अगर किसी वजह से लोन की ईएमआई नहीं भर पाते हैं, तो बैंक की ओर से रिमाइंडर, जुर्माना और रिकवरी की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. लेकिन सिर्फ एक ईएमआई मिस होने से बैंक को आपकी संपत्ति जब्त करने का अधिकार नहीं मिल जाता. खासकर रिकवरी एजेंट भी कर्ज वसूलने के नाम पर धमकी, गालीगलौज या परिवार को परेशान नहीं कर सकते. संपत्ति पर कार्रवाई लोन के प्रकार, डिफॉल्ट की स्थिति और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करती है. चलिए समझते हैं.

कब बैंक आपकी संपत्ति पर कर सकता है कार्रवाई?
होम लोन, वाहन लोन, गोल्ड लोन या प्रॉपर्टी के बदले लिए गए लोन जैसे सिक्योर्ड लोन में डिफॉल्ट होने पर बैंक संबंधित संपत्ति पर कानूनी कार्रवाई कर सकता है. हालांकि, इसके लिए तय प्रक्रिया का पालन जरूरी है. SARFAESI एक्ट की धारा 13 के तहत जब सिक्योर्ड कर्ज को एनपीए घोषित किया जाता है, तो बैंक 60 दिन के भीतर बकाया चुकाने के लिए लिखित नोटिस दे सकता है. अगर कर्जदार इस नोटिस पर आपत्ति या जवाब देता है, तो बैंक को उस पर विचार करना होता है और आपत्ति खारिज करने की वजह 15 दिनों के भीतर बतानी होती है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। इसलिए सिर्फ एक ईएमआई मिस होने का मतलब यह नहीं है कि बैंक तुरंत घर या वाहन पर कब्जा कर लेगा.
रिकवरी एजेंट परिवार को धमका नहीं सकते
आरबीआई के नियमों के मुताबिक, बैंक और उनके रिकवरी एजेंट कर्ज वसूलने के दौरान धमकी या उत्पीड़न नहीं कर सकते. इसमें कर्जदार को सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना या उसके परिवार, दोस्तों और दूसरे लोगों की निजता में दखल देना भी शामिल है. रिकवरी एजेंट धमकी भरे या गुमनाम कॉल नहीं कर सकते और न ही गलत भाषा वाले संदेश भेज सकते हैं. बकाया कर्ज की वसूली के लिए सुबह 8 बजे से पहले या शाम 7 बजे के बाद लगातार फोन करना भी नियमों के खिलाफ है. कर्जदार को धमकाना, अपमानित करना या बिना जमानत वाले कर्ज के डिफॉल्ट पर गिरफ्तारी की धमकी देना भी उल्लंघन माना जाता है.
एजेंट परेशान करे तो क्या करें?
अगर रिकवरी एजेंट परेशान कर रहा है, तो कर्जदार को कॉल लॉग, व्हाट्सएप मैसेज, वॉइसमेल और दूसरे सबूत सुरक्षित रखने चाहिए. शिकायत सबसे पहले बैंक या संबंधित लोन देने वाली संस्था की शिकायत निवारण व्यवस्था में करनी चाहिए. अगर वहां से समस्या का संतोषजनक समाधान नहीं होता है, तो लागू नियमों और पात्रता के अनुसार आरबीआई की शिकायत व्यवस्था में मामला उठाया जा सकता है. गंभीर धमकी, जबरदस्ती घर में घुसने या शारीरिक हिंसा जैसी स्थिति में पुलिस से संपर्क किया जा सकता है. बैंक किसी रिकवरी एजेंट को आउटसोर्स करने के बाद उसकी हरकतों की जिम्मेदारी से बच नहीं सकता, क्योंकि आरबीआई के अनुसार सेवा प्रदाता और रिकवरी एजेंट की कार्रवाई के लिए संबंधित संस्था जिम्मेदार रहती है.
बैंक का पैसा वसूलना जायज, लेकिन तरीका भी कानूनी होना चाहिए
लोन डिफॉल्ट होने से बैंक का पैसा वापस लेने का अधिकार खत्म नहीं होता. सिक्योर्ड लोन के मामले में बैंक तय कानूनी प्रक्रिया पूरी करके संबंधित संपत्ति पर कार्रवाई कर सकता है. हालांकि, बैंक या रिकवरी एजेंट कानूनी प्रक्रिया की जगह धमकी, अपमान या बिना अधिकार संपत्ति जब्त करने का रास्ता नहीं अपना सकते. ईएमआई चुकाने में परेशानी होने पर बैंक से जल्दी संपर्क करना, उपलब्ध भुगतान या पुनर्गठन विकल्पों को समझना और हर बातचीत का लिखित रिकॉर्ड रखना बेहतर तरीका है. रिकवरी नोटिस को नजरअंदाज करने के बजाय समय रहते बैंक से बात करना जरूरी है.



