शेयर बाजार में जियो की लिस्टिंग हो गई है. कंपनी का शेयर 1350 रुपए से ज्यादा की कीमत नर कारोबार कर रहा है. अब बड़ा सवाल ये है कि आखिर इस आईपीओ और लिस्टिंग से किसे कितना फायदा हुआ है. इस आईपीओ को लाने के लिए 19 लीड मैनेजर्स को काम पर लगाया गया था. ऐसे में उनकी फीस काफी अहम है. रिपोर्ट के अनुसार उन 19 बैंकों को करीब 200 करोड़ रुपए की फीस दी गई है. वहीं दूसरी ओर लिस्टिंग से पहले जियो की तिजौरी में एंकर निवेशकों ने 8100 करोड़ रुपए से ज्यादा जुटाए थे. वो भी एक बड़ा फायदा कंपनी को हुआ है. अब बात जियो लिस्टिंग के बाद के फायदे की करते हैं. लिस्टिंग के बाद कंपनी की वैल्यूएशन 2.36 लाख करोड़ रुपए बढ़ गई है. जिसकी वजह से जियो प्लेटफॉर्म्स देश की दूसरी सबसे वैल्यूड कंपनी बन गई है. साथ ही इस इश्यू में आम निवेशकों को भी 21 फीसदी से ज्यादा का फायदा हुआ है.

जियो की तिजौरी को फायदा
लिस्टिंग से पहले जियो प्लेटफॉर्म्स ने एंकर निवेशकों से 8110 करोड़ रुपए जुटाए. जोकि पूरी पैसा जियो की तिजौरी में गया है. इस पैसे का इस्तेमाल कंपनी कर्ज चुकाने और नए प्रोजेक्ट्स शुरू करने में करेगी. जानकारों के अनुसार जियो का आईपीओ पूरी तरह से फ्रेश इश्यू वाला था. ऐसे में एंकर निवेशकों से जुटाया गया पैसा ना तो प्रमोटर मुकेश अंबानी और ना ही निवेशक मेटा, गूगल आदिया की जेब जाएगा. खास बात तो ये है कि एंकर निवेशकों की ओर से जियो के लिए 30 गुना से ज्यादा की बोली लगाई गई थी.
लीड मैनेजर्स को कितने मिले?
जियो आईपीओ को लाने के लिए 19 बैंकों को लीड मैनेजर बनाया गया था. ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस के अनुसार, इस ऑफर के लिए BRLM कोटक महिंद्रा कैपिटल कंपनी, मॉर्गन स्टेनली इंडिया कंपनी प्राइवेट, BofA सिक्योरिटीज इंडिया, एक्सिस कैपिटल, BNP पारिबा, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स इंडिया प्राइवेट, CLSA इंडिया प्राइवेट, DAM कैपिटल एडवाइजर्स, गोल्डमैन सैक्स सिक्योरिटीज प्राइवेट, HDFC बैंक, HSBC सिक्योरिटीज एंड कैपिटल मार्केट्स प्राइवेट, ICICI सिक्योरिटीज, IIFL कैपिटल सर्विसेज , जेफरीज इंडिया प्राइवेट, JM फाइनेंशियल, J.P. मॉर्गन इंडिया प्राइवेट, SBI कैपिटल मार्केट्स, UBS सिक्योरिटीज इंडिया प्राइवेट और 360 ONE WAM रहे. जानकारी के अनुसार इन लीड मैनेजर्स की फीस कुल इश्यू प्राइस की 0.65 फीसदी रखी गई थी. बार एंड बेंच की रिपोर्ट के अनुसार जियो आईपीओ का कुल साइज 30,187 करोड़ रुपए था. ऐसे में 0.65 फीसदी के हिसाब से लीड मैनेजर्स की फीस 196.2 करोड़ रुपए रही.
निवेशकों को भी मोटा फायदा
शेयर बाजार में लिस्ट होने के बाद निवेशकों को भी मोटा फायदा हुआ है. इसे आंकड़ों से समझने की कोशिश करते हैं. जियो प्लेटफॉर्म के एक लॉट का साइज 12 शेयरों का था. ये खबर आप जस्ट अभी में पढ़ रहे हैं। जिसकी कीमत 1119 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से 13,428 रुपए थी. कंपनी की लिस्टिंग 1358 रुपए पर हुई है. ऐसे में निवेशक के एक लॉट साइज की वैल्यू 16,296 रुपए हो गई. इसका मतलब है कि निवेशकों को एक लॉट पर 2,868 रुपए का फायदा हुआ है. ये पूरा कैलकुलेशन रिटेल निवेशकों के लिए है. जिन्होंने इश्यू प्राइस पर जियो के शेयरों में निवेश किया था.
देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी
जियो प्लेटफॉर्म्स की लिस्टिंग के बाद कंपनी की वैल्यूएशन अनलॉक हो गई है. मौजूदा समय में कंपनी की वैल्यूएशन 12.50 लाख करोड़ रुपए है. इसका मतलब है कि इश्यू प्राइस के हिसाब से जो वैल्यूएशन लगाई गई थी, उससे 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा बढ़ गई है. जिसकी वजह से जियो प्लेटफॉर्म्स रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बन चुकी है. जियो प्लेटफॉर्म ने एयरटेल को पीछे छोड़ दिया है. जिसकी मौजूदा वैल्यूएशन 12 लाख करोड़ रुपए के आसपास देखने को मिल रही है.



