रोजमर्रा की जरूरी चीजों, घरेलू सामान, ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और शराब बनाने वाली बड़ी कंपनियों ने वित्त वर्ष 2026 में अपना एक्सपोर्ट बढ़ाया. इससे फॉरेन करेंसी की कमाई बढ़ी और भारी इंपोर्ट बिल के बावजूद वे कुल मिलाकर नेट फॉरेक्स पॉजिटिव हो गईं. ये बात देश की 20 बड़ी पब्लिक लिस्टेड कंपनियों पर की गई एक स्टडी से पता चली है. इन कंपनियों की कुल एक्सपोर्ट फॉरेक्स कमाई पिछले फाइनेंशियल ईयर में 29 फीसदी बढ़ी, जो पिछले चार सालों में सबसे ज्यादा थी. वित्त वर्ष 2022 में ये इजाफा 55 फीसदी देखने को मिला था. ये आंकड़ा वित्त वर्ष 2021 के कम बेस पर था, जब महामारी की वजह से कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ था.

कुल फॉरेक्स अर्निंग्स 29 फीसदी बढ़ी

वित्त वर्ष 2026 में यह ग्रोथ ऐसे समय में हुई जब कंपनियों को US टैरिफ और रुपए की कीमत में भारी गिरावट जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जिससे इंपोर्ट महंगा हो गया. फिर भी, उन्होंने लोकलाइजेशन बढ़ाकर इन दबावों का सामना किया. ज्यादा एक्सपोर्ट की वजह से वित्त वर्ष 2026 में कंपनियों की कुल फॉरेक्स अर्निंग्स 29 फीसदी बढ़ी, जो 4 सालों में सबसे तेज थी. ईटी की रिपोर्ट के अनुसार ITC, मारुति सुज़ुकी, हुंडई मोटर इंडिया, LG इलेक्ट्रॉनिक्स, हीरो मोटोकॉर्प, डाबर, एशियन पेंट्स, पिडिलाइट इंडस्ट्रीज, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, वोल्टास और यूनाइटेड स्पिरिट्स जैसी कंपनियों की एक्सपोर्ट से कुल फॉरेक्स कमाई वित्त वर्ष 2026 में 1,08,269 करोड़ रुपए से ज्यादा रही. रॉ मटीरियल, कंपोनेंट्स, स्पेयर पार्ट्स और कैपिटल गुड्स के इंपोर्ट पर उनका कुल फॉरेक्स खर्च 1,04,361 करोड़ रुपए रहा, जिसमें 17 फीसदी की बढ़ोतरी हुई.

फॉरेक्स कमाई में कितना इजाफा

कंपनी का नाम वित्त वर्ष 2025 में कमाई वित्त वर्ष 2026 में कमाई
मारुति सुजुकी 14 19
आईटीसी 10 10
मैरिको 9 11
गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स 3 4
हुंडई मोटर्स 21 26
हीरो मोटोकॉर्प 5 7
बजाज ऑटो 32 34
ब्लू स्टार 5 7

सामने आई कई चुनौतियां

ईटी की ओर से की गई स्टडी के अनुसार सालाना रिपोर्ट और रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज की कानूनी फाइलिंग से मिले डाटा से पता चला है कि मारुति सुज़ुकी, मैरिको, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, हुंडई, हीरो मोटोकॉर्प, बजाज ऑटो और ब्लू स्टार ने वित्त वर्ष 2026 में कुल रेवेन्यू में एक्सपोर्ट का योगदान 15 फीसदी अंक तक बढ़ाया. LG इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के चीफ अकाउंटिंग ऑफिसर अतुल खन्ना ने कहा कि ऐसे समय में जब रुपए की कीमत घटने और इनपुट कॉस्ट बढ़ने जैसी चुनौतियां हैं, हम नए इलाकों और प्रोडक्ट कैटेगरी को जोड़कर अपना एक्सपोर्ट बढ़ाना जारी रखेंगे, जिससे मार्जिन को भी फायदा होगा. उन्होंने कहा कि हर साल लोकलाइजेशन 12 फीसदी अंक बढ़ेगा. ITC ने अपनी ताजा सालाना रिपोर्ट में कहा है कि वह फॉरेक्स कमाई को प्राथमिकता देती है. उसके सभी बिजनेस के लिए जरूरी है कि वे विदेशी बाजारों से जुड़ें, ताकि इंटरनेशनल कॉम्पिटिटिवनेस को परखा और दिखाया जा सके और मुनाफे वाली ग्रोथ के मौकों को तलाशा जा सके.

रैडिको की कितनी बढ़ी कमाई

शराब बनाने वाली कंपनी रैडिको खेतान के मैनेजिंग डायरेक्टर अभिषेक खेतान ने कहा कि कंपनी अभी 100 से ज्यादा देशों में एक्सपोर्ट करती है. वॉल्यूम के हिसाब से यह कुल बिक्री का 56 फीसदी है, लेकिन वैल्यू के हिसाब से इसकी हिस्सेदारी ज्यादा है. उन्होंने कहा कि हमारा हमेशा से यह मानना ​​रहा है कि सिर्फ सामान बेचने के बजाय ब्रांड बनाना ज्यादा ज़रूरी है, चाहे वह ‘वैल्यू फॉर मनी’ हो, ‘प्रेसटिज’ हो या फिर ‘लग्जरी कैटेगरी’ हो.

उन्होंने कहा कि हम न सिर्फ विदेशों में रहने वाले भारतीयों की जरूरतों को पूरा कर रहे हैं, बल्कि आम ग्राहकों तक भी पहुंच रहे हैं. पिछले फाइनेंशियल ईयर में रैडिको खेतान की एक्सपोर्ट से होने वाली फॉरेक्स कमाई 25 फीसदी बढ़कर 327 करोड़ रुपए हो गई. हुंडई इंडिया ने कहा कि वित्त वर्ष 2026 में कॉस्ट के मामले में कॉम्पिटिटिव बने रहने के लिए ‘लोकलाइजेशन’ एक अहम वजह थी. कंपनी ने ज्यादा कीमत वाले पार्ट्स को देश में ही बनाने पर ध्यान दिया, जिनमें AGM बैटरी, फ्रंट कैमरे, फ्यूल डिलीवरी पाइप और स्टैंडर्ड फास्टनर शामिल हैं.

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