सिर्फ 33% लॉस, ईरान के पास अब भी घातक मिसाइलों का जखीरा, ट्रंप का दावा खोखला!!


वाशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भीषण युद्ध को लगभग एक महीना पूरा हो चुका है. वाशिंगटन की राजनीतिक बयानबाजी और अमेरिकी खुफिया विभाग के आकलनों के बीच एक बड़ी खाई नजर आ रही है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया कि ईरान के पास अब ‘बहुत कम रॉकेट’ बचे हैं. हालांकि, खुफिया विभाग की आंतरिक रिपोर्ट्स एक अलग और चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही हैं. अधिकारियों के अनुसार, तेहरान के पास अब भी अपनी मिसाइलों और ड्रोनों का एक बड़ा हिस्सा सुरक्षित है. यह स्थिति युद्ध के आने वाले हफ्तों में अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है. खुफिया जानकारी रखने वाले सूत्रों का कहना है कि ईरान की सैन्य शक्ति को पूरी तरह खत्म करना इतना आसान नहीं है.

ईरान का केवल एक तिहाई मिसाइल भंडार ही तबाह हुआ?
रॉयटर्स और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका अब तक ईरान के मिसाइल स्टॉक का केवल एक तिहाई हिस्सा ही नष्ट कर पाया है. शेष भंडार को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है. माना जा रहा है कि दूसरा एक तिहाई हिस्सा क्षतिग्रस्त हो चुका है या भूमिगत बंकरों और टनल नेटवर्क में फंसा हुआ है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। इसके बावजूद, ईरान के पास अभी भी एक बड़ा हिस्सा ऐसा है जो पूरी तरह सक्रिय है.

यही पैटर्न ईरान की ड्रोन क्षमता पर भी लागू होता है. केवल 33 परसेंट ड्रोन ही अब तक न्यूट्रलाइज किए जा सके हैं. इसका मतलब है कि हफ्तों तक चले अमेरिकी और इजरायली हमलों के बाद भी ईरान बड़े हवाई हमले करने की ताकत रखता है. ट्रंप ने कैबिनेट मीटिंग में कहा था कि ईरान की हमलावर क्षमता खत्म हो चुकी है, लेकिन उन्होंने खुद 1 परसेंट के खतरे को भी गंभीर बताया है.

ईरान अपनी रेंज बढ़ाकर कहां तक हमले कर रहा है?
भारी बमबारी के बावजूद ईरान लगातार युद्ध के मैदान में अपनी सक्रियता दिखा रहा है. इसी हफ्ते एक ही दिन में तेहरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर 15 बैलिस्टिक मिसाइलें और 11 ड्रोन दागे हैं. इससे साबित होता है कि उसका कमांड, कंट्रोल और लॉन्च सिस्टम अभी भी काम कर रहा है. सबसे चौंकाने वाली खबर हिंद महासागर से आई. रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने डिएगो गार्सिया में स्थित अमेरिका-ब्रिटेन के बेस की ओर लंबी दूरी की मिसाइलें दागीं. यह ईरान के बढ़ते इरादों और उसकी मारक क्षमता के विस्तार का संकेत है. इससे साफ होता है कि ईरान की रोकने की शक्ति (Deterrence) अभी भी खत्म नहीं हुई है. वह अब दूर के लक्ष्यों को निशाना बनाकर अमेरिका पर दबाव बढ़ा रहा है.

ईरान की सबसे घातक मिसाइलें आखिर कहां गायब हैं?
युद्ध में सबसे बड़ा रहस्य यह है कि ईरान ने अपनी सबसे आधुनिक मिसाइलों का इस्तेमाल अभी तक क्यों नहीं किया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने ‘फतेह’ सीरीज जैसी अपनी हाइपरसोनिक मिसाइलों को अब तक बचाकर रखा है.

ये हथियार मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने के लिए डिजाइन किए गए हैं. जानकारों का मानना है कि तेहरान इन हथियारों का इस्तेमाल आखिरी विकल्प के तौर पर या अमेरिका को सीधे युद्ध में उतरने से रोकने के लिए कर रहा है. यह इस बात की ओर इशारा करता है कि मिसाइल युद्ध का सबसे खतरनाक दौर अभी शुरू होना बाकी है. अगर ईरान ने इन हथियारों को लॉन्च किया, तो युद्ध का पूरा नक्शा बदल सकता है.
क्या ईरान के ‘अंडरग्राउंड किलों’ को भेद पाना नामुमकिन है?

ईरान के पास भूमिगत मिसाइल सुविधाओं का एक बहुत बड़ा और फैला हुआ नेटवर्क है. युद्ध से पहले के अनुमानों के मुताबिक, ईरान के पास 2,500 से लेकर 6,000 तक मिसाइलें थीं. इनमें से ज्यादातर मिसाइलें मजबूत भूमिगत परिसरों में रखी गई थीं. हफ्तों के हमलों के बाद भी विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान के पास एक दर्जन से ज्यादा ऐसी सुविधाएं सुरक्षित हो सकती हैं. मुख्य सवाल यह है कि क्या ये साइट्स पूरी तरह तबाह हुई हैं या सिर्फ मामूली नुकसान पहुंचा है. यदि इनका ढांचा सुरक्षित है, तो बमबारी कम होते ही ईरान अपनी मिसाइलों को दोबारा सक्रिय कर सकता है. यही कारण है कि अमेरिकी सेना के लिए जीत का दावा करना अभी जल्दबाजी होगी.

अमेरिकी सेना को युद्ध में भारी कीमत चुकानी पड़ रही
अमेरिका ने अपने इस सैन्य अभियान को ‘ऑपरेशन एपिक फ्युरी’ नाम दिया है. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अभियान तय समय पर चल रहा है. यूएस सेंट्रल कमांड ने दावा किया कि 10,000 से ज्यादा ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया गया है. इसमें मिसाइल लॉन्चर और हथियार फैक्ट्रियां शामिल हैं. पेंटागन के अनुसार, ईरान के 92 परसेंट बड़े नौसैनिक जहाज नष्ट कर दिए गए हैं.

हालांकि, असल में कितनी मिसाइलें खत्म हुईं, इसका कोई सटीक डेटा नहीं दिया गया है. दूसरी ओर, अमेरिका को भी भारी नुकसान हो रहा है. चार हफ्तों में अमेरिका ने 850 टोमहॉक मिसाइलें दाग दी हैं, जिससे उसके स्टॉक में कमी आने लगी है. साथ ही, अरबों डॉलर के फाइटर जेट्स और रडार सिस्टम भी तबाह हुए हैं.

होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान का छोटा सा खतरा भी बड़ा क्यों है?
दुनिया की तेल सप्लाई के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) सबसे अहम रास्ता है. ट्रंप ने खुद स्वीकार किया कि अगर 99 परसेंट सफलता भी मिले, तो भी 1 परसेंट का खतरा बना रहता है. अगर एक भी मिसाइल किसी अरबों डॉलर के जहाज से टकराती है, तो वह अस्वीकार्य होगा. ईरान के पास बचा हुआ छोटा सा मिसाइल भंडार भी ग्लोबल सप्लाई चेन को ठप कर सकता है. तेल के टैंकरों पर एक छोटा सा हमला भी दुनिया भर की अर्थव्यवस्था को हिला सकता है. यही वजह है कि ईरान की बची हुई सैन्य शक्ति को कम आंकना अमेरिका के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है. अंत में, सवाल यह नहीं है कि ईरान ने क्या खोया, बल्कि यह है कि उसने अब तक क्या छिपाकर रखा है.

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