Bhimrao Kamble Death Penalty: महाराष्ट्र को झकझोर कर रख देने वाले चर्चित नसरापुर दुष्कर्म और हत्याकांड में अदालत ने आज एक ऐतिहासिक और कड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने 3 साल की मासूम बच्ची के साथ दरिंदगी करने वाले मुख्य आरोपी भीमराव कांबले को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई है. इस संवेदनशील मामले के फैसले पर पूरे राज्य की नजरें टिकी हुई थीं. कोर्ट ने सरकारी पक्ष की इस दलील को पूरी तरह स्वीकार कर लिया कि यह जघन्य अपराध रेयरेस्ट ऑफ रेयर श्रेणी में आता है, जहां आरोपी को सिर्फ और सिर्फ मृत्युदंड मिलना चाहिए.

इस ऐतिहासिक फैसले के बाद मामले की कड़ियों को स्पष्ट करते हुए सरकारी वकील अजय मिसार ने बताया कि पूरे केस में कोई भी प्रत्यक्षदर्शी मौजूद नहीं था. इसके बावजूद, पुलिस और अभियोजन पक्ष ने हार नहीं मानी और वैज्ञानिक व तकनीकी साक्ष्यों का ऐसा अचूक जाल बुना कि आरोपी बच नहीं सका. मामले को अंजाम तक पहुंचाने में इलाके के सीसीटीवी फुटेज, पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट, आरोपी की डीएनए रिपोर्ट और अन्य महत्वपूर्ण फोरेंसिक साक्ष्य सबसे बड़े हथियार बने.

कत्ल को हादसा बताने की कोशिश नाकाम, क्रूरता की सारी हदें पार

आरोपी भीमराव कांबले के खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म और हत्या जैसी बेहद संगीन और गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज था. पुलिस कस्टडी और जांच के दौरान शातिर आरोपी ने बारबार दावा करके बच्ची की मौत को एक महज ‘दुर्घटना’ या ‘हादसा’ साबित करने की नाकाम कोशिश की थी. लेकिन फोरेंसिक एक्सपर्ट्स और डॉक्टरों की टीम ने अपनी वैज्ञानिक रिपोर्ट से उसके झूठ के परखच्चे उड़ा दिए.

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सरकारी पक्ष ने कोर्ट के सामने साबित किया कि आरोपी ने मासूम बच्ची के साथ अत्यंत क्रूरता और बर्बरतापूर्वक दुष्कर्म किया था. पीड़िता के नाजुक शरीर पर गंभीर चोटों के दर्जनों निशान मिले थे, जो आरोपी की हैवानियत को बयां कर रहे थे. डीएनए मैचिंग और घटनास्थल से मिले भौतिक साक्ष्यों ने आरोपी के गुनाह को कोर्ट के सामने संदेह से परे साबित कर दिया.

भारी जनाक्रोश के बीच पुलिस ने 15 दिन में तैयार की थी 1200 पन्नों की चार्जशीट

इस वीभत्स घटना के बाद पूरे नसरापुर और पुणे ग्रामीण इलाके में भारी जनाक्रोश फैल गया था, जिसे देखते हुए पुणे ग्रामीण पुलिस ने इस केस को सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा. पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने दिनरात एक करके महज 15 दिनों के भीतर इस केस की मुकम्मल जांच पूरी की थी और अदालत में लगभग 1200 पन्नों का एक बेहद मजबूत और विस्तृत आरोपपत्र दाखिल किया था. नसरापुर क्षेत्र के विभिन्न सीसीटीवी कैमरों के विजुअल्स, घटनास्थल का बारीकी से किया गया पंचनामा, गवाहों की परिस्थितिजन्य कड़ियाँ और वैज्ञानिक रिपोर्ट्स के दम पर कोर्ट में यह कानूनी जंग जीती गई.

पीड़ित परिवार को मिला न्याय, समाज में जाएगा कड़ा संदेश

आज जैसे ही अदालत के जज ने आरोपी भीमराव कांबले को फांसी के फंदे पर लटकाने का हुक्म सुनाया, कोर्ट रूम में मौजूद पीड़ित परिवार की आंखें भर आईं. परिवार ने इस ऐतिहासिक फैसले पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी बच्ची की आत्मा को आज जाकर न्याय मिला है. वहीं, सरकारी वकील और पुलिस प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय समाज में जघन्य और विकृत मानसिकता वाले अपराधियों के खिलाफ एक बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश देने वाला साबित होगा.