उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने गोरखपुर विश्वविद्यालय के निरीक्षण के दौरान मिली अव्यवस्थाओं पर कड़ी नाराजगी जताई और अधिकारियों को तीन महीने के भीतर सभी कमियां दूर करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि अगर मुख्यमंत्री के शहर गोरखपुर के विश्वविद्यालय में ही ऐसी स्थिति होगी, तो बाकी जगहों का क्या होगा. राज्यपाल ने बताया कि विश्वविद्यालय में कुल नौ छात्रावास हैं, जिनमें तीन छात्राओं और 6 छात्रों के लिए हैं. उन्होंने कहा कि कुछ छात्रावासों में मरम्मत का काम चल रहा है, जो अच्छी बात है, लेकिन कई बुनियादी सुविधाओं की अब भी कमी है. उन्होंने खासतौर पर इस बात पर सवाल उठाया कि गर्ल्स हॉस्टल में मेस की व्यवस्था है, जबकि बॉयज हॉस्टल के छात्र बाहर से टिफिन मंगाकर खाना खाते हैं.

राज्यपाल ने बताया कि वह खुद हॉस्टल की रसोई तक पहुंचीं और वहां रखे खाद्य पदार्थों की जांच की. उन्होंने तेल की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि पहली नजर में ही उन्हें लगा कि इस्तेमाल किया जा रहा तेल एकदम बेकार है. इसके बाद उन्होंने तुरंत खाद्य विभाग के अधिकारियों को बुलाकर सैंपल लेने के निर्देश दिए. साथ ही उन्होंने खुद भी अलग से सैंपल लिया, ताकि बाद में लखनऊ जाने के बाद वह अलग से इसकी जांच करा सकें. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई बार जांच के दौरान सैंपल बदलने की शिकायतें सामने आती रही हैं, इसलिए पारदर्शिता जरूरी है.
कुलपति को जांच रिपोर्ट तुरंत उपलब्ध कराने के निर्देश
आनंदीबेन पटेल ने कहा कि वह सिर्फ राज्यपाल के तौर पर नहीं, बल्कि एक मां के तौर पर भी चिंतित हैं. उनका कहना है कि छात्रों को शुद्ध और पौष्टिक खाना मिलना चाहिए, क्योंकि खराब खाना उनके स्वास्थ्य और पढ़ाई दोनों पर असर डाल सकता है. उन्होंने कुलपति को जांच रिपोर्ट तुरंत उपलब्ध कराने और भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न होने देने के निर्देश दिए. साथ ही बॉयज हॉस्टल में टिफिन व्यवस्था बंद कर नियमित मेस शुरू करने को भी कहा.
हॉस्टल में वाईफाई और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं
राज्यपाल ने हॉस्टल की अन्य समस्याओं का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि वह मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय गईं थीं, वहां ड्रग्स पकड़ी गई है, दारू पकड़ा गया है. उन्होंने कहा कि अलकनंदा हॉस्टल में वाईफाई और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं है, जबकि कमरों में पंखे उनके आने से ठीक पहले लगाए गए. वहीं, राम प्रसाद शुक्ला हॉस्टल में गंदगी और सीढ़ियों पर पानमसाले के दाग देखकर भी उन्होंने नाराजगी जताई.
‘जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारी जवाबदेही तय करें’
उन्होंने यह भी बताया कि समाज कल्याण विभाग द्वारा बनाए गए अमरावती गर्ल्स हॉस्टल के 50 कमरे तीन साल से बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में उपयोग में नहीं आ सके हैं. इस पर उन्होंने जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात कही और निर्देश दिया कि इन कमियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए.



