News Just Abhi Lucknow News: उत्तर प्रदेश समेत पूरे उत्तर भारत में पड़ रही भीषण गर्मी ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है. तापमान लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है, लेकिन राहत देने वाली बिजली व्यवस्था खुद संकट में दिखाई दे रही है. प्रदेश के कई जिलों में घंटों बिजली कटौती हो रही है, जिससे लोगों को पानी की किल्लत का भी सामना करना पड़ रहा है. हालात ऐसे हैं कि गर्मी, बिजली संकट और जल समस्या ने आम जनता की परेशानियों को कई गुना बढ़ा दिया है. राजधानी लखनऊ, बरेली और मुरादाबाद समेत कई शहरों में बिजली कटौती के विरोध में लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है. लोग सवाल पूछ रहे हैं कि जब सरकार 24 घंटे बिजली देने का दावा करती है तो फिर बारबार कटौती क्यों हो रही है?

लखनऊ में बिजली संकट पर फूटा लोगों का गुस्सा
लखनऊ के राजाजीपुरम स्थित अप्ट्रान विद्युत उपकेंद्र पर सोमवार को लोगों ने जमकर हंगामा किया. टिकैत राय तालाब इलाके में घंटों बिजली न आने से नाराज लोग बड़ी संख्या में उपकेंद्र पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया. हालात बिगड़ते देख बिजली विभाग के कर्मचारियों ने खुद को कार्यालय के भीतर बंद कर लिया. सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर स्थिति को नियंत्रित किया.
विभाग की ओर से दो घंटे के भीतर समस्या दूर करने का आश्वासन दिए जाने के बाद मामला शांत हुआ. स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कई दिनों से बिजली आपूर्ति बाधित है. बिजली न होने के कारण पानी की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है और लोगों का दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है.
बरेली और मुरादाबाद में भी प्रदर्शन
बिजली कटौती को लेकर प्रदेश के अन्य जिलों में भी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. बरेली में लोगों ने मिट्टी के घड़े लेकर प्रदर्शन किया और बिजली विभाग के खिलाफ नारेबाजी की. वहीं मुरादाबाद में भी नागरिकों ने बिजली संकट के विरोध में प्रदर्शन करते हुए विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिकायत करने पर उन्हें केवल तकनीकी खराबी, अधिक लोड या सप्लाई बाधित होने की जानकारी दी जाती है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जाता.
बिजली की कमी नहीं, फिर क्यों हो रही कटौती?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब उत्तर प्रदेश में बिजली की उपलब्धता पर्याप्त है तो फिर कटौती क्यों हो रही है? आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में बिजली की पीक डिमांड 33,849 मेगावाट है, जबकि उपलब्धता 38,240 मेगावाट तक पहुंच रही है. यानी मांग से लगभग 13 प्रतिशत अधिक बिजली उपलब्ध है. इसके बावजूद प्रदेश के कई इलाकों में उपभोक्ताओं को घंटों बिजली कटौती झेलनी पड़ रही है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समस्या बिजली उत्पादन में नहीं, बल्कि वितरण और बुनियादी ढांचे में है.
ओवरलोडेड सबस्टेशन बने बड़ी परेशानी
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड और उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में करीब 3.7 करोड़ बिजली उपभोक्ता हैं. इनका कुल स्वीकृत लोड 8.57 करोड़ किलोवाट है. इसके मुकाबले प्रदेश के सबस्टेशनों की कुल क्षमता मात्र 6.25 करोड़ किलोवाट है. यानी बिजली वितरण प्रणाली अपनी क्षमता से करीब 2.32 करोड़ किलोवाट अधिक भार झेल रही है. ऐसे में ओवरलोडिंग के कारण ट्रिपिंग, ब्रेकडाउन और अघोषित कटौती की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं.
जर्जर नेटवर्क भी संकट की बड़ी वजह
प्रदेश में लगभग 18 लाख ट्रांसफॉर्मर कार्यरत हैं. हालांकि पिछले कुछ वर्षों में ट्रांसफॉर्मर फुंकने की घटनाओं में कमी दर्ज की गई है. वर्ष 202223 में जहां 7,322 ट्रांसफॉर्मर जले थे, वहीं 202526 में यह संख्या घटकर 2,613 रह गई है. इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर बिजली आपूर्ति की समस्याएं बरकरार हैं. बिजली विभाग के अनुसार ओवरलोडिंग, असंतुलित लोड, लाइन फॉल्ट और रखरखाव की कमी स्थानीय बिजली संकट के प्रमुख कारण हैं.
वितरण व्यवस्था में 20 फीसदी तक नुकसान
विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रदेश की बिजली व्यवस्था को सबसे ज्यादा नुकसान वितरण प्रणाली से हो रहा है. आंकड़ों के अनुसार राज्य में औसतन 19.54 प्रतिशत बिजली उपभोक्ताओं तक पहुंचने से पहले ही नष्ट हो जाती है. इस नुकसान के पीछे बिजली चोरी, बिलों का भुगतान न होना और ट्रांसमिशन के दौरान तकनीकी हानि प्रमुख कारण हैं. क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो पूर्वांचल में सबसे अधिक 21.4 प्रतिशत, मध्यांचल में 19.2 प्रतिशत, दक्षिणांचल में 18.8 प्रतिशत और पश्चिमांचल में 15.6 प्रतिशत बिजली नुकसान दर्ज किया गया है.
विशेषज्ञ ने बताई ब्रेकडाउन की असली वजह
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि कई स्थानों पर कम क्षमता और घटिया गुणवत्ता वाले एबीसी कंडक्टर लगाए गए हैं. गर्मी के दौरान इन कंडक्टरों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे शॉर्ट सर्किट और ट्रांसफॉर्मर फुंकने जैसी घटनाएं बढ़ जाती हैं. उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में होने वाले करीब 75 प्रतिशत ब्रेकडाउन सीधे तौर पर बिजली कंडक्टरों की खराब गुणवत्ता और तकनीकी खामियों से जुड़े हुए हैं. इसके अलावा एक सबस्टेशन पर सीमित संख्या में तकनीकी टीमों की उपलब्धता भी समस्या समाधान में देरी का कारण बनती है.
सुधार के बिना नहीं मिलेगा समाधान
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सबस्टेशनों की क्षमता नहीं बढ़ाई जाती, जर्जर नेटवर्क को आधुनिक नहीं बनाया जाता और वितरण प्रणाली में सुधार नहीं होता, तब तक बिजली संकट पूरी तरह खत्म नहीं होगा. भीषण गर्मी के बीच प्रदेश की जनता फिलहाल बिजली और पानी दोनों की किल्लत झेल रही है. ऐसे में सरकार और बिजली विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों को निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की है.