News Just Abhi Lucknow News: लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रारंभिक जांच और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, जिस इमारत में आग लगी, उसके मालिक वीरेंद्र शुक्ला, सुरेंद्र शुक्ला और धीरेंद्र शुक्ला हैं, जबकि इसकी देखरेख अखिल शुक्ला करते थे. आरोप है कि बिल्डिंग में सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी की गई थी. बिल्डिंग की ऊपरी मंजिल पर एनिमेशन सेंटर, नीचे पेट शॉप और गोदाम संचालित था. हादसे में 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 5 घायल हैं चौंकाने वाली बात यह भी है कि इसी बिल्डिंग में सुबह आग लगने की एक छोटी घटना पहले भी हो चुकी थी, जबकि पास की दूसरी बिल्डिंग में एक वर्ष पूर्व भी आग लगने का मामला सामने आया था. फिर भी जिम्मेदार खामोश बैठे रहे.

कितने फ्लोर की है ये बिल्डिंग
ये बिल्डिंग तीन फ्लोर की है. पहले फ्लोर पर पेट शॉप है. दूसरे फ्लोर पर ग्राफिक एनिमेशन का सेंटर है, जहां ग्राफिक एनिमेशन का काम होता है. साथसाथ समर कैंप के तहत कुछ लोगों को सिखाया भी जाता है. टॉप फ्लोर पर लाइब्रेरी है.
आग पहले सेकंड फ्लोर पर लगी, फिर तीनों फ्लोर को अपनी चपेट में ले लिया.
आग लगते ही लॉक हो गया गेट
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के अनुसार, जिस बिल्डिंग हेड हॉपर 3D आर्ट स्टूडियो में आग लगी, उसका मुख्य प्रवेश द्वार थंब इम्प्रेशन सिस्टम से संचालित होता था. आग लगने के बाद सिस्टम के प्रभावित होने से गेट ऑटोमैटिक लॉक हो गया, जिससे अंदर मौजूद लोग बाहर नहीं निकल सके. बताया जा रहा है कि आग मुख्य प्रवेश द्वार के पास लगी थी और बाहर निकलने का रास्ता भी वहीं से था, जिसके कारण कई लोग भीतर फंस गए.
इमरजेंसी एग्जिट और फायर सिस्टम का अभाव
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बिल्डिंग में आपातकालीन निकास द्वार नहीं था. पूरी इमारत में आनेजाने के लिए केवल सीढ़ियों का एक ही रास्ता मौजूद था. इसके अलावा फायर सेफ्टी सिस्टम और अन्य सुरक्षा इंतजामों की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इमरजेंसी एग्जिट और अग्निशमन उपकरण मौजूद होते तो जानमाल का नुकसान काफी कम हो सकता था.
जानकारी के अनुसार, जिस जमीन पर यह बिल्डिंग बनी है, वह वीरेंद्र शुक्ला के नाम बताई जा रही है. वहीं भवन का नक्शा सुरेंद्र शुक्ला और धीरेंद्र शुक्ला के नाम पर स्वीकृत बताया जा रहा है. तीनों आपस में सगे भाई हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार बिल्डिंग की देखरेख अखिल शुक्ला द्वारा की जाती थी. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। वीरेंद्र शुक्ला रामेश्वरम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के मालिक हैं.
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बताया जा रहा कि वर्ष 2014 में आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत मानचित्र को बाद में व्यावसायिक उपयोग के लिए मंजूरी दी गई थी. लंबे समय से यहां पेट शॉप, लाइब्रेरी और एनिमेशन सेंटर का संचालन किया जा रहा था. अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर एलडीए ने मानकों के विपरीत भवन के उपयोग को कैसे अनुमति दी?
एनिमेशन सेंटर में लगी आग, जान बचाने के लिए कूदे लोग
बिल्डिंग के ऊपरी हिस्से में हेड हॉपर 3डी आर्ट स्टूडियो संचालित होता था, जबकि नीचे पेट शॉप थी. आग लगने के दौरान कई लोगों ने जान बचाने के लिए छज्जों और ऊंचाई से छलांग लगा दी. पेट शॉप में मौजूद जानवरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. कई घायलों को ट्रॉमा सेंटर भेजा गया, जबकि रेस्क्यू टीम गीले कंबल और स्ट्रेचर लेकर भीतर फंसे लोगों को बाहर निकालने में जुटी रही.
मुकदमे की तैयारी, सीएम ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
घटना का संज्ञान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया है. मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए टीम गठित की गई है. अलीगंज थाने में तहरीर दी जा चुकी है, जिसके आधार पर मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है. तहरीर में वीरेंद्र शुक्ला, सुरेंद्र शुक्ला और धीरेंद्र शुक्ला को नामजद किया गया है.
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा सकता है. साथ ही अग्निकांड वाली इमारत पर बुलडोजर कार्रवाई की संभावना भी जताई जा रही है. फिलहाल पूरे मामले की जांच उच्चस्तरीय अधिकारियों की निगरानी में जारी है.