पेमेंट प्लेटफॉर्म यूपीआई के जरिए अगस्त में 29.8 लाख करोड़ रुपए के ट्रांजेक्शन हुए, जो रिकॉर्ड स्तर के करीब है. भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम की ओर से जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई. यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस के जरिए ट्रांजेक्शन का मूल्य मई और जुलाई 2026 में रिकॉर्ड 29.9 लाख करोड़ रुपए रहा था. मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में यूपीआई ट्रांजेक्शन की संख्या रिकॉर्ड 2,451 करोड़ पर पहुंच गई, जो पिछले महीने के 2,366 करोड़ से काफी अधिक है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। इस साल जून में ट्रांजेक्शन की संख्या 2,272 करोड़ और मई में 2,320 करोड़ रही थी. अगस्त में लेनदेन का मूल्य 29.82 लाख करोड़ रुपए रहा, जो एक साल पहले इसी महीने के 24.85 लाख करोड़ रुपए से 20 प्रतिशत अधिक है.

सालाना 22 फीसदी का इजाफा

एनपीसीआई के आंकड़ों के अनुसार, इसी अवधि में यूपीआई लेनदेन की संख्या सालाना आधार पर 22 प्रतिशत बढ़कर अगस्त में 2,451 करोड़ हो गई, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह 1,963 करोड़ थी. भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय बैंक संघ की पहल एनपीसीआई भारत में खुदरा भुगतान एवं निपटान प्रणालियों के संचालन के लिए एक शीर्ष संगठन है. यह यूपीआई का संचालन करता है, जिसका इस्तेमाल लोगों के बीच या खरीदारी के दौरान व्यापारियों के पास वास्तविक समय में भुगतान के लिए किया जाता है.

रक्षाबंधन का मिला फायदा

कैशफ्री पेमेंट्स के कोफाउंडर रिजू दत्ता ने कहा कि अगस्त में लेनदेन की संख्या में वृद्धि को रक्षाबंधन जैसे त्योहारों से भी बढ़ावा मिला. इससे रोजमर्रा के व्यक्तिसेव्यक्ति हस्तांतरण और छोटी राशि के उपहारों में स्वाभाविक रूप से तेजी आई. उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीनों में लेनदेन की संख्या बढ़ने के साथ कुल लेनदेन मूल्य में लगातार मजबूती यूपीआई प्रणाली की बढ़ती पहुंच एवं व्यापक उपयोग को दर्शाती है.

विदेशों में यूपीआई ट्रांजेक्शन

विदेशों में मौजूदगी की बात करें तो यूपीआई अब 11 देशों में स्वीकार किया जाता है और उज्बेकिस्तान इसमें शामिल होने वाला सबसे नया देश है. अन्य देशों में सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका, कंबोडिया और यूनान शामिल हैं, जहां यूपीआई स्वीकार किया जाता है. यूपीआई की शुरुआत 25 अगस्त, 2016 को हुई और तब से इसने भारत के डिजिटल भुगतान परिदृश्य को बदल दिया है. इसका लेनदेन मूल्य वित्त वर्ष 201617 के 0.07 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 202526 में करीब 314 लाख करोड़ रुपए हो गया, यानी एक दशक में इसमें 4,000 गुना से अधिक की वृद्धि हुई है.