नोएडा और ग्रेटर नोएडा के रियल एस्टेट सेक्टर से दो बड़ी खबरें सामने आई हैं. एक ओर घर खरीदारों ने अपनी एकजुटता से एक हारी हुई बाजी जीत ली है, तो दूसरी तरफ सरकारी एजेंसी अपनी योजना को भुनाने में नाकाम रही है. लंबे समय से संघर्ष कर रहे बायर्स के लिए ये जीत किसी संजीवनी से कम नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट में बायर्स की ऐतिहासिक जीत
नोएडा के सेक्टर100 व 110 में स्थित लोटस बुलेवर्ड व लोटस पनाश के बायर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने एक शानदार मिसाल पेश की है. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। पिछले करीब डेढ़ साल से नोएडा अथॉरिटी के खिलाफ चल रही कानूनी लड़ाई में अंततः बायर्स की जीत हुई. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अब अथॉरिटी की तरफ से सील किए गए टावर फिर से खोले जाएंगे. इस फैसले से उन बायर्स को बहुत बड़ी राहत मिली है, जिनके फ्लैट्स का निर्माण कार्य अथॉरिटी की सख्त कार्रवाई के कारण पूरी तरह से रुक गया था.
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने एनसीएलएटी के फैसले को पलटते हुए स्पष्ट किया है कि पुराने दिवालिया बिल्डर की देरी के दंडात्मक ‘समय विस्तार शुल्क’ को दिवालिया प्रक्रिया की लागत नहीं माना जा सकता. कोर्ट ने कहा कि जब घर खरीदारों और प्रोजेक्ट को पूरा करने वाले नए समाधान आवेदक की देरी में कोई भूमिका नहीं है, तो उन पर यह भारी जुर्माना थोपना अनुचित है और यह उन्हें पिछली कंपनी की गलतियों की सजा देने जैसा होगा.
वहीं एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित चौहान ने बताया कि अथॉरिटी ने मैप वेलिडेशन समेत टाइम एक्सटेंशन चार्ज के नाम पर बायर्स पर 350 करोड़ रुपये की भारीभरकम देनदारी निकाल दी थी. इसके बाद तीन टावर सील कर दिए गए. मजबूरी में बायर्स को सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा.
खुद के पैसों से बनाए 2700 घर
लोटस पनाश शहर की इकलौती ऐसी एसोसिएशन है, जिसने बिल्डर के दिवालिया होने पर हार नहीं मानी. 10 जनवरी 2019 को बिल्डर के हाथ खड़े करने के बाद होम बायर्स ने पूल एंड बिल्ड स्कीम के तहत खुद से प्रोजेक्ट पूरा करने का फैसला लिया. 2019 से लेकर 2024 तक इन लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई से 250 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया. इस रकम से बायर्स ने 2700 फ्लैट बनाकर सफलतापूर्वक डिलीवर कर दिए. सिर्फ तीन टावर में करीब 350 फ्लैट का काम बाकी था, तभी सीलिंग की कार्रवाई हो गई. अब कोर्ट के आदेश के बाद ये बचे हुए काम भी पूरे हो सकेंगे.
ग्रेनो अथॉरिटी की स्कीम रही फ्लॉप
एक तरफ बायर्स अपने फ्लैट के लिए इतनी लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं, वहीं ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी अपने बने हुए फ्लैट बेचने में पूरी तरह नाकाम रही है. अथॉरिटी ने जनवरी में सेक्टरओमिक्रॉन1ए में 90 फ्लैटों की एक नई स्कीम निकाली थी. इन फ्लैट्स का एरिया 83 वर्गमीटर तथा बेस प्राइज 73.23 लाख से 74.35 लाख रुपये के बीच रखा गया था. नीलामी के जरिए आवंटन होना था, लेकिन खरीदारों ने इसमें कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई. बारबार आवेदन की तारीख बढ़ाने के बावजूद अथॉरिटी को सिर्फ 5 आवेदन ही मिले.
पहले आओ पाओ की तर्ज पर मिलेंगे फ्लैट
गुरुवार को इन 5 फ्लैट का आवंटन नीलामी प्रक्रिया के जरिए कर दिया गया. बेस प्राइज से एक फीसदी अधिक राशि पर ये फ्लैट आवेदकों को दिए गए. लेकिन सोसायटी में अभी भी बड़ी संख्या में फ्लैट खाली पड़े हैं. जानकारी के मुताबिक करीब 350 फ्लैट अभी तक आवंटित नहीं हुए हैं. नीलामी योजना के बुरी तरह विफल होने के बाद अब अथॉरिटी ने अपनी रणनीति बदल दी है. अब इन बचे हुए फ्लैट्स का आवंटन पहले आओपहले पाओ के आधार पर किया जाएगा, ताकि खाली पड़े घरों को जल्द से जल्द भरा जा सके.



