उत्तर प्रदेश में बुजुर्गों की संख्या भले ही कुल आबादी का एक छोटा हिस्सा हो, लेकिन उनकी समस्याएं लगातार बड़ी होती जा रही हैं. CSDS के मुताबिक, यूपी की करीब 8 फीसदी आबादी बुजुर्गों की है. ऐसे में राज्य में लाखों वरिष्ठ नागरिक ऐसे हैं, जिनके सामने उम्र बढ़ने के साथ आर्थिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, अकेलेपन और परिवार से जुड़ी परेशानियां खड़ी हो रही हैं. इसी बीच एक रिपोर्ट ने बुजुर्गों की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता बढ़ाई है.

रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में शामिल करीब हर तीन में से एक बुजुर्ग के पास अपनी कोई आय नहीं थी. यह सर्वे 10 राज्यों में 5,000 से ज्यादा बुजुर्गों और करीब 1,300 देखभाल करने वालों के बीच किया गया था. रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 40 फीसदी बुजुर्ग अशिक्षित थे और 7 फीसदी ने खुद को किसी न किसी तरह के दुर्व्यवहार का शिकार बताया. यह स्थिति इसलिए भी अहम है क्योंकि बुजुर्गों की जरूरत केवल पेंशन या आर्थिक मदद तक सीमित नहीं होती.

सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों का इस्तेमाल

उम्र बढ़ने के साथ उन्हें इलाज, दवाइयों, सुरक्षित रहने की जगह, परिवार का सहारा और कई बार कानूनी मदद की भी जरूरत पड़ती है. हेल्पएज इंडिया की रिपोर्ट में सामने आया कि पिछले एक साल में 79 फीसदी बुजुर्ग सरकारी अस्पताल, क्लीनिक या प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गए. 80 साल से ज्यादा उम्र के जिन बुजुर्गों ने सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों का इस्तेमाल किया, उनमें करीब आधे के पास अपनी कोई व्यक्तिगत आय नहीं थी.

  • यूपी की करीब 8 फीसदी आबादी बुजुर्गों की है.
  • सर्वे में हर तीन में से एक बुजुर्ग के पास आय का स्रोत नहीं था.
  • करीब 40 फीसदी बुजुर्ग अशिक्षित पाए गए.
  • 7 फीसदी बुजुर्गों ने दुर्व्यवहार का अनुभव बताया.
  • 79 फीसदी बुजुर्ग पिछले एक साल में सरकारी स्वास्थ्य केंद्र गए.

आर्थिक रूप से कमजोर क्यों हैं बुजुर्ग?

बुढ़ापे में सबसे बड़ी चिंता आर्थिक सुरक्षा की होती है. नौकरी या नियमित कमाई खत्म होने के बाद बुजुर्गों की निर्भरता परिवार या सरकारी योजनाओं पर बढ़ जाती है. सर्वे में एक तिहाई बुजुर्गों ने पिछले एक साल में कोई आय नहीं होने की बात कही. महिलाओं की स्थिति और कमजोर दिखाई दी. रिपोर्ट के अनुसार, 38 फीसदी बुजुर्ग महिलाओं के पास आय का स्रोत नहीं था, जबकि पुरुषों में यह आंकड़ा 27 फीसदी था.

परिवार से जुड़ी परेशानी भी बड़ी चिंता

इसका असर केवल रोजमर्रा के खर्च पर नहीं पड़ता. पैसे की कमी होने पर दवाइयों, इलाज और दूसरी जरूरी चीजों के लिए भी बुजुर्गों को दूसरों पर निर्भर रहना पड़ सकता है. यही वजह है कि बुजुर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा और नियमित आय का इंतजाम बेहद जरूरी माना जाता है.

बुजुर्गों के लिए आर्थिक समस्या के साथ परिवार का व्यवहार भी बड़ा मुद्दा है. सर्वे में 7 फीसदी बुजुर्गों ने दुर्व्यवहार की बात कही. जिन मामलों में दुर्व्यवहार की जानकारी सामने आई, उनमें बेटे 42 फीसदी मामलों में और बहुएं 28 फीसदी मामलों में मुख्य आरोपी बताए गए.

योगी सरकार की नई पहल क्या है?

बुजुर्गों के अधिकार और सम्मान को लेकर यूपी सरकार नई व्यवस्था पर काम कर रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार बुजुर्गों की समस्याओं में मदद के लिए टोलफ्री नंबर शुरू करने और मौजूदा नियमों में बदलाव की तैयारी कर रही है. इसका मकसद वरिष्ठ नागरिकों की शिकायतों को सुनना और उनके अधिकारों की सुरक्षा को मजबूत करना है.

हालांकि, बुजुर्गों के लिए केंद्र की Elderline 14567 पहले से मौजूद है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। यह टोलफ्री हेल्पलाइन स्वास्थ्य, पेंशन, कानूनी मदद, सरकारी योजनाओं, भरणपोषण और दुर्व्यवहार जैसी समस्याओं में जानकारी और सहायता देती है. यूपी में भी यह सेवा पहले से संचालित है. इसलिए यूपी सरकार की प्रस्तावित नई व्यवस्था और मौजूदा Elderline के बीच क्या अंतर होगा, यह उसके आधिकारिक विवरण के बाद ही साफ होगा.

शिकायत पर 30 दिन में सुनवाई

सर्वे में घर पर रहने वाले बुजुर्गों की हिस्सेदारी 7.7 प्रतिशत दर्ज की गई है. इसके अलावा, 56 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों की कुल हिस्सेदारी 19.2 प्रतिशत है.वित्त मंत्री ने बताया कि वरिष्ठ नागरिकों को इस व्यवस्था का लाभ आसानी से मिल सके, इसके लिए बेदखली की प्रक्रिया को स्पष्ट और समयबद्ध बनाया गया है.

नए प्रावधानों के तहत ऐसे मामलों में जिला मजिस्ट्रेट के पास शिकायत की जा सकेगी और शिकायतों की सुनवाई 30 दिन के भीतर पूरी करनी होगी. जिला मजिस्ट्रेट को इन मामलों की मासिक रिपोर्ट भी सरकार को देनी होगी. सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानजनक जीवन, उनके अधिकारों की सुरक्षा और अत्याचार या दुर्व्यवहार से बचाव सुनिश्चित करना है, साथ ही परिवार के सदस्यों को अपने बुजुर्ग मातापिता की देखभाल और सम्मान के प्रति जिम्मेदार बनाना भी है.

स्वास्थ्य भी बड़ी चुनौती

बुजुर्गों की बढ़ती उम्र के साथ स्वास्थ्य खर्च भी बढ़ता है. हेल्पएज इंडिया के सर्वे में 79 फीसदी बुजुर्गों के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में जाने की बात सामने आई. वहीं सिर्फ 31 फीसदी बुजुर्गों ने Ayushman Bharat/PMJAY के तहत हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज होने की जानकारी दी.

केवल 3 फीसदी के पास कमर्शियल हेल्थ इंश्योरेंस था. रिपोर्ट के मुताबिक, हेल्थ इंश्योरेंस नहीं होने की प्रमुख वजहों में जानकारी की कमी और इसे वहन करने में परेशानी शामिल थी. इसका मतलब है कि बुजुर्गों के लिए सिर्फ अस्पताल उपलब्ध कराना काफी नहीं है, बल्कि उन्हें सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी और उनका लाभ लेने में मदद भी जरूरी है.