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बिहार के नवादा के आनंदपुरा स्थित सरकारी स्कूल में कक्षा 8 की छात्राओं ने 52 वर्षीय प्रधानाध्यापक महेश प्रसाद यादव पर कथित तौर पर अनुचित तरीके से छूने और बदसलूकी के गंभीर आरोप लगाए. शिकायत सामने आते ही स्कूल में हंगामा हो गया और परिजन व स्थानीय लोग मौके पर पहुंच गए. पुलिस ने स्थिति संभालने के बाद आरोपी प्रिंसिपल को गिरफ्तार कर लिया. मामले में POCSO Act के तहत FIR दर्ज की गई है और नवादा SP ने जांच के लिए SIT गठित की है.

रिपोर्टों के मुताबिक, 18 सितंबर को एक छात्रा परीक्षा से जुड़ी कॉपी और प्रश्नपत्र लेने प्रिंसिपल के कार्यालय पहुंची थी. छात्रा ने आरोप लगाया कि वहां उसके साथ गलत तरीके से व्यवहार किया गया. बाद में उसने अपनी सहेलियों को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद अन्य छात्राओं ने भी प्रिंसिपल के व्यवहार को लेकर शिकायत की.

छात्रों के आरोपों में क्या-क्या?

लड़कियों ने आरोप लगाया कि प्रधानाचार्य उन्हें उठा लेते थे और उनके गाल छूते थे. उन्होंने यह भी कहा कि जब भी वे बाथरूम जाथी थी तो उनका पीछा करते थे और उन्हें छुप-छुपकर देखते थे. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। इन आरोपों के बाद अभिभावकों के स्थानीय निवासियों में आक्रोश फैल गया जिसके बाद स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया गया.

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स्कूल में जुटी भीड़, पुलिस ने संभाला मोर्चा

छात्राओं की शिकायत की जानकारी मिलते ही उनके परिजन और स्थानीय लोग स्कूल पहुंच गए. स्थिति तनावपूर्ण होने पर नगर थाना पुलिस और Dial-112 की टीम मौके पर पहुंची. पुलिस ने भीड़ को शांत कराया और प्रधानाध्यापक को सुरक्षित तरीके से थाने ले गई.

POCSO में केस, प्रिंसिपल गिरफ्तार

छात्राओं की शिकायत के आधार पर पुलिस ने FIR दर्ज की है. इसमें कथित छेड़छाड़ और अनुचित स्पर्श से जुड़े आरोपों के साथ POCSO Act की संबंधित धाराएं लगाई गई हैं. पुलिस के मुताबिक, महेश प्रसाद यादव को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.

मेडिकल और बयान की प्रक्रिया पूरी

पुलिस ने छात्राओं को महिला पुलिस अधिकारी की निगरानी में मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेजा. उनके बयान अदालत में दर्ज कराने की प्रक्रिया भी की गई है. स्कूल में लगे CCTV फुटेज और दूसरे उपलब्ध साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है.

नवादा SP ने बनाई SIT

मामले की गंभीरता को देखते हुए नवादा के SP ने Special Investigation Team यानी SIT गठित की है. टीम छात्राओं के बयान, CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपों की जांच करेगी. घटना के बाद छात्राओं से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है. इसमें छात्राएं रोते हुए अपनी शिकायतों के बारे में बताती नजर आती हैं. हालांकि, वायरल वीडियो को जांच का अंतिम सबूत नहीं माना जा सकता. नाबालिगों की पहचान उजागर करने वाली सामग्री साझा करना भी कानूनन संवेदनशील विषय है.

अब जांच में क्या-क्या देखा जाएगा?

पुलिस यह पता लगाएगी कि छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए क्या साक्ष्य उपलब्ध हैं, CCTV में क्या रिकॉर्ड हुआ और क्या पहले भी ऐसी शिकायतें सामने आई थीं. फिलहाल आरोपी के खिलाफ FIR, गिरफ्तारी और SIT जांच की कार्रवाई हो चुकी है. आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी.