैक्स से छूट मिलनी चाहिए. हालांकि, सेबी ने अभी तक इस रिपोर्ट पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है. इन्ही सब संकेतों के बाद मंगलवार, 3 नवंबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार में जोरदार वापसी की. उन्होंने एक ही दिन में नेट 6,836.81 करोड़ रुपये के शेयर खरीद डाले. ये साल 2026 में उनकी अब तक की सबसे बड़ी एक दिन की खरीदारी है.

दो दिन में 9,952 करोड़ का निवेश, झूमा शेयर बाजार

टैक्स में बदलाव की उम्मीद से विदेशी निवेशकों ने अपनी तिजोरी खोल दी है. एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, मंगलवार को विदेशी निवेशकों ने कुल 20,970.51 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जबकि 14,133.70 करोड़ रुपये की बिकवाली की. इससे पहले 2 सितंबर को 6,688.37 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड नेट निवेश हुआ था, जो अब टूट चुका है. सोमवार को भी बाजार में 3,114.68 करोड़ रुपये का नेट निवेश आया था. यानी हफ्ते के शुरुआती दो कारोबारी सत्रों में ही FII का कुल नेट निवेश करीब 9,952 करोड़ रुपये पहुंच गया है.

इस तगड़ी खरीदारी के दम पर सेंसेक्स के साथ निफ्टी लगातार चौथे कारोबारी सत्र में बढ़त के साथ बंद हुए. मंगलवार को सेंसेक्स 1,225 अंक चढ़कर 76,918 पर पहुंच गया. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। वहीं निफ्टी 370 अंक बढ़कर 23,811 पर बंद हुआ. पिछले चार सत्रों में निफ्टी करीब 5 फीसदी चढ़ा है, जो सात महीने में इसकी सबसे बड़ी चार दिन की तेजी है. इस तेजी में FMCG सेक्टर में 3 फीसदी की बढ़त रही. दूसरी तिमाही के मजबूत नतीजों के साथ FY27 का गाइडेंस बढ़ाने के बाद मैरिको के शेयर 9 फीसदी उछले. इसके अलावा MCX में 8 फीसदी, लोढ़ा डेवलपर्स में 6 फीसदी के साथ BSE के शेयरों में 5 फीसदी की तेजी आई.

क्यों बाजार से पैसा निकाल रहे थे विदेशी निवेशक

इस हालिया खरीदारी से पहले की तस्वीर काफी चिंताजनक थी. 1 अप्रैल से 2 नवंबर 2026 के बीच विदेशी निवेशकों ने घरेलू बाजार से 1.59 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर बेचे थे. इससे पहले उन्होंने वित्त वर्ष 2026 में करीब 1.81 लाख करोड़ रुपये के अलावा वित्त वर्ष 2025 में 1.27 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की थी. पश्चिम एशिया में युद्ध, महंगे कच्चे तेल के साथ दूसरे देशों में एआई से जुड़े बेहतर मौकों की वजह से ये पैसा बाहर जा रहा था.

इस बिकवाली से मई में रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर 96.96 के निचले स्तर पर पहुंच गया था. आरबीआई द्वारा बैंकों के लिए FCNR डिपॉजिट की स्वैप विंडो के अलावा तीन सरकारी तेल कंपनियों के लिए अलग डॉलर विंडो खोलने के बाद 2 नवंबर को रुपया संभलकर 94.90 के आसपास आया. जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वी. के. विजयकुमार के मुताबिक, विदेशी बिकवाली से रुपया टूटता है, जिससे आयातित महंगाई बढ़ती है. इस साल खराब मानसून की वजह से खानेपीने की महंगाई पहले से डरा रही है, इसलिए विदेशी निवेशकों के साथ घरेलू निवेशकों के लिए भी LTCG टैक्स खत्म होना चाहिए.

एशिया के दूसरे बाजारों के मुकाबले भारत में ज्यादा टैक्स

जेएम फाइनेंशियल के वेंकटेश बालासुब्रमण्यम के मुताबिक, ताइवान, सिंगापुर, हांगकांग में लिस्टेड शेयरों पर कोई कैपिटल गेन्स टैक्स नहीं है. चीन में अस्थायी छूट है, जबकि इंडोनेशिया में सिर्फ 0.1 फीसदी ट्रांजैक्शन टैक्स लगता है. कोरिया में भी 25 फीसदी से कम हिस्सेदारी रखने वाले निवेशकों पर ये टैक्स नहीं लगता.

जेएम फाइनेंशियल के मुताबिक, 201 महीनों में से 28 महीनों में निफ्टी का 12 महीने का रिटर्न रुपये में तो पॉजिटिव रहा, लेकिन डॉलर में जीरो या निगेटिव हो गया. ऐसा 201214, 201819, 202223 के अलावा फरवरी 2025 में हुआ. यानी रुपये की कमजोरी की वजह से विदेशी निवेशक को डॉलर में घाटा होने पर भी भारत में टैक्स देना पड़ता है. LTCG टैक्स हटाने से उनके सालाना डॉलर रिटर्न में करीब 2.2 फीसदी का इजाफा होगा. ‘डब्ल्यू बाय ग्रो’ के रिसर्च हेड नीरव करकेरा का कहना है कि टैक्स कम करने से भारत दूसरे बाजारों का मुकाबला कर सकेगा, हालांकि विदेशी पैसे को टिकाए रखने के लिए कंपनियों की कमाई बढ़ना भी जरूरी है.

टैक्स माफ हुआ तो घाटे की भरपाई कैसे करेगी सरकार

जेफरीज के एनालिस्ट अभिनव सिन्हा बताते हैं कि सरकारी बॉन्ड में टैक्स राहत देने के बाद जूनजुलाई 2026 में 9 अरब डॉलर का विदेशी निवेश आया था. शेयर बाजार में भी अध्यादेश के जरिए बजट से पहले ऐसी राहत दी जा सकती है. एसबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक भी सरकार बजट 2027 में 50,000 करोड़ रुपये के नुकसान को झेल सकती है.

जेफरीज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2025 में सरकार ने इक्विटी LTCG टैक्स से 1.3 लाख करोड़ रुपये जुटाए थे. डायरेक्ट टैक्स में LTCG के साथ STT की हिस्सेदारी 8 फीसदी रही थी. विजयकुमार का मानना है कि अक्टूबर 2026 में जीएसटी कलेक्शन 23 फीसदी बढ़ा है, जो सरकार की मजबूत स्थिति दिखाता है. सरकार घाटे को पाटने के लिए STT में थोड़ी बढ़ोतरी कर सकती है. वहीं बालासुब्रमण्यम ने सुझाव दिया है कि टैक्स पूरी तरह हटाने के बजाय विदेशी निवेशकों के डॉलर में होने वाले असली मुनाफे पर टैक्स लगाया जाए, जिससे सरकारी खजाने पर भी बोझ नहीं पड़ेगा.