
चंडीगढ़: आम आदमी पार्टी पंजाब ने पर्यवेक्षकों की बैठक आयोजित की। इसमें गांवों, वार्डों और निर्वाचन क्षेत्रों में तैनात लगभग 1,000 पार्टी पर्यवेक्षकों ने भाग लिया। आप के सात सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद इस बैठक को आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री भगवंत मान और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने जमीनी स्तर पर संपर्क की समीक्षा की। इस दौरान पंजाब के सीएम भगवंत मान कहा कि राघव चड्ढा समेत सात सांसदों के दल-बदल से पार्टी की ताकत पर कोई असर नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि अगर सागर से कुछ बूंदें निकाल ली जाएं तो इससे सागर पर कोई असर नहीं पड़ता और पार्टी किसी भी व्यक्ति से कहीं बड़ी होती है।
आप को बताय मजबूत
पर्यवेक्षकों की वर्चुअल बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मान ने कहा कि यह संवाद एक नियमित संगठनात्मक प्रक्रिया है और इसके बारे में हालिया मीडिया में चल रही अटकलें निराधार हैं। उन्होंने सभी पर्यवेक्षकों को धन्यवाद देते हुए उन्हें पार्टी की रीढ़ और आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के पास देश में सबसे मजबूत संगठनात्मक ढांचों में से एक है, जहां नेता जमीनी स्तर पर जनता से निरंतर जुड़े रहते हैं। शासन संबंधी निर्णयों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार द्वारा लिया गया प्रत्येक निर्णय जनहितैषी रहा है और एक भी नीति जनहित के विरुद्ध नहीं गई है। ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि सरकार जो भी सेवाएं प्रदान कर पाई है, वह सर्वशक्तिमान ईश्वर की कृपा और गुरु साहब के आशीर्वाद से ही संभव हो पाई है।
सीएम माने ने कहा कि जागृत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक, 2026, जनता की भावनाओं का सम्मान करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
जनता से संपर्क साधने का आग्रह करते हुए मुख्यमंत्री मान ने कहा कि पर्यवेक्षकों को इन उपलब्धियों को जनता तक सक्रिय रूप से पहुंचाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वे सरकार और जनता के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी हैं।
मनीष सिसोदिया ने भी दिया गुरु मंत्र
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सिसोदिया ने कहा कि पार्टी का जमीनी ढांचा बहुत मजबूत है। उन्होंने बताया कि पंजाब भर में हर 15 गांवों या वार्डों के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि ये पर्यवेक्षक नियमित रूप से निवासियों से बातचीत करते हैं और जनता, पार्टी और सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करते हैं। समीक्षा प्रक्रिया के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि पर्यवेक्षकों के साथ बैठकें हर तीन से चार महीने में होती हैं, और आज की बैठक में पिछले चार महीनों में किए गए कार्यों की समीक्षा की गई।