ब्लैक मनी केस में चौंकाने वाला खुलासा! 167 केस में एक तिहाई मामले सीधे पनामा पेपर्स से जुड़े!


भारत सरकार ने काले धन के खिलाफ अपनी कार्रवाई को और तेज करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है. ‘ब्लैक मनी (अघोषित विदेशी आय और संपत्ति) तथा कर अधिरोपण अधिनियम’ के तहत 31 दिसंबर 2025 तक सरकार ने कुल 41,257 करोड़ रुपये टैक्स और जुर्माने के रूप में वसूले हैं. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरी कार्रवाई में एक दिलचस्प पहलू यह सामने आया है कि करीब 33 फीसदी मामले पनामा पेपर्स की जांच से जुड़े हैं. इससे साफ है कि विदेशों में छिपाई गई संपत्तियों और अघोषित आय का पता लगाने में पनामा पेपर्स ने अहम भूमिका निभाई है. आपको बता दें कि पनामा पेपर्स को लेकर 2016 में 100 से ज्यादा मीडिया संस्थानों ने मिलकर एक विस्तृत जांच की थी.

सरकार का कहना है कि काले धन के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा. इसका मकसद टैक्स चोरी पर लगाम लगाना और वित्तीय पारदर्शिता को मजबूत करना है, ताकि अर्थव्यवस्था को और साफ-सुथरा बनाया जा सके. साल 2016 में दुनिया भर के 100 से ज्यादा मीडिया संस्थानों ने मिलकर एक ऐसी जांच को अंजाम दिया, जिसने ग्लोबल फाइनेंशियल सिस्टम की परतें खोलकर रख दीं. इस बड़े खुलासे में भारत से इंडियन एक्सप्रेस भी शामिल था. करीब 370 पत्रकारों की टीम ने 1.15 करोड़ गोपनीय दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की.

खुलासे ने सिस्टम की पारदर्शिता पर खड़े किए सवाल
ये सभी दस्तावेज पनामा की मशहूर लॉ फर्म मोसैक फोन्सेका से जुड़े हुए थे. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। जांच में सामने आया कि दुनिया भर के कई अमीर और प्रभावशाली लोगों ने टैक्स बचाने के लिए विदेशों में शेल कंपनियां बनाई थीं. इन कंपनियों का इस्तेमाल संपत्ति छिपाने और वित्तीय लेन-देन को गोपनीय रखने के लिए किया जाता था. इस खुलासे ने न सिर्फ कई बड़े नामों को कटघरे में खड़ा किया, बल्कि टैक्स चोरी और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर वैश्विक बहस भी तेज कर दी. इंडियन एक्सप्रेस की खबर प्रकाशित होते ही भारतीय सियासत में जोरदार खलबली मच गई थी. पनामा पेपर्स के इन खुलासों ने न सिर्फ आम लोगों को चौंकाया, बल्कि सिस्टम की पारदर्शिता पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए.

देशभर में कुल 426 मामले दर्ज किए गए
इन खुलासों के बाद देशभर में 426 मामले दर्ज किए गए और करीब 13,800 करोड़ रुपये की रकम टैक्स के दायरे में लाई गई. मामला इतना गंभीर था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया, ताकि पूरे प्रकरण की गहराई से पड़ताल हो सके. दरअसल, पनामा पेपर्स की जांच वैश्विक स्तर पर इतनी व्यापक और प्रभावशाली रही कि इसके असर से आइसलैंड और पाकिस्तान जैसे देशों में सरकारें तक गिर गईं. यह खुलासा दुनिया भर में सत्ता और धन के संबंधों पर एक बड़ा झटका साबित हुआ.

सरकार ने किया 14,636 करोड़ की टैक्सेबल धनराशि का खुलासा
पनामा पेपर्स का खुलासा करने के बाद इंडियन एक्सप्रेस ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठनों के साथ मिलकर दो और बड़ी पड़तालों पैराडाइज पेपर्स और पैंडोरा पेपर्स में अहम भूमिका निभाई. साल 2017 में पैराडाइज पेपर्स और 2021 में पैंडोरा पेपर्स की जांच सामने आई, जिनमें दुनियाभर के प्रभावशाली लोगों के वित्तीय लेन-देन पर सवाल उठे. इन खुलासों का असर अब आंकड़ों में भी दिखने लगा है. 23 मार्च को लोकसभा में सरकार ने बताया कि इन तीनों बड़ी जांचों के चलते अब तक 14,636 करोड़ रुपये की रकम टैक्स के दायरे में लाई जा चुकी है.

काला धन के कानून के तहत 167 केस
पैराडाइज पेपर्स ने दुनिया भर में फैली ऑफशोर वित्तीय गतिविधियों की परतें खोलकर रख दी थीं. इस जांच के तहत बरमूड़ा की मशहूर लॉ फर्म एप्पलबाय, सिंगापुर की एशियासिटी ट्रस्ट और 19 देशों की कंपनियों की रजिस्ट्रियों को खंगाला गया. जांच का दायरा इतना बड़ा था कि करीब 1.34 करोड़ कॉर्पोरेट रिकॉर्ड्स इसमें शामिल किए गए, जिससे वैश्विक वित्तीय नेटवर्क की जटिलता सामने आई. वहीं, पैंडोरा पेपर्स ने भी इसी तरह बड़े पैमाने पर खुलासे किए. इसमें 14 अंतरराष्ट्रीय कॉर्पोरेट सर्विस कंपनियों से जुड़े करीब 1.19 करोड़ लीक दस्तावेजों की जांच की गई. इस पड़ताल में पता चला कि लगभग 29,000 कंपनियां और ट्रस्ट बनाए गए थे, जिनका इस्तेमाल मुख्य रूप से टैक्स बचाने और संपत्ति छिपाने के लिए किया जा रहा था.

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