केंद्र सरकार के कर्मचारी और पेंशनर्स, साथ ही इससे जुड़े अन्य लोग, 8वें वेतन आयोग पर लगातार हो रही अपडेट का इंतजार कर रहे हैं. नेशनल काउंसिलजॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी की 49वीं बैठक से मिली नई जानकारी में कर्मचारियों और पेंशन से जुड़े पांच बड़े मुद्दों पर ध्यान दिलाया गया है, जिन पर 8वें वेतन आयोग में विचार करने की सिफारिश की गई है.

कैबिनेट सचिव ने 11 मई को हुई चर्चा के दौरान ये सिफारिशें कीं. इनमें पेंशन भुगतान में बदलाव, वेतन में समानता और मैटरनिटी बेनिफिट्स की ज़रूरत पर जोर दिया गया है. ये सिफारिशें ऐसे समय में आई हैं जब 8वां वेतन आयोग जुलाई में और कर्मचारी यूनियनों और संगठनों के साथ चर्चा और बातचीत के अगले दौर की तैयारी कर रहा है. जिन मुद्दों पर ध्यान दिलाया गया, उनमें वेतन से जुड़ी शिकायतें, वेतन में बदलाव, भत्तों पर दोबारा विचार और कर्मचारियों के समग्र कल्याण जैसे मुद्दे शामिल थे.

8वें वेतन आयोग को भेजे गए पांच मुख्य मुद्दे

बातचीत के दौरान, NCJCM के कर्मचारी पक्ष ने लंबे समय से लंबित कई मुद्दों को उठाया. कैबिनेट सचिव ने सिफारिश की कि इन मुद्दों को 8वें वेतन आयोग को भेजा जाए या संबंधित विभागों द्वारा इनकी और जांच और विश्लेषण किया जाए.

NCJCM की पांच मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

  1. हर पांच साल में पेंशन में बदलाव: हर पांच साल में पेंशन बढ़ाई जाए और फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस को बढ़ाकर 3,000 रुपए प्रति माह किया जाए.
  2. ज्यादा फैमिली पेंशन: मृतक कर्मचारी या पेंशनर की नोशनल पे के 30 फीसदी तक फैमिली पेंशन कम नहीं की जानी चाहिए.
  3. फायरफाइटर्स के लिए वेतन में समानता: केंद्र सरकार के फायरफाइटर्स के वेतनमान को दिल्ली फायर सर्विस के बराबर लाया जाए.
  4. MACP के बाद वेतन तय करना: MACP का लाभ लेने के बाद प्रमोट होने वाले कर्मचारियों को FR22 के तहत वेतन तय करने का लाभ दिया जाए. यहां MACP का मतलब ‘मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन स्कीम’ है.
  5. मैटरनिटी बेनिफिट्स: महिला केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट, 1961 के प्रावधानों को लागू किया जाए.

ये मांगें अभी क्यों जरूरी हैं?

  1. कर्मचारी पक्ष ने 8वें वेतन आयोग और सरकार से मौजूदा पेंशनर्स के लिए पेंशन में बदलाव और सुधार, पेंशन के कम्यूटेड हिस्से की बहाली और पुरानी पेंशन योजना को फिर से शुरू करने पर भी दोबारा विचार करने का अनुरोध किया.
  2. 8वें वेतन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, आयोग के भुवनेश्वर में 67 जुलाई और कोलकाता में 910 जुलाई को कर्मचारी संगठनों और यूनियनों के साथ चर्चा करने की उम्मीद है. अगर जुलाई में होने वाली बैठकों में और भी यूनियनें और एसोसिएशन ये मांगें रखती हैं, तो उन्हें ज्यादा समर्थन मिल सकता है.
  3. 8वें वेतन आयोग ने अभी तक सैलरी बढ़ाने, फिटमेंट फैक्टर या इससे जुड़े दूसरे मामलों पर कोई फैसला नहीं लिया है. आने वाली चर्चा वाली बैठकें कर्मचारी यूनियनों को अपनी चिंताएं रखने के लिए एक जरूरी मंच देंगी.
  4. उम्मीद है कि जुलाई की बैठकें 8वें वेतन आयोग के लिए एक अहम पड़ाव साबित होंगी. ये बैठकें ऐसे समय में हो रही हैं जब आयोग के गठन को आठ महीने पूरे होने वाले हैं. सरकार को अपनी अंतिम सिफारिशें सौंपने में अभी लगभग 10 महीने और बाकी हैं.