क्या आज के दौर में बच्चों का बचपन केवल स्मार्टफोन की स्क्रीन, रील्स और सोशल मीडिया तक सीमित होकर रह गया है? इस गंभीर मुद्दे पर अब भारत के जानेमाने टेक दिग्गज और जोहो के मुख्य वैज्ञानिक श्रीधर वेम्बू ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने भारत सरकार से मांग की है कि छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह से बैन लगा देना चाहिए. वेम्बू का मानना है कि बच्चों के हाथों में स्मार्टफोन की जगह किताबें होनी चाहिए और उन्हें धूप में मिट्टी के साथ खेलना चाहिए. उनके इस बयान ने पूरे देश में एक नई बहस को जन्म दे दिया है.

जोहो प्रमुख की भारत सरकार से बड़ी मांग
जोहो के मुख्य वैज्ञानिक श्रीधर वेम्बू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी. उन्होंने लिखा कि भारत को भी छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर सख्त पाबंदी लगा देनी चाहिए. उनका मानना है कि आज की पीढ़ी को डिजिटल दुनिया के जाल से बाहर निकालकर असली दुनिया का अनुभव कराना बेहद जरूरी है. बच्चों को फोन स्क्रीन के सामने समय बिताने के बजाय मैदान में जाकर खेलना चाहिए और किताबें पढ़नी चाहिए.
दुनिया भर में बन रहे हैं सख्त कानून
श्रीधर वेम्बू का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई बड़े देश बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखने के लिए सख्त कानून बना रहे हैं. फ्रांस ने 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन कर दिया है, जो यूरोपीय संघ का ऐसा पहला देश बन गया है. इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, मलेशिया, यूएई और ब्रिटेन जैसे देश भी बच्चों की सुरक्षा के लिए स्क्रीन टाइम और प्लेटफॉर्म एक्सेस पर कई तरह की पाबंदियां लगा चुके हैं.
इंटरनेट पर छिड़ी समर्थन और विरोध की बहस
वेम्बू के इस बयान के आते ही सोशल मीडिया पर लोगों की मिलीजुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कई मातापिता और शिक्षकों ने उनके इस विचार का खुले दिल से समर्थन किया. उनका कहना है कि सोशल मीडिया की लत बच्चों के मानसिक विकास और पढ़ाई पर बहुत बुरा असर डाल रही है. लोग मानते हैं कि अगर बच्चों को समय रहते स्क्रीन से दूर नहीं किया गया, तो वे व्यावहारिक दुनिया से पूरी तरह कट जाएंगे.
क्या केवल बैन लगाने से सुलझेगी समस्या?
दूसरी तरफ, कुछ विशेषज्ञों और सोशल मीडिया यूज़र्स का मानना है कि केवल पाबंदी लगाने से समस्या का समाधान नहीं होगा. उनका तर्क है कि बैन लगाने के बजाय बच्चों को डिजिटल साक्षरता सिखाई जानी चाहिए. साथ ही टेक कंपनियों को अपने ऐप्स के डिजाइन में बदलाव करना चाहिए ताकि बच्चे इनके आदी न बनें. भारत जैसे विशाल और विविध देश में इस तरह का बैन लागू करना प्रशासनिक रूप से भी एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है.
खेल के मैदानों की कमी भी है एक बड़ा कारण
इस पूरी बहस में एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने आया है और वह है बच्चों के खेलने के लिए सुरक्षित जगहों की कमी. कई लोगों ने ध्यान दिलाया कि आज बड़े शहरों में पार्क और खेल के मैदान लगातार घट रहे हैं. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। जब बच्चों के पास बाहर खेलने के लिए सुरक्षित जगह ही नहीं होगी, तो वे मजबूरी में घर पर बैठकर मोबाइल ही चलाएंगे. इसलिए सोशल मीडिया बैन करने के साथसाथ बच्चों को खेलकूद के बेहतर विकल्प देना भी उतना ही जरूरी है.



