अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण सामने आने के बाद अब सबकी निगाहें श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक पर टिकी हैं. सोमवार को दोपहर 3 बजे यह बैठक मंदिर परिसर के गेस्ट हाउस में होगी. इसकी अध्यक्षता ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास करेंगे. ऐसा माना जा रहा है कि इस अहम बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर भी विचार किया जाएगा. वहीं इस बैठक के और भी कई अहम एजेडें हैं. इसके अलावा ट्रस्ट में कई फेरबदल भी संभव है. बैठक में पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति पर फैसला हो सकता है.

सूत्रों के हवाले से खबर है कि में सबसे पहले महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल कुमार मिश्रा के इस्तीफों पर चर्चा होने की संभावना है. इसके बाद तीन सदस्यीय SIT की अंतरिम जांच रिपोर्ट ट्रस्ट के सामने रखी जाएगी. इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई, जवाबदेही तय करने और चढ़ावे की गणना व्यवस्था में बदलाव जैसे मुद्दों पर फैसला हो सकता है.

आगे की रणनीति पर होगा मंथन

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच में हर गुजरते दिन के साथ नई जानकारियां सामने आ रही हैं. आरोपियों से पूछताछ चल रही है और सबूतों की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं. इस घटनाक्रम के बीच सोमवार को अयोध्या में होने वाली राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक पर सबकी नजरें टिकी हैं. चढ़ावा चोरी कांड सामने आने के बाद पहली बार सभी ट्रस्टी एक साथ बैठकर आगे की रणनीति पर मंथन करेंगे.

ये बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब चढ़ावा चोरी मामले में जुड़े 8 अभियुक्त जेल में हैं. सूत्रों के अनुसार, बैठक में राम मंदिर की प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी विचार किया जा सकता है.

इनमें मंदिर के लिए एक पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति पर चर्चा हो सकती है. माना जा रहा है कि CEO की नियुक्ति से मंदिर के संचालन, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और पेशेवर स्वरूप देने की दिशा में कदम उठाया जाएगा.

चंपत राय के भाग्य का होगा फैसला

सोमवार को होने वाली बैठक में सबकी नजर चंपत राय पर रहेगी. ये बैठक ट्रस्ट में उनका भविष्य तय करेगी. ट्रस्ट पहले ही ये स्पष्ट कर चुका है कि उन्होंने अपना इस्तीफा सौंप दिया है, लेकिन अब तक उस पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है. ऐसे में देखना होगा कि सोमवार की बैठक में ट्रस्ट उनके इस्तीफे पर क्या निर्णय लेता है? हर कोई इस मामले का पूरा सच जानना चाहता है.

इस बीच, रविवार को पुलिस ने जेल में बंद अभियुक्तों से भी पूछताछ की. करीब 5 घंटे तक चली पूछताछ में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, करुणेश पांडे और मनीष यादव से चढ़ावा चोरी मामले से जुड़े सवाल पूछे गए. पूछताछ का फोकस चढ़ावे की कथित चोरी और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन पर रहा.

पुलिस जांच में अहम खुलासा

उधर जांच एजेंसियो को इस मामले में कई ऐसी बातें पता चली जो रामभक्तों को हैरान कर देंगी. सूत्रों के मुताबिक अभियुक्त अविनाश शुक्ला के खाते से 15 लाख रुपये से ज्यादा के लेनदेन की जानकारी मिली है. आरोप है कि उसने कई लोगों को पैसे ट्रांसफर किए और कुछ लोगों को नकद रकम भी दी.

जांच में ये भी सामने आया है कि अविनाश ने अपनी एक महिला मित्र को करीब दो लाख रुपये नकद और एक महंगा मोबाइल फोन उपहार में दिया था. सवाल है कि आखिर इतनी बड़ी रकम उसके पास कहां से आई. पुलिस अब उसके आय के स्रोत और वित्तीय लेनदेन की गहन पड़ताल कर रही और ये पता लगाने में जुटी है कि ये पैसा कहीं मंदिर के चढ़ावे से जुड़ा हुआ तो नहीं है.

चढ़ावा चोरी पर गरमाई सियासत

इस बीच विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने मामले की जांच का दायरा बढ़ाने की मांग उठाई है. उन्होंने अयोध्या पुलिस के जांच अधिकारी को पत्र लिखकर कहा है कि सार्वजनिक मंचों, टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर बड़े आरोप लगाने वाले नेताओं के बयान भी दर्ज किए जाएं, ताकि उनके पास यदि कोई तथ्य या दस्तावेज हैं तो वे भी जांच का हिस्सा बन सकें. उन्होंने आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह, कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी समेत कुछ नेताओें का नाम अपने पत्र में लिखा है.

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में RSS प्रमुख मोहन भागवत का बयान भी आया है. उन्होंने RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के बयान का समर्थन किया. लखनऊ पहुंची बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने इस मामले में विपक्ष पर हमला बोला.

इस बीच, श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेवगिरि ने एक पत्र जारी कर इस पूरे प्रकरण पर अपन मत स्पष्ट किया है. उन्होंने लिखा है कि ट्रस्टी बनने या कोषाध्यक्ष बनने के लिए उन्होंने किसी से निवेदन नहीं किया था. अयोध्या आनेजाने या प्रवास का कोई खर्च आज तक ट्रस्ट से नहीं लिया. निजी तौर पर कभी नकद दान स्वीकार नहीं किया. उन्होंने साफ कहा कि अपराधी चाहे कितना भी बड़ा हो, बिना नाम और पद देखे उसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए.

दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

इस पूरे घटनाक्रम ने अयोध्या के लोगों को भी बेचैन कर दिया है. रामभक्तों और स्थानीय नागरिकों की एक ही मांग है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो, दोषी चाहे कोई भी हो उसे कड़ी सजा मिले और भगवान राम के नाम पर मिलने वाले चढ़ावे की पवित्रता पर कभी कोई सवाल न उठे.

फिलहाल निगाहें सोमवार को होने वाली ट्रस्ट की बैठक पर और SIT की जांच पर टिकी है. एक ओर जांच ये तय करेगी कि चोरी की साजिश कितनी गहरी थी, तो दूसरी ओर ट्रस्ट के फैसले ये साफ करेंगे कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यवस्था में क्या बदलाव जरूरी हैं. यानी आने वाले कुछ दिन इस पूरे प्रकरण की दिशा और दशा दोनों तय कर सकते हैं.

ब्यूरो रिपोर्ट, टीवी9 भारतवर्ष