भारत का प्राइमरी मार्केट सितंबर में ज़बरदस्त हलचल के लिए तैयार है. कंपनियां 20,00025,000 करोड़ रुपए के IPO लाने की तैयारी कर रही हैं. इसका कारण भी है. ये कंपनियां मंज़ूरी की डेडलाइन खत्म होने से पहले ही अपने IPO लाना चाहती हैं. शेयर बिक्री के दौरान बाजार में बहुत ज्यादा उतारचढ़ाव से बचने के लिए यह समयसीमा इस महीने के आखिर तक बढ़ाई गई थी. आइए आपको भी बताते हैं कि आखिर कौन कौन सी प्रमुख कंपनियां कितने रुपए का आईपीओ लेकर आ सकती हैं.

कतार में 25 कंपनियां

बैंकरों के अनुसार, सितंबर के लिए लगभग 25 कंपनियां कतार में हैं. कई कंपनियां सेबी से मिली मंजूरी की समयसीमा खत्म होने से पहले ही अपनी पेशकश पूरी करना चाहती हैं. इस कतार में बड़ी और मंझोली, दोनों तरह की कंपनियां शामिल हैं और कई IPO से 500 करोड़ रुपए से ज्यादा रकम जुटने की उम्मीद है. JM फाइनेंशियल में इन्वेस्टमेंट बैंकिंग की MD और CEO सोनिया दासगुप्ता के अनुसार, साल की पहली छमाही में सावधानी भरा रुख रहने के बाद, सितंबर की यह कतार कंपनियों के बीच बेहतर होते भरोसे को दिखाती है.

सबसे बड़े पेंडिंग IPO जिन्हें 30 सितंबर तक लॉन्च होना है

IPO सेबी की मंजूरी अनुमानित इश्यू साइज
क्रेडिला फाइनेंशियल सर्विसेज मई 2025 5,000
डॉर्फकेटल केमिकल्स इंडिया मई 2025 5,000
कंटीन्यूम ग्रीन एनर्जी अप्रैल 2025 3,650
हीरो फिनकॉर्प मई 2025 3,600
प्रेस्टीज हॉस्पिटैलिटी वेंचर्स अगस्त 2025 2,700
इनोवेटिव्यू इंडिया अगस्त 2025 2,000
इमैजिन मार्केटिंग अगस्त 2025 1,500
मौरी टेक अगस्त 2025 1,500
हीरो मोटर्स सितंबर 2025 1,200
रवि इंफ्राबिल्ड प्रोजेक्ट्स अगस्त 2025 1,100

स्रोत: Primedatabase.com

मार्केट से मिले बेहतर सेंटीमेंट

दासगुप्ता ने कहा कि सितंबर में IPO की पाइपलाइन भारत के कैपिटल मार्केट की मजबूती को दिखाती है. साथ ही, यह इश्यू लाने वाली कंपनियों के बीच उस दबी हुई भावना के बाहर आने का संकेत भी है, जो साल की पहली छमाही में ज़्यादा सावधानी भरे माहौल के कारण बनी हुई थी. उन्होंने कहा कि बाजार के सुस्त ट्रेंड के उलट, अब कंपनियां बेहतर मार्केट सेंटीमेंट, हाल की मजबूत लिस्टिंग और SEBI की मंजूरी की जल्द खत्म होने वाली समयसीमा का फायदा उठाने की कोशिश कर रही हैं.

किया गया था नियमों में बदलाव

अप्रैल में, SEBI ने उन कंपनियों को एक बार के लिए समयसीमा बढ़ाने की सुविधा दी थी जिनके IPO की मंजूरी 1 अप्रैल से 30 सितंबर, 2026 के बीच खत्म होने वाली थी. उन्हें 30 सितंबर तक मंजूरी का इस्तेमाल करने की इजाजत दी गई थी. आमतौर पर, कंपनियों को SEBI का ऑब्जर्वेशन लेटर मिलने के 1218 महीनों के भीतर अपना पब्लिक इश्यू लॉन्च करना होता है, जिससे उन्हें इश्यू के साथ आगे बढ़ने की इजाजत मिलती है.

रेगुलेटर ने इन मंजूरियों की वैधता बढ़ा दी, जिसका कारण जियोपॉलिटिकल तनाव और बाजार में ज्यादा उतारचढ़ाव को बताया गया, जिनकी वजह से फंड जुटाने की कई योजनाएं टल गई थीं. प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों के मुताबिक, अभी जिन 161 कंपनियों के पास IPO की वैध मंजूरी है, उनमें से 35 कंपनियों की मंजूरी 30 सितंबर, 2026 को खत्म होने वाली है. अगर तय समयसीमा तक इश्यू पूरे नहीं होते हैं, तो कंपनियों को फिर से रेगुलेटरी मंजूरी लेने का जोखिम उठाना पड़ सकता है.

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