भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से बड़े पैमाने पर नौकरियां जाने का खतरा फिलहाल कम है. दूसरे कई देशों की तुलना में भारत की वर्कफोर्स पर AI का असर कम रहने की उम्मीद है. हालांकि, सर्विस सेक्टर की कुछ नौकरियों पर इसका असर जरूर पड़ सकता है. इमें IT और कॉल सेंटर की नौकरियां शामिल हैं. यह हाल में गोल्डमैन सैक्स के चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट शांतनु सेनगुप्ता किया है.

ब्लूमबर्ग टेलीविजन को दिए इंटरव्यू में सेनगुप्ता ने कहा कि भारत की बड़ी आबादी और बड़ी वर्कफोर्स इसका एक प्रमुख कारण है. देश में बहुत से लोग ऐसे काम करते हैं, जिनमें मशीनों की मदद से तुरंत बदलाव करना आसान नहीं है. भारत की करीब 40% वर्कफोर्स कंस्ट्रक्शन और रिटेल ट्रेड से जुड़ी है. इन क्षेत्रों में अभी AI का असर बहुत ज्यादा नहीं दिख रहा है. सबसे ज्यादा बदलाव सर्विस सेक्टर में देखने को मिल सकता है.

फायदे नौकरी जाने के नुकसान से ज्यादा

गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि अगर भारत में AI को धीरेधीरे और सही तरीके से अपनाया जाता है, तो इसके फायदे नौकरी जाने के नुकसान से ज्यादा हो सकते हैं. अगले 10 साल में AI देश की कुल प्रोडक्टिविटी में करीब 0.4 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी कर सकता है. फाइनेंस, हेल्थकेयर, एजुकेशन और बिजनेस सर्विस जैसे क्षेत्रों में AI से फायदा होने की उम्मीद है. वहीं पोस्टल और टेलीकॉम सेवाओं के साथसाथ IT और खासकर कॉल सेंटर की नौकरियों में लोगों की जगह AI लेने का खतरा ज्यादा हो सकता है.

भारत की अर्थव्यवस्था भी मजबूत

गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक, भारत की आर्थिक मजबूती ने भी उसे हैरान किया है. कच्चे तेल के आयात पर काफी निर्भरता के बावजूद भारत दुनिया की तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है. हाल में महंगाई में थोड़ी बढ़ोतरी हुई, लेकिन यह RBI की 26% की तय सीमा के अंदर रही. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। वहीं, गाड़ियों की रिकॉर्ड बिक्री, कर्ज में बढ़ोतरी और GST कलेक्शन में दोहरे अंकों की वृद्धि से भी घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है. सेनगुप्ता के मुताबिक, RBI दिसंबर से ब्याज दरें बढ़ाना शुरू कर सकता है. हालांकि, अगर महंगाई धीरे बढ़ती है तो यह बढ़ोतरी फरवरी और अप्रैल में भी हो सकती है. उन्होंने कहा कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का यह दौर बहुत सीमित रहने की उम्मीद है.